महाराष्ट्र सरकार ने सीनियर वकील उज्ज्वल निकम को केतन अग्रवाल हत्या मामले में स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त किया है। पीड़ित परिवार के अनुरोध के बाद यह फैसला लिया गया है ताकि फास्ट-ट्रैक कोर्ट में मुकदमे की कार्यवाही जल्द से जल्द पूरी हो सके। यह मामला, जो पहले लोहगढ़ किले के पास आकस्मिक मृत्यु के रूप में दर्ज था, अब एक हत्या की साजिश के तौर पर जांचा जा रहा है।
क्या हुआ?
महाराष्ट्र सरकार ने सीनियर एडवोकेट उज्ज्वल निकम को 25 वर्षीय केतन अग्रवाल की मौत से जुड़े मामले में स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के तौर पर नियुक्त करने का औपचारिक ऐलान किया है। यह फैसला पीड़ित परिवार और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच हुई बैठक के बाद आया है, जिसमें सीएम ने परिवार को सख्त कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया था। राज्य के विधि एवं न्याय विभाग को आवश्यक प्रक्रियाओं को शुरू करने का काम सौंपा गया है, जिसमें कार्यवाही में तेजी लाने के लिए फास्ट-ट्रैक ट्रायल की व्यवस्था भी शामिल है।
मामले की पृष्ठभूमि
इस महीने की शुरुआत में लोहगढ़ किले के पास कथित तौर पर चट्टान से गिरने से हुई केतन अग्रवाल की मौत की जांच में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है। अधिकारियों ने शुरू में इस घटना को एक आकस्मिक मौत के रूप में दर्ज किया था। हालांकि, आगे की जांच के बाद, पुलिस ने मामले को हत्या के रूप में फिर से वर्गीकृत किया है। कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने अग्रवाल की मंगेतर सिया गोयल और उसके एक परिचित चेतन चौधरी को आपराधिक साजिश के आरोप में गिरफ्तार किया है। दोनों संदिग्धों को भारतीय न्याय संहिता के तहत 29 जून तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।
अभियोजक का अनुभव
उज्ज्वल निकम एक अनुभवी आपराधिक वकील हैं, जो भारत में कई हाई-प्रोफाइल मामलों के लिए जाने जाते हैं। उनके करियर में 1993 के बॉम्बे सीरियल ब्लास्ट केस और 2008 के मुंबई आतंकी हमलों में स्पेशल प्रॉसिक्यूटर के रूप में कार्य करना शामिल है, जहां उन्होंने अजमल कसाब के खिलाफ राज्य का प्रतिनिधित्व किया था। उनके पिछले मामलों के पोर्टफोलियो में टी-सीरीज़ के संस्थापक गुलशन कुमार और राजनीतिक नेता प्रमोद महाजन के हत्या के मुकदमे भी शामिल हैं। राज्य को उम्मीद है कि इस मामले में उनकी नियुक्ति से अभियोजन पक्ष को महत्वपूर्ण कानूनी अनुभव मिलेगा।
आगे क्या?
मामले पर नजर रखने वालों के लिए मुख्य ध्यान कानूनी कार्यवाही की प्रगति पर रहेगा। 29 जून को पुलिस हिरासत समाप्त होने के बाद आगामी अदालती सुनवाई, जांच टीम द्वारा चार्जशीट दाखिल करना और फास्ट-ट्रैक अदालत के संचालन की समय-सीमा पर निगरानी रखी जाएगी। जैसे-जैसे मामला न्यायिक प्रणाली से गुजरेगा, साक्ष्य प्रस्तुत करने और अदालत की समय-सारणी के संबंध में अपडेट कानूनी प्रक्रिया में अगले कदम होंगे।
