ब्रिटेन की एक अदालत ने भारतीय मूल की बिजनेसवुमन रूपाली वाघ को धोखाधड़ी के आरोप में 2 साल और 3 महीने की जेल की सज़ा सुनाई है। वाघ ने सरकारी कोविड-19 राहत लोन के **£216,250** (लगभग **₹2.16 करोड़**) का दुरुपयोग अपने निजी कर्ज़ चुकाने और शेयर बाज़ार में निवेश के लिए किया था।
कैसे हुआ लोन का दुरुपयोग?
50 वर्षीय बिजनेसवुमन रूपाली वाघ को यह सज़ा कोविड-19 महामारी के दौरान सरकारी सहायता के तहत दिए गए 'बाउंस बैक लोन' (Bounce Back Loans) के धोखाधड़ी वाले इस्तेमाल के मामले में सुनाई गई है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, वाघ ने मई से सितंबर 2020 के बीच पांच अलग-अलग बिज़नेस के लिए लोन के आवेदन किए थे।
जांच में यह पाया गया कि वाघ ने लोन पाने के लिए अपने बिज़नेस का सालाना टर्नओवर (Turnover) बढ़ा-चढ़ाकर बताया था। कुल £216,250 की रकम, जिसका इस्तेमाल बिज़नेस को बचाने के लिए होना था, वह निजी खातों में ट्रांसफर कर दी गई। इस पैसे का इस्तेमाल क्रेडिट कार्ड का बिल भरने, निजी खर्चों और शेयर बाज़ार में निवेश के लिए किया गया।
एक मामले में, Talensetu UK Ltd के ज़रिए, वाघ ने £50,000 का अधिकतम लोन हासिल किया, जबकि कंपनी का टर्नओवर असल में शून्य था। उन्होंने इसमें से £25,000 से ज़्यादा की रकम भारत भी भेजी। One2Four Accounting Ltd, White Coconut Ltd, और Indian Canteen Ltd जैसे अन्य बिज़नेस के मामलों में भी इसी तरह की धोखाधड़ी के सबूत मिले।
जांच और वसूली की कार्रवाई
शुरुआत में वाघ ने यह कहने की कोशिश की थी कि किसी अनजान तीसरे पक्ष का उनके कंप्यूटर तक पहुंच था, लेकिन बाद में उन्होंने इसे वापस ले लिया और अकेले ही यह अपराध करना स्वीकार किया। यूके की इंसॉल्वेंसी सर्विस (Insolvency Service) ने इस मामले की जांच की है और कहा है कि महामारी से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों में कार्रवाई प्राथमिकता पर रहेगी, भले ही कुछ समय बीत चुका हो।
सज़ा के अलावा, इंसॉल्वेंसी सर्विस अब 'प्रोसीड्स ऑफ क्राइम एक्ट 2002' (Proceeds of Crime Act 2002) के तहत चोरी की गई रकम की वसूली के लिए कानूनी कार्रवाई कर रही है।
