NCLAT में Jaiprakash Associates Ltd (JAL) की इंसॉल्वेंसी (Insolvency) का मामला सिर्फ इस बात पर नहीं टिका है कि किसने JAL के लिए ज्यादा पैसे दिए। Vedanta इस पूरी बिडिंग प्रोसेस की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठा रही है। कंपनी का दावा है कि यह प्रक्रिया Adani Enterprises के पक्ष में झुकी हुई थी और उसके अपने ऑफर को गलत तरीके से किनारे कर दिया गया। यह विवाद एक बड़े सवाल को खड़ा करता है: क्या क्रेडिटर्स (Creditors) के लिए सबसे अच्छी कीमत पाना और इंसॉल्वेंसी नियमों का सख्ती से पालन करना, दोनों एक साथ हो सकते हैं? इसका असर भारत में भविष्य में संकटग्रस्त संपत्तियों की बिक्री पर पड़ सकता है।
Adani की JAL डील पर NCLAT में सुनवाई
NCLAT में सुनवाई का मुख्य मुद्दा Vedanta की ओर से क्रेडिटर्स कमेटी द्वारा Adani Enterprises की ₹14,535 करोड़ की JAL डील को मंजूरी देने की चुनौती है। रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (Resolution Professional) के वकील ने ट्रिब्यूनल को बताया कि 5 सितंबर को भेजा गया एक ईमेल केवल प्रक्रिया के दौरान मिले सबसे ऊँचे वित्तीय मूल्य (₹12,505.85 करोड़ NAV पर) की जानकारी देता था, न कि Vedanta को आधिकारिक तौर पर सबसे बड़ा बिडर घोषित करता था। वकील ने यह भी तर्क दिया कि Vedanta का यह दावा कि वह सबसे बड़ा बिडर था, महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपाता है और कानूनी रूप से मान्य नहीं है। NCLAT बेंच ने नोट किया कि ईमेल 'केवल यह बताता है कि पहचान मानदंडों के अनुसार उच्चतम मूल्य NAV आधार पर ₹12,505 करोड़ है'।
बाज़ार पर एक नज़र: Adani और Vedanta के शेयर
17 अप्रैल, 2026 को, Adani Enterprises के शेयर लगभग ₹2210.4 पर ट्रेड कर रहे थे, जबकि Vedanta के शेयर ₹787.60 के आसपास थे, दोनों में मामूली बढ़त देखी गई। Adani Enterprises का P/E रेश्यो लगभग 21.41 था, और Vedanta का 24.93।
वैल्यूएशन और बिडिंग नियमों पर विवाद
Vedanta का तर्क है कि उसका बाद का ऑफर Adani के ऑफर से कुल वैल्यू और वर्तमान वैल्यू दोनों के मामले में काफी ज्यादा था, जिससे एक 'विकृत परिणाम' निकला जहां एक कम ऑफर स्वीकार कर लिया गया। रेजोल्यूशन प्रोफेशनल ने समझाया कि क्रेडिटर्स की कमेटी बिड का मूल्यांकन करने के लिए एक संयुक्त स्कोरिंग सिस्टम (80% मात्रात्मक, 20% गुणात्मक) का उपयोग करती है, न कि केवल कुल राशि को देखती है। उन्होंने कहा कि यह 'समग्र मूल्यांकन' विधि लगातार लागू की गई है। RP ने यह भी तर्क दिया कि Vedanta की 8 नवंबर की ऐडेंडम बिड (addendum bid) एक 'अवैध एकतरफा संशोधन' थी क्योंकि यह बिडिंग प्रक्रिया समाप्त होने के बाद जमा की गई थी, जिससे निष्पक्षता और समान अवसर को ठेस पहुंची।
बड़े संदर्भ में: कर्ज, रिकवरी रेट और बाज़ार के कारक
भारत के इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत Q3FY26 में औसत रिकवरी रेट लगभग 31.63% था, जिसका मतलब है कि क्रेडिटर्स अक्सर अपने कर्ज का एक बड़ा हिस्सा बट्टे खाते में डाल देते हैं। JAL पर कर्ज का भारी बोझ था, 28 फरवरी, 2026 तक इसका उधार लगभग ₹55,357.39 करोड़ था। National Company Law Tribunal (NCLT) ने Adani के ₹14,535 करोड़ के ऑफर को मंजूरी दी थी, जिसे Vedanta JAL की संपत्तियों, खासकर रियल एस्टेट का कम मूल्यांकन मानता है। बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर पर ₹12.2 लाख करोड़ के कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) का आवंटन इस सेक्टर में कंसॉलिडेशन (consolidation) की संभावनाओं को दर्शाता है। हालांकि, महंगाई का जोखिम और ब्याज दरों में संभावित वृद्धि बड़े सौदों के लिए फाइनेंसिंग लागत बढ़ा सकती है।
JAL इंसॉल्वेंसी केस के प्रमुख जोखिम
JAL इंसॉल्वेंसी मामले में एक बड़ा जोखिम समाधान प्रक्रिया की कथित निष्पक्षता है। Vedanta के यह दावे कि बिडिंग 'Adani के लिए टेलर-मेड' थी और महत्वपूर्ण वित्तीय विवरण रोके गए थे, प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हैं। हालांकि, रेजोल्यूशन प्रोफेशनल का यह विचार कि Vedanta की देर से आई बिड प्रक्रिया बंद होने के बाद एक अनुचित संशोधन थी, प्रक्रियात्मक रूप से सही है, लेकिन कुछ लोग इसे अनुकूल सौदा हासिल करने का तरीका मान सकते हैं। JAL का ₹55,000 करोड़ से अधिक का कर्ज दबाव को बढ़ाता है। इस तरह के लंबे कानूनी मुकदमे JAL की संपत्तियों का अवमूल्यन कर सकते हैं और क्रेडिटर्स को भुगतान में देरी कर सकते हैं। JAL के शेयर ट्रेडिंग से निलंबित हैं, और NCLT द्वारा मंजूर की गई योजना के तहत शेयरधारकों को किसी भी भुगतान के बिना डेलिस्टिंग (delisting) का प्रावधान है, जिससे उनका निवेश खत्म हो जाएगा। यह स्थिति संकटग्रस्त कंपनियों में इक्विटी (equity) से जुड़े अत्यधिक जोखिम को दर्शाती है।
JAL इंसॉल्वेंसी के लिए आगे क्या?
यह कानूनी विवाद जारी है। NCLAT आगे की दलीलें सुनेगा, जिसमें बैंकों का प्रतिनिधित्व करने वाले सॉलिसिटर जनरल (Solicitor General) से अगली सुनवाई में बात करने की उम्मीद है। ट्रिब्यूनल का फैसला JAL के स्वामित्व का निर्धारण करेगा और भारत में भविष्य के बड़े इंसॉल्वेंसी मामलों के लिए दिशानिर्देश स्थापित कर सकता है। Vedanta की मजबूत चुनौती का उद्देश्य या तो संपत्ति जीतना है या अधिक निष्पक्ष, उच्च-मूल्य वाले परिणाम के लिए जोर देना है। Adani का ऑफर, जिसे क्रेडिटर्स कमेटी का समर्थन प्राप्त है, अपनी प्रक्रिया और वैल्यूएशन की निरंतर जांच का सामना कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले कार्यवाही रोकने से इनकार कर दिया था और प्रमुख निर्णयों के लिए निगरानी समिति को ट्रिब्यूनल से मंजूरी प्राप्त करने का निर्देश दिया था, जो व्यापक नियामक निरीक्षण को दर्शाता है। Adani और Vedanta के निवेशक NCLAT के फैसलों पर अपनी कंपनियों की रणनीतियों और वित्तीय नतीजों पर संभावित प्रभावों के लिए नजर रखेंगे।
