AI का डरावना सच, IT सेक्टर में वैल्यूएशन का रीसेट
यह गिरावट सिर्फ मौजूदा नतीजों का नतीजा नहीं है, बल्कि यह भारतीय IT सेक्टर के लिए एक बड़े री-कैल्कुलेशन (re-calculation) का संकेत दे रही है। खासकर AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के बढ़ते दखल के चलते, कंपनियां अपने भविष्य के रेवेन्यू (revenue) और वैल्यूएशन (valuation) को लेकर नए सिरे से सोच रही हैं। AI-संचालित इकोनॉमी में पारंपरिक IT सर्विसेज, खासकर एप्लीकेशन डेवलपमेंट एंड मेंटेनेंस (ADM) की मांग पर असर पड़ने की आशंका है।
Nifty IT इंडेक्स की हालत और ब्रोकरेज की राय
Nifty IT इंडेक्स, जिसका P/E (प्राइस-टू-अर्निंग्स) रेशियो फिलहाल करीब 23.6 है, उसने पिछले 1 साल में -20.9% का निगेटिव CAGR (कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट) दिखाया है। हालांकि यह इसके एवरेज P/E 25.77 से थोड़ा कम है, लेकिन लगातार गिरता P/E रेशियो निवेशकों की बढ़ती चिंता को दर्शाता है। इंडेक्स 7 अप्रैल 2025 को 30,918.95 के 52-week low पर पहुंचा था। RSI (रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स) लगभग 32.92 के ओवरसोल्ड (oversold) जोन में होने के बावजूद बिकवाली का दबाव कम नहीं हो रहा है। टेक्निकल इंडिकेटर्स (technical indicators) 'एक्सट्रीमली बेयरिश' (Extremely Bearish) का संकेत दे रहे हैं, जिसका मतलब है कि मार्केट सिर्फ तकनीकी कारणों से नहीं, बल्कि फंडामेंटल (fundamental) कारणों से भी री-रेटिंग (re-rating) झेल रहा है।
AI ऑटोमेशन का खतरा और कंपनियों पर असर
इस गिरावट की मुख्य वजह AI-बेस्ड सॉल्यूशंस (solutions) का बढ़ता इस्तेमाल है, जिनसे कोडिंग, बग फिक्सिंग और सिस्टम डिप्लॉयमेंट (deployment) जैसे काम ऑटोमेट (automate) हो सकते हैं। इससे पारंपरिक ADM रेवेन्यू पर स्ट्रक्चरल (structural) असर की चिंताएं बढ़ गई हैं। Nasdaq IT सर्विसेज बास्केट में भी गिरावट आई है, और भारतीय IT ADRs भी इसी राह पर हैं। Infosys ADRs में 10% और Wipro ADRs में 5% की गिरावट देखी गई है।
Wipro, जिसका P/E रेशियो करीब 17.12 है, और जिसके एनालिस्ट्स (analysts) की राय 'रिड्यूस' (Reduce) या 'अंडरपरफॉर्म' (Underperform) की ओर झुकी है, वह इस चिंता का ज्यादा खामियाजा भुगत रही है। यह अपने पीयर्स (peers) और ग्लोबल बेंचमार्क (benchmarks) से डिस्काउंट (discount) पर ट्रेड कर रहा है। ग्लोबल कंपनी Accenture का P/E 17-19 के आसपास है, जबकि IBM का P/E 23 से 35 के बीच है। HCL Technologies, जिसका P/E लगभग 24.5 है, Nifty IT इंडेक्स के एवरेज के करीब ट्रेड कर रहा है और एनालिस्ट्स की 'मॉडरेट बाय' (Moderate Buy) या 'आउटपरफॉर्म' (Outperform) की राय से इसे सहारा मिल रहा है।
###Infosys, TCS, Wipro पर दबाव, सेक्टर में बंटवारा!
Infosys, TCS और Wipro जैसे कई IT स्टॉक्स अपने 52-week lows पर पहुंच चुके हैं। Infosys, जिसे कई एनालिस्ट्स 'होल्ड' (Hold) या 'मॉडरेट बाय' (Moderate Buy) की रेटिंग दे रहे हैं, उसे भी 20% एनालिस्ट्स की बेयरिश (bearish) राय का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी की पिछली तिमाही में रेवेन्यू में साल-दर-साल गिरावट भी एक चिंता का विषय है।
यह स्थिति सेक्टर में एक संभावित बंटवारे का संकेत देती है: जो कंपनियां AI इंटीग्रेशन (integration) और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन (digital transformation) में सफल होंगी, वे शायद वापसी कर लें, जबकि ADM पर ज्यादा निर्भर रहने वाली कंपनियों को लंबे समय तक वैल्यूएशन में दबाव झेलना पड़ सकता है। Nifty IT इंडेक्स का -20.9% का 1-year CAGR इस व्यापक अंडरपरफॉर्मेंस (underperformance) को दिखाता है।
आगे क्या? AI के दौर में कंपनियों को बदलना होगा!
US जॉब्स डेटा (jobs data) के मजबूत आने से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कम हुई हैं, जिससे टेक्नोलॉजी सेक्टर में 'रिस्क-ऑफ' (risk-off) सेंटीमेंट (sentiment) बढ़ा है। Wipro के लिए, हालिया डाउनग्रेड (downgrade) और 'रिड्यूस' की कंसेंसस रेटिंग (consensus rating) एक मुश्किल तस्वीर पेश करती है। Infosys के लिए भी, एनालिस्ट्स की ज्यादातर 'बाय' रेटिंग के बावजूद, बेयरिश एनालिस्ट्स और रेवेन्यू/मार्जिन (margin) पर दबाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
मौजूदा वैल्यूएशन मल्टीपल्स (valuation multiples) भले ही कुछ कंपनियों के लिए ऐतिहासिक पीक (peak) से कम लग रहे हों, लेकिन AI क्षमताओं के लिए बढ़ने वाले निवेश और धीमे रेवेन्यू ग्रोथ की संभावनाओं को देखते हुए इन्हें फिर से आंका जा रहा है। ऊंची ब्याज दरों का लंबा दौर भविष्य की कमाई पर डिस्काउंट रेट (discount rate) को और बढ़ाता है, जिससे ग्रोथ स्टॉक्स (growth stocks) पर दबाव बना रहता है। मार्केट का मौजूदा सेंटिमेंट और AI डिसरप्शन (disruption) जैसे सेक्टर-स्पेसिफिक हेडविंड्स (headwinds) बताते हैं कि कई IT स्टॉक्स के लिए अभी और गिरावट बाकी हो सकती है।
हालांकि, निकट भविष्य में वोलेटिलिटी (volatility) जारी रहने की उम्मीद है, लेकिन कई एनालिस्ट्स खास IT कंपनियों के लिए पॉजिटिव आउटलुक (outlook) बनाए हुए हैं। HCL Technologies, जिसे ज्यादातर एनालिस्ट्स 'आउटपरफॉर्म' या 'बाय' रेटिंग दे रहे हैं और जिसके टारगेट प्राइस (target price) में अच्छी बढ़त की संभावना दिख रही है, उसे कुछ लोग डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन का फायदा उठाने वाला मान रहे हैं। Infosys भी लंबी अवधि की रणनीतिक पोजिशनिंग (positioning) में अपनी क्षमता के कारण कई एनालिस्ट्स की 'मॉडरेट बाय' सूची में है। लेकिन, मौजूदा मार्केट सेंटीमेंट और AI डिसरप्शन की स्ट्रक्चरल प्रकृति को देखते हुए, निवेशकों की निगाहें इस बात पर टिकी रहेंगी कि कंपनियां अपने बिजनेस मॉडल और रेवेन्यू स्ट्रीम्स को इस उभरते टेक्नोलॉजी परिदृश्य के अनुसार कितनी जल्दी ढाल पाती हैं। AI इंटीग्रेशन और डिजिटल सर्विसेज की ओर एक सफल कदम ही भविष्य की ग्रोथ और वैल्यूएशन रिकवरी (recovery) का मुख्य निर्धारक साबित होगा।
