अमेरिकी न्याय विभाग (US Department of Justice) ने भारतीय अरबपति गौतम अडानी के खिलाफ लगे धोखाधड़ी और रिश्वतखोरी के आरोपों को वापस लेने का फैसला किया है। ब्रुकलिन के संघीय अभियोजकों ने कहा है कि वे इस मामले में आरोपों को खारिज करने के इस निर्देश को चुनौती नहीं देंगे।
अमेरिका में कानूनी कार्यवाही का रुख बदला
अमेरिकी अटॉर्नी जोसेफ नोसेला जूनियर ने जज निकोलस गारौफिस को सूचित किया है कि इस मामले में मुख्य निर्णय लेने वाले वे स्वयं नहीं थे, बल्कि यह निर्देश अमेरिकी न्याय विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से आया था। यह फैसला गौतम अडानी और अडानी समूह के लिए एक बड़ी राहत है, क्योंकि समूह लगातार इन आरोपों का खंडन करता रहा है।
आरोपों की जड़ें और बचाव
अमेरिकी अधिकारियों ने पहले गौतम अडानी पर भारत में अधिकारियों को लगभग $265 मिलियन की रिश्वत देने की साजिश रचने का आरोप लगाया था। आरोप थे कि यह रिश्वत अडानी ग्रीन एनर्जी के तहत एक बड़े सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट के लिए अनुबंध हासिल करने के प्रयास में दी गई थी। अडानी समूह ने शुरू से ही इन सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए खारिज किया है।
केस खारिज करने की वजह
अमेरिकी न्याय विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ट्रेंट मैककॉटिर ने 4 जुलाई को कोर्ट को लिखे एक पत्र में केस खत्म करने के कारण बताए। विभाग ने मुख्य रूप से आरोपों की विदेशी प्रकृति का हवाला दिया, यह कहते हुए कि कथित गतिविधियां और इसमें शामिल व्यक्ति भारत में स्थित थे। इसके अलावा, विभाग ने ऐसे मामलों में अमेरिकी क्षेत्राधिकार की उपयुक्तता पर भी चिंता जताई और संकेत दिया कि पिछली प्रशासन से विरासत में मिले इस मामले में महत्वपूर्ण प्रक्रियात्मक जटिलताएं थीं।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
यह विकास निवेशकों के लिए कानूनी अनिश्चितता के एक लंबे दौर का अंत करता है। अडानी समूह का पोर्टफोलियो बंदरगाहों, ऊर्जा, ट्रांसमिशन और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में फैला हुआ है। इस कानूनी मामले का समाधान समूह की सूचीबद्ध कंपनियों के प्रति बाजार की धारणा को प्रभावित करने वाले एक बड़े बाहरी जोखिम को दूर करता है। अब निवेशक कंपनी के व्यावसायिक प्रदर्शन और प्रमुख क्षेत्रों में उसके परिचालन पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
