AI का डर बनी बिकवाली की मुख्य वजह
Indian IT सेक्टर में निवेशकों का सेंटिमेंट (Sentiment) अचानक से खराब हो गया, जिसकी मुख्य वजह Anthropic जैसी कंपनियों द्वारा एडवांस एंटरप्राइज AI टूल्स का लॉन्च रहा। इस डेवलपमेंट ने इस डर को और बढ़ा दिया कि बड़े पैमाने पर ऑटोमेशन से पारंपरिक IT सेवाओं और सॉफ्टवेयर मेंटेनेंस (Software Maintenance) की डिमांड में भारी कमी आ सकती है। इस खबर के कारण दुनियाभर में सॉफ्टवेयर और टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में बिकवाली देखी गई है, जिसने लेबर-इंटेंसिव आउटसोर्सिंग फर्मों, खासकर इंडियन आईटी दिग्गजों के लॉन्ग-टर्म ग्रोथ की संभावनाओं और मार्जिन विजिबिलिटी (Margin Visibility) का फिर से आकलन करने पर मजबूर कर दिया है। Nifty IT इंडेक्स को 3 फरवरी 2026 के बाद से सिर्फ आठ ट्रेडिंग दिनों में लगभग 19% की भारी गिरावट का सामना करना पड़ा है।
ग्लोबल मार्केट और मैक्रो इकोनॉमिक फैक्टर्स का असर
जब भारतीय IT कंपनियों के अमेरिकन डिपॉजिटरी रिसिप्ट्स (ADRs) में बड़ी गिरावट दर्ज हुई, तो दबाव और बढ़ गया। Infosys के ADRs में हफ्ते भर में लगभग 9-10% की गिरावट आई, जबकि Wipro के ADRs में करीब 4-5% की कमी देखी गई। इन सेक्टर-स्पेसिफिक चिंताओं के बीच, हाल के अमेरिकी लेबर मार्केट के आंकड़ों ने मजबूत जॉब ग्रोथ दिखाई, जिससे यह चिंता बढ़ी कि फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) ब्याज दरों में कटौती को टाल सकता है। इस मैक्रो अनिश्चितता और नैस्डैक (Nasdaq) इंडेक्स में रात भर में लगभग 2% की गिरावट ने भारतीय IT शेयरों पर भारी दबाव डाला, क्योंकि इन कंपनियों का रेवेन्यू (Revenue) बड़ी हद तक अमेरिकी क्लाइंट्स पर निर्भर करता है।
वैल्यूएशन में बड़ी गिरावट
इस आक्रामक बिकवाली ने प्रमुख भारतीय IT फर्मों के पी/ई मल्टीपल (P/E Multiples) को कई सालों के निचले स्तर पर धकेल दिया है। फरवरी 2026 के मध्य तक, Infosys का पी/ई लगभग 21.0x-21.7x पर कारोबार कर रहा था, और TCS का पी/ई करीब 19.8x-22.3x था। ये वैल्यूएशन अब Nifty IT इंडेक्स के पी/ई, जो कि लगभग 23.5x-23.6x है, से भी नीचे आ गए हैं। Wipro का पी/ई और भी कंप्रेस्ड होकर 16.6x-19.2x पर है, जबकि HCL Technologies का पी/ई थोड़ा ऊपर, लगभग 24.3x-26.4x पर है। यह भारतीय IT वैल्यूएशन को अमेरिकी टेक दिग्गजों जैसे Nvidia (पी/ई 46.7x-49.3x) और Palantir (पी/ई 205x से ऊपर) की तुलना में भारी डिस्काउंट पर रखता है। Microsoft का पी/ई 25.2x-26.3x HCL Technologies के मुकाबले ज्यादा तुलनात्मक है। Infosys का 52-हफ्ते का निचला स्तर फरवरी 2026 के आसपास $16.31 के करीब देखा गया। TCS के शेयर भी 13 फरवरी 2026 को अपने 52-हफ्ते के निचले स्तर ₹2,585.00 पर पहुँच गए, जो उसके 52-हफ्ते के हाई से लगभग 31% नीचे था। Nifty IT इंडेक्स का 1-साल का CAGR -23.2% रहा, जो हाल की गिरावट की गंभीरता को दिखाता है।
स्ट्रक्चरल जोखिम और मैनेजमेंट पर नजर
निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि AI पारंपरिक IT सेवाओं की डिमांड को स्थायी रूप से बदल सकता है, जिससे मार्जिन में लगातार कमी आ सकती है। पिछले तकनीकी बदलावों के विपरीत, AI में जटिल कामों को ऑटोमेट करने की क्षमता लेबर-इंटेंसिव आउटसोर्सिंग फर्मों के रेवेन्यू मॉडल के लिए सीधा खतरा पैदा करती है। हालांकि Infosys और TCS जैसी कंपनियों ने ऐतिहासिक रूप से मजबूती और बेहतरीन एग्जीक्यूशन (Execution) दिखाया है, लेकिन उनके वर्तमान वैल्यूएशन, जो ऐतिहासिक निचले स्तरों और सेक्टर एवरेज से नीचे हैं, यह संकेत देते हैं कि मार्केट भविष्य की बड़ी चुनौतियों को प्राइस इन कर रहा है। TCS का की मूविंग एवरेज (Key Moving Averages) से लगातार नीचे ट्रेड करना एक बियरिश ट्रेंड (Bearish Trend) का संकेत देता है, जहां शेयर नए 52-हफ्ते के निचले स्तर बना रहा है और अगर महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल टूटते हैं तो और गिरावट की संभावना है। अमेरिकी क्लाइंट्स पर निर्भरता भी सेक्टर को अमेरिकी टेक्नोलॉजी मार्केट में किसी भी बड़ी मंदी या ग्लोबल इकोनॉमिक पॉलिसी में बदलावों के प्रति संवेदनशील बनाती है।
भविष्य का आउटलुक और एनालिस्ट्स की राय
मौजूदा निराशावाद के बावजूद, एनालिस्ट्स (Analysts) धीरे-धीरे रिकवरी की संभावना जता रहे हैं। Infosys के लिए, एनालिस्ट्स की आम सहमति रेटिंग 'होल्ड' (Hold) बनी हुई है, और प्राइस टारगेट हाल के स्तरों से 10-16% के संभावित अपसाइड का संकेत देते हैं। कुछ एनालिस्ट्स 2026 में एंटरप्राइज आईटी खर्च को लेकर सावधानी से आशावादी हैं और मानते हैं कि Infosys बेहतर एग्जीक्यूशन दिखा सकता है। IT सेक्टर का लॉन्ग-टर्म आउटलुक इस बात पर निर्भर करेगा कि यह कितनी जल्दी नई AI-संचालित सेवाओं और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पहलों की ओर मुड़ता है, जो नए रेवेन्यू स्ट्रीम खोल सकते हैं। हालांकि, तत्काल भविष्य बढ़ी हुई अनिश्चितता से भरा है, जिसमें Nifty IT इंडेक्स शॉर्ट-टर्म, मीडियम-टर्म और लॉन्ग-टर्म डाउनट्रेंड दिखा रहा है। यह इंगित करता है कि रिकवरी, यदि होती भी है, तो एक धीमी और कठिन प्रक्रिया साबित हो सकती है।
