Exicom Tele-Systems Share: स्टैंडअलोन रेवेन्यू में बंपर ग्रोथ, पर कंसोलिडेटेड घाटे ने बढ़ाई चिंता!
Overview
Exicom Tele-Systems ने Q3 FY26 के नतीजे जारी किए हैं, जो मिले-जुले रहे। जहां कंपनी के स्टैंडअलोन रेवेन्यू में **58.2%** की जोरदार सालाना बढ़ोतरी हुई, वहीं कंसोलिडेटेड ऑपरेशंस में **₹67.9 करोड़** का घाटा बढ़ गया। यह घाटा Tritium और Li-ion बैटरी के मार्जिन पर दबाव के कारण बढ़ा है।
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नंबर्स में क्या दिखा?
Exicom Tele-Systems के स्टैंडअलोन नतीजों की बात करें तो, Q3 FY26 में कंपनी का रेवेन्यू पिछले साल के मुकाबले 58.2% बढ़कर ₹233.7 करोड़ दर्ज किया गया। तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) आधार पर भी 2.3% की बढ़त देखने को मिली। EBITDA ₹16.1 करोड़ रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि से 5.9% ज्यादा है। हालांकि, EBITDA मार्जिन में भारी गिरावट आई, जो 6.9% रहा, जबकि पिछले साल यह 22.5% था। राहत की बात यह है कि कंपनी ने ₹3.5 करोड़ का नेट प्रॉफिट (PAT) कमाया, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में ₹-9.7 करोड़ का घाटा था। लेकिन, 9MFY26 के लिए स्टैंडअलोन PAT 89.8% गिरकर सिर्फ ₹1.7 करोड़ रह गया।
वहीं, कंसोलिडेटेड स्तर पर, रेवेन्यू 40.7% बढ़कर ₹276.7 करोड़ हुआ, लेकिन पिछली तिमाही (QoQ) से यह 1.8% कम रहा। सबसे चिंताजनक बात यह है कि कंसोलिडेटेड EBITDA में ₹-32.3 करोड़ का घाटा हुआ, जो पिछले साल के ₹-15.9 करोड़ से ज्यादा है। नेट लॉस भी बढ़कर ₹-67.9 करोड़ पर पहुंच गया, जबकि पिछले साल यह ₹-49.0 करोड़ था। कंसोलिडेटेड मार्जिन भी नेगेटिव रहे, -11.7% और -24.5%। 9MFY26 के लिए कंसोलिडेटेड PAT में तो भारी गिरावट आई, यह 394.4% लुढ़क कर ₹-203.8 करोड़ पर आ गया।
मार्जिन पर दबाव और बढ़े खर्च
इन घाटे के बढ़ने के पीछे की वजहों में, स्टैंडअलोन ग्रॉस मार्जिन का 22.1% (पिछली बार 33.3%) पर आना है। इसके मुख्य कारण Li-ion बैटरी के मार्जिन में नरमी और करेंसी का असर रहा। कंसोलिडेटेड ग्रॉस मार्जिन भी मामूली घटकर 27.8% (पिछली बार 28.1%) रहा।
खर्चों की बात करें तो, कंसोलिडेटेड डेप्रिसिएशन और एमॉर्टाइजेशन (Depreciation & Amortization) में 171.9% और अन्य खर्चों (Other Expenses) में 63.0% की भारी बढ़ोतरी ने घाटे को और बढ़ाया। साथ ही, कंसोलिडेटेड फाइनेंस कॉस्ट (finance costs) भी ₹11.5 करोड़ पर ज्यादा बनी रही।
मैनेजमेंट का क्या है प्लान?
कंपनी के मैनेजमेंट ने Q3 FY26 को 'कंसोलिडेशन का क्वार्टर' बताया है, जिसका मतलब है कि कंपनी ने इस तिमाही में अपनी स्थिति मजबूत की है। उनका मुख्य फोकस अगले फाइनेंशियल ईयर (FY27) के लिए एक मजबूत ऑर्डर पाइपलाइन बनाने पर है, जिससे FY27 में कंपनी की ग्रोथ 'मटेरियली स्ट्रॉन्ग' हो।
यह उम्मीदें Tritium की EBITDA को Q4 FY27 तक ब्रेक-ईवन पर लाने और नए प्रोडक्ट्स से रेवेन्यू में 3x ग्रोथ के लक्ष्य पर टिकी हैं। इसके अलावा, टेलीकॉम कंपनियों द्वारा कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) में बढ़ोतरी से क्रिटिकल पावर सेगमेंट को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। कंपनी का लक्ष्य FY27 तक एक्सपोर्ट रेवेन्यू का 20% तक पहुंचाना है।
आगे क्या?
हालांकि, सबसे बड़ा जोखिम कंसोलिडेटेड लेवल पर लगातार बढ़ते घाटे का है, जो Tritium सब्सिडियरी और Li-ion बैटरी के मार्जिन दबाव से जुड़ा है। FY27 के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को हासिल करने में एग्जीक्यूशन रिस्क (Execution Risk) काफी ज्यादा है। निवेशक Q4 के नतीजों का इंतजार करेंगे कि क्या उम्मीद के मुताबिक टर्नअराउंड (Turnaround) के संकेत मिलते हैं और ऑर्डर पाइपलाइन कितनी तेजी से कन्वर्ट होती है। US एक्सपोर्ट के लिए UL सर्टिफिकेशन और Tritium के US ऑर्डर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ग्रोथ के लिए कुछ सकारात्मक संकेत दे रहे हैं।