भारत की विकास दर को मिल रहा पंख
देश की आर्थिक रफ्तार की बात करें तो, सेवा क्षेत्र (Services Sector) भारत के लिए ग्रोथ का मुख्य इंजन बना हुआ है। यह अब देश के कुल Gross Value Added (GVA) का 56% से भी ज्यादा हिस्सा है। इस मजबूत प्रदर्शन के दम पर, वित्तीय वर्ष 2026 (FY26) में GDP ग्रोथ 7.5% से 7.8% रहने और FY27 में 6.5% से 7.5% तक पहुंचने का अनुमान है।
हाल ही में GST दरों में किए गए बदलावों, खासकर कई सामानों को 5% या 18% जैसे निचले स्लैब में लाए जाने से, उपभोक्ताओं के लिए चीजें सस्ती होने और कुल मिलाकर मांग बढ़ने की उम्मीद जगी है। इसका सीधा फायदा ऑटोमोबाइल, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और सीमेंट जैसे उद्योगों को मिल सकता है।
विकास के अनुमान और बाज़ार का नज़रिया
Motilal Oswal की रिपोर्ट में Q3 FY26 के लिए 8.5% की सालाना वृद्धि का अनुमान लगाया गया है, जिससे उनका FY26 का कुल GDP ग्रोथ अनुमान 7.8% पर पहुंच गया है, जो सरकार के 7.4% के अनुमान से काफी बेहतर है। Goldman Sachs 2026 के लिए 6.9% और Deloitte 2025-26 में 7.5% से 7.8% के बीच वृद्धि का अनुमान लगा रहे हैं।
भारत की यह मजबूत आर्थिक गति, जो मुख्य रूप से घरेलू खपत पर आधारित है, 2026 और 2027 में GDP को लगभग 6.7-6.8% की दर से बढ़ाने की उम्मीद है। इन सब के बीच, शेयर बाज़ार में भी सकारात्मक रुझान है। विश्लेषकों का मानना है कि 2026 के अंत तक Nifty 50 इंडेक्स 28,500 से 29,800 के स्तर तक पहुंच सकता है, जो कंपनी की कमाई में वृद्धि से प्रेरित होगा।
मुद्रास्फीति पर नियंत्रण और RBI की रणनीति
कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) यानी खुदरा महंगाई दर 4.0% से 4.5% के दायरे में रहने का अनुमान है। Crisil के मुताबिक, FY26 में इसके 2.5% रहने के बाद FY27 में यह बढ़कर 4.3% हो सकती है। अच्छी बात यह है कि खाद्येतर वस्तुओं में महंगाई का दबाव कम रहने की उम्मीद है। इस स्थिर महंगाई और मजबूत आर्थिक विकास को देखते हुए, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा FY27 तक अपनी प्रमुख नीतिगत दरों (Policy Rates) को अपरिवर्तित रखने की संभावना है। RBI ने रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा है।
वैश्विक अनिश्चितताएँ और कर्ज़ का बोझ
हालांकि, इन सकारात्मक संकेतों के बावजूद, वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार नीतियों में संभावित बदलाव और पूंजी प्रवाह में अस्थिरता जैसी चुनौतियाँ बनी हुई हैं। ये बाहरी कारक भारत के आर्थिक विकास की राह में बाधा डाल सकते हैं।
दूसरी ओर, देश का पब्लिक डेट-टू-GDP अनुपात एक चिंता का विषय है। यह 2024 में लगभग 81.9% था और 2027 तक इसके 78% के आसपास स्थिर होने का अनुमान है। विकास पहलों के लिए लगातार उधार लेना इस कर्ज़ के बोझ को बढ़ा सकता है।
आगे की राह
कुल मिलाकर, भारत की अर्थव्यवस्था एक मजबूत विकास पथ पर है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताओं और घरेलू वित्तीय प्रबंधन पर बारीकी से नज़र रखने की ज़रूरत होगी। विश्लेषकों का मानना है कि FY27 में GDP ग्रोथ 6.5% से 7.5% के बीच रहने की उम्मीद है, जो निरंतर निवेश और घरेलू मांग पर निर्भर करेगा।
