Marko Rupnik केस में वैटिकन का बड़ा बयान: झूठी है सज़ा-ए-मौत की खबरें, ट्रायल अभी जारी

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Marko Rupnik केस में वैटिकन का बड़ा बयान: झूठी है सज़ा-ए-मौत की खबरें, ट्रायल अभी जारी

वैटिकन ने पूर्व जेसुइट पादरी मार्को रुपनिक के खिलाफ चल रहे कैथोलिक मुकदमे पर आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है। हालिया मीडिया रिपोर्ट्स में उन्हें बरी किए जाने का दावा किया गया था, जिसे वैटिकन ने सिरे से खारिज कर दिया है। होली सी (Holy See) के अनुसार, आरोपों पर अभी कोई फैसला नहीं आया है और कानूनी प्रक्रिया जारी है।

Detailed Coverage

वैटिकन ने बुधवार को एक औपचारिक स्पष्टीकरण जारी किया है, जिसमें पूर्व जेसुइट पादरी मार्को रुपनिक पर लगे दुर्व्यवहार के आरोपों को लेकर चल रहे कैथोलिक मुकदमे (canonical trial) की पुष्टि की गई है। यह बयान एक इटैलियन ब्लॉग की उन हालिया खबरों का खंडन करता है जिनमें दावा किया गया था कि पादरी को गंभीर आरोपों से बरी कर दिया गया है। वैटिकन प्रेस ऑफिस ने इन बरी होने की खबरों को 'पूरी तरह से बेबुनियाद' बताया है और जोर दिया है कि न्यायिक प्रक्रिया अभी भी सक्रिय है।

इस मामले में कई महिलाओं और ननों ने यौन, आध्यात्मिक और मनोवैज्ञानिक शोषण के आरोप लगाए हैं। इनमें से कुछ आरोप 1990 के दशक के हैं और 2022 के अंत में इन आरोपों ने अंतर्राष्ट्रीय सुर्खियां बटोरी थीं। इन दावों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और चर्च के कैनन लॉ (canon law) के तहत आंतरिक न्यायिक प्रक्रियाओं की जटिलता के कारण यह मामला और भी पेचीदा हो गया है, जो नागरिक या आपराधिक अदालतों से अलग तरह से काम करता है।

कानूनी प्रक्रिया और ऐतिहासिक संदर्भ

मार्को रुपनिक पहले जेसुइट ऑर्डर का हिस्सा थे और एक प्रसिद्ध कलाकार हैं जिनकी मोज़ेक कला दुनिया भर के चर्चों में देखी जा सकती है। 2020 में, जेसुइट ऑर्डर ने रुपनिक को संक्षिप्त रूप से बहिष्कृत (excommunicate) कर दिया था, जब उन्होंने पाया कि रुपनिक ने कन्फेशनल (confessional) का इस्तेमाल उस महिला के साथ यौन संबंध बनाने के बाद उसे क्षमादान देने के लिए किया था। हालांकि वैटिकन ने शुरू में उम्र के कारण पुराने शिकायतों पर कार्रवाई करने से इनकार कर दिया था, 2023 में जेसुइट ऑर्डर से निकाले जाने के बाद स्थिति काफी बदल गई।

बाद में पोप फ्रांसिस ने इन पुराने दावों पर समय-सीमा (statute of limitations) को हटाकर हस्तक्षेप किया, जिसके बाद वर्तमान औपचारिक कैथोलिक मुकदमा आगे बढ़ सका। जज वर्तमान में साक्ष्य की जांच कर रहे हैं, जिसमें विभिन्न डायोसेस (dioceses), जेसुइट ऑर्डर और अन्य संबंधित पक्षों से एकत्र किए गए दस्तावेज़ शामिल हैं। वैटिकन का कहना है कि न्यायिक प्रक्रिया की अखंडता और इसमें शामिल लोगों की गोपनीयता की रक्षा के लिए सख्त गोपनीयता बनाए रखना आवश्यक है।

कैथोलिक कार्यवाही की सीमाएं

पीड़ितों के कानूनी प्रतिनिधियों ने वर्तमान प्रणाली की पारदर्शिता को लेकर चिंता जताई है। पांच महिलाओं का प्रतिनिधित्व करने वाली लौरा सग्रो (Laura Sgro) ने कहा कि ट्रिब्यूनल ने उनके मुवक्किलों का साक्षात्कार नहीं लिया है और पीड़ितों के लिए जानकारी तक पहुंच की कमी पर निराशा व्यक्त की है। चर्च की मौजूदा कैथोलिक प्रणाली के तहत, पीड़ितों को आम तौर पर प्राथमिक प्रतिभागियों के बजाय तीसरे पक्ष के गवाह के रूप में वर्गीकृत किया जाता है, जिससे अंतिम निर्णय आने तक मामले के विवरण तक उनकी पहुंच सीमित हो जाती है।

चल रहे मुकदमे के बावजूद, रुपनिक एक पादरी के रूप में अपनी स्थिति बनाए हुए हैं। एलेट्टी सेंटर (Aletti Center) से जुड़े समर्थकों सहित उनके समर्थकों ने लगातार आरोपों से इनकार किया है और उन्हें 'अप्रमाणित' बताया है। वैटिकन ने दोहराया है कि उसके आंतरिक मुकदमे कैनन लॉ के तहत काम करते हैं और नागरिक या आपराधिक न्याय प्रणालियों से अलग हैं। इस मामले पर आगे की निगरानी ट्रिब्यूनल से आने वाले अपडेट पर निर्भर करेगी, जो जांच जारी रहने पर स्वतंत्र रूप से अतिरिक्त साक्ष्य मांगने और संभावित रूप से गवाहों को बुलाने का अधिकार रखता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.