अमेरिकी न्याय विभाग ने अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी और उनके शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ घूसखोरी (bribery) और सिक्योरिटीज धोखाधड़ी (securities fraud) के आपराधिक आरोप हटा दिए हैं। यह फैसला 10 हफ्तों की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आया है, जिसमें कंपनी ने अपने बचाव में कई दलीलें पेश की थीं।
आरोपों की वापसी के पीछे क्या है?
अमेरिकी न्याय विभाग (US Department of Justice) ने शुक्रवार को पुष्टि की कि गौतम अडानी और कंपनी के अन्य अधिकारियों के खिलाफ सभी आपराधिक आरोप हटा दिए गए हैं। यह एक बड़ी राहत है, क्योंकि इन आरोपों ने अडानी ग्रुप की वैश्विक प्रतिष्ठा पर असर डाला था। कानूनी टीम ने 10 हफ्तों तक चली इस प्रक्रिया में 600 से अधिक पन्नों के सबमिशन जमा किए, जिसमें आरोपों के कानूनी आधार और सबूतों पर सवाल उठाए गए थे।
बचाव पक्ष की रणनीति
अडानी ग्रुप के वकीलों ने अपनी दलीलों में मुख्य रूप से अमेरिकी कानूनों के अधिकार क्षेत्र (jurisdictional challenges) और भारतीय कंपनियों पर अमेरिकी सिक्योरिटीज कानूनों की प्रयोज्यता पर जोर दिया। बचाव पक्ष ने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश, हार्वर्ड लॉ प्रोफेसर, SEC के पूर्व एक्टिंग चेयरपर्सन और भारत के सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के पूर्व प्रमुख जैसे विशेषज्ञों की गवाही भी ली। इन विशेषज्ञों ने भारत में भ्रष्टाचार विरोधी कानूनों और कंपनी की सार्वजनिक घोषणाओं पर अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।
आरोप हटने के मुख्य कारण
न्याय विभाग की ओर से फाइलिंग में, प्रॉसिक्यूशन की ओर से R. Trent McCotter ने आरोप हटाने के कई कारण बताए। इनमें मुख्य रूप से क्षेत्राधिकार और सबूतों से जुड़ी मुश्किलें थीं, जिनके कारण मुकदमा चलाना कठिन हो रहा था। इसके अलावा, फाइलिंग में यह भी कहा गया कि अभी तक किसी निवेशक को हुए नुकसान की पहचान नहीं हुई है और प्रवर्तन प्राथमिकताओं में बदलाव आया है। दस्तावेज़ में यह भी स्वीकार किया गया कि इन मामलों की जांच पहले से ही संबंधित भारतीय अधिकारियों द्वारा की जा रही है।
SEC के साथ सिविल सेटलमेंट
हालांकि आपराधिक आरोप हटा दिए गए हैं, लेकिन कंपनी के नेतृत्व ने अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) के साथ एक समानांतर सिविल सेटलमेंट किया है। इस समझौते के तहत, गौतम अडानी $6 मिलियन (लगभग ₹50 करोड़) का सिविल जुर्माना भरेंगे, जबकि सागर अडानी $12 मिलियन (लगभग ₹100 करोड़) का भुगतान करेंगे। इस समझौते में, दोनों व्यक्तियों ने भविष्य में अमेरिकी सिक्योरिटीज कानूनों के उल्लंघन के खिलाफ निषेधाज्ञा (injunctions) स्वीकार कर ली है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह सेटलमेंट दोनों पक्षों द्वारा आरोपों को स्वीकार या अस्वीकार किए बिना किया गया है।
अब बाजार की निगाहें इस बात पर टिकी होंगी कि इस फैसले का अडानी ग्रुप की वैश्विक पूंजी बाजार (global capital markets) तक पहुंच, अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं में साझेदारी और कॉर्पोरेट गवर्नेंस (corporate governance) की धारणा पर क्या असर पड़ता है।
