Vedanta की चाल! Adani के JAL Deal को दी चुनौती, कहा - 'हमारा ऑफर था बेहतर'

LAWCOURT
Whalesbook Logo
AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Vedanta की चाल! Adani के JAL Deal को दी चुनौती, कहा - 'हमारा ऑफर था बेहतर'
Overview

Vedanta Group ने Jaiprakash Associates Ltd (JAL) के अधिग्रहण को लेकर Adani Enterprises के खिलाफ कानूनी मोर्चा खोल दिया है। Vedanta ने National Company Law Appellate Tribunal (NCLAT) में याचिका दायर कर कहा है कि उसका ऑफर Adani के ऑफर से कहीं ज्यादा बेहतर वैल्यू देता है।

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

Vedanta का वैल्यूएशन पर बड़ा दावा

Vedanta Group ने Adani Enterprises द्वारा Jaiprakash Associates Ltd (JAL) के सफल अधिग्रहण को National Company Law Appellate Tribunal (NCLAT) और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। Vedanta का कहना है कि उनका रेजोल्यूशन प्लान (Resolution Plan) वित्तीय रूप से कहीं ज्यादा बेहतर था। कंपनी के मुताबिक, Adani के ऑफर की तुलना में उनके प्लान में ₹3,400 करोड़ की ग्रॉस वैल्यू (Gross Value) और ₹500 करोड़ की नेट प्रेजेंट वैल्यू (NPV) ज्यादा थी। Vedanta का मुख्य तर्क है कि कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) ने जिस तरह से मूल्यांकन किया, उसमें वैल्यू मैक्सिमाइजेशन (Value Maximization) को प्राथमिकता नहीं दी गई। Vedanta के वकीलों ने बताया कि Adani को NPV में 29.30 अंक मिले, जबकि Vedanta को पूरे 35 अंक मिले थे। हालांकि CoC ने Adani के प्लान को चुना, Vedanta का आरोप है कि यह एक 'साउंड बिजनेस डिसीजन' नहीं था और इसमें कई खामियां थीं।

क्रेडिटर ने कैश को दी अहमियत

कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) ने Adani Enterprises के प्लान को चुनने का बचाव करते हुए कहा कि इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत डील हमेशा सिर्फ सबसे बड़े वैल्यू वाले बिडर को नहीं जाती। CoC ने कई बातों पर गौर किया, जैसे कि कितना अपफ्रंट कैश (Upfront Cash) मिल रहा है, प्लान कितना प्रैक्टिकल है और उसे कितनी जल्दी लागू किया जा सकता है। Adani के प्लान में करीब ₹6,000 करोड़ का अपफ्रंट कैश और 2 साल की रिपेमेंट (Repayment) अवधि शामिल थी। वहीं, Vedanta के प्लान में अपफ्रंट राशि ₹3,800 करोड़ से ₹6,563 करोड़ के बीच थी और भुगतान की अवधि 5 साल तक जा सकती थी। तुरंत कैश और तेजी से डील पूरी होने पर जोर देना अदालतों के फैसलों के अनुरूप है, जहां CoC की 'कमर्शियल विजडम' (Commercial Wisdom) को अक्सर मान्यता मिली है। क्रेडिटर्स ने Adani के प्रस्ताव को भारी समर्थन दिया, जिसके पक्ष में 89% से 93.81% वोट पड़े।

JAL की संपत्ति और सेक्टर का हाल

Jaiprakash Associates Ltd (JAL) जून 2024 में कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) में आई थी, जिस पर ₹57,000 करोड़ से ज्यादा का कर्ज था। JAL के पास सीमेंट प्लांट, रियल एस्टेट, हॉस्पिटैलिटी और कंस्ट्रक्शन जैसे कई तरह के एसेट्स (Assets) हैं, जिनमें नोएडा और ग्रेटर नोएडा की प्राइम लैंड भी शामिल है। 2026 तक भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट सेक्टर में सरकारी खर्च और शहरीकरण के कारण तेजी का अनुमान है, जो JAL की संपत्तियों को रिवाइव करने के लिए अच्छा माहौल बना सकता है। हालांकि, यह कानूनी विवाद अनिश्चितता बढ़ा रहा है। Vedanta Ltd का P/E रेश्यो (P/E Ratio) करीब 17.40x और मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalization) ₹2.82 लाख करोड़ है। Adani Enterprises की वैल्यू करीब ₹2.63 लाख करोड़ है। वहीं, सीमेंट सेक्टर की एक और कंपनी Dalmia Bharat का P/E रेश्यो 30-50x के बीच है।

गहरी समस्याएं और शेयरधारकों का नुकसान

JAL की इंसॉल्वेंसी, जयपी ग्रुप (Jaypee Group) की बड़ी वित्तीय परेशानियों से जुड़ी हुई है। कंपनी पर महत्वाकांक्षी विस्तार, प्रोजेक्ट में देरी और बड़े लोन डिफॉल्ट्स के कारण ₹57,000 करोड़ से ज्यादा का कर्ज जमा हो गया था। जयपी ग्रुप का वित्तीय संकट नया नहीं है; जयपी इंफ्राटेक (Jaypee Infratech) भी इंसॉल्वेंसी से गुजरी थी और उसे Suraksha Group ने अधिग्रहित किया था। इससे भी गंभीर बात यह है कि ग्रुप पर घर खरीदारों के पैसों के गलत इस्तेमाल के भी आरोप हैं। इसी मामले में जयपी इंफ्राटेक के मैनेजिंग डायरेक्टर मनोज गौर को ₹12,000 करोड़ के मनी-लॉन्ड्रिंग (Money-laundering) मामले में गिरफ्तार भी किया गया था। ये मुद्दे JAL से परे मैनेजमेंट और फाइनेंस की गहरी समस्याओं की ओर इशारा करते हैं। शेयरधारकों के लिए स्थिति बेहद निराशाजनक है। स्वीकृत रेजोल्यूशन प्लान में उन्हें कुछ भी नहीं मिलेगा, उनके शेयर रद्द कर दिए जाएंगे और उनके करीब ₹400 करोड़ का निवेश पूरी तरह डूब जाएगा।

आगे क्या होगा?

यह कानूनी लड़ाई जारी है। सुप्रीम कोर्ट ने Adani के रेजोल्यूशन प्लान पर रोक नहीं लगाई है, लेकिन NCLAT को Vedanta की अपील पर सुनवाई तेज करने का निर्देश दिया है। इस सुनवाई की उम्मीद अप्रैल 2026 के आसपास की जा रही है। JAL की संपत्तियों का अंतिम समाधान NCLAT के फैसले पर निर्भर करेगा, और संभवतः आगे की अपीलें भी हो सकती हैं। इससे Adani Group के लिए महत्वपूर्ण एग्जीक्यूशन रिस्क (Execution Risk) और संभावित देरी का सामना करना पड़ सकता है। यह कानूनी समीक्षा Adani के प्लान को तुरंत लागू होने से रोकेगी, जिससे JAL की संपत्तियों के पुनरुद्धार और वैल्यू रिकवरी पर असर पड़ेगा।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.