भूख हड़ताल ने जगाया प्रदूषण का मुद्दा
गुजरात के देवपारा गांव के निवासी देवराम वाला घोडा ने 9 मई, 2026 को गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (GPCB) को एक नोटिस भेजा है। उनका आरोप है कि सालों से शिकायतें करने के बावजूद मिठापुर प्लांट से होने वाले प्रदूषण में कोई कमी नहीं आई है। घोडा ने कहा कि निवासी लगातार दूषित हवा, पानी और भोजन से जूझ रहे हैं, जिससे गंभीर बीमारियां फैल रही हैं और सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट गहराता जा रहा है। उन्होंने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है।
इस बीच, Tata Chemicals का स्टॉक (TATACHEM.NS) हाल के दिनों में गिरावट पर रहा है। 8 मई, 2026 को शेयर में करीब 2.96% की गिरावट आई थी और यह ₹761.25 के आसपास कारोबार कर रहा था। मध्य मई 2026 तक कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹19,200 करोड़ था।
पिछली शिकायतें और जांच
देवपारा इलाके में प्रदूषण के आरोप कम से कम जून 2012 तक पुराने हैं। घोडा के नोटिस में द्वारका के 'प्रांट अधिकारी' और GPCB के पास दर्ज कराई गई शिकायतों का भी जिक्र है। हालांकि नोटिस में अक्टूबर 2025 से GPCB की ओर से की गई कुछ कार्रवाइयों का उल्लेख है, लेकिन उनकी प्रभावशीलता पर सवाल उठाया गया है।
इससे पहले, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने मार्च 2024 में इसी तरह की शिकायतों को खारिज कर दिया था, जिसमें GPCB की रिपोर्टों की समीक्षा के बाद आरोपों को निराधार पाया गया था। Tata Chemicals का कहना है कि वह ISO 14001 प्रमाणित एनवायरनमेंटल मैनेजमेंट सिस्टम के तहत काम कर रही है और GPCB के नियमों का पालन कर रही है। कंपनी की अमेरिकी सब्सिडियरी, Tata Chemicals Soda Ash Partners LLC पर नवंबर 2025 में परिचालन संबंधी विफलताओं के लिए $20,400 का जुर्माना लगाया गया था, जिसका पैरेंट कंपनी पर कोई खास वित्तीय प्रभाव नहीं पड़ा।
केमिकल इंडस्ट्री में बढ़ता ESG का महत्व
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब भारतीय केमिकल इंडस्ट्री पर्यावरणीय, सामाजिक और शासन (ESG) प्रदर्शन पर ज्यादा ध्यान दे रही है। UPL जैसी कंपनियां Sustainalytics से उच्च स्थिरता रैंकिंग हासिल कर चुकी हैं, जबकि Reliance Industries अपने पर्यावरण प्रबंधन प्रणालियों पर जोर दे रही है। Himadri Speciality Chemical को हाल ही में ICRA ESG रेटिंग्स से 'Exceptional 82' का ESG स्कोर मिला है।
प्रतिष्ठा और वित्तीय जोखिम
Tata Chemicals के अनुपालन के दावों और NGT द्वारा पिछली शिकायतों को खारिज करने के बावजूद, ये नए आरोप कंपनी के लिए प्रतिष्ठा का जोखिम पैदा करते हैं। लगातार स्थानीय पर्यावरण संबंधी शिकायतें संस्थागत निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण ESG चिंताएं बढ़ा सकती हैं। वित्तीय आंकड़ों में अस्थिरता दिख रही है; 14 मई, 2026 तक P/E रेश्यो लगभग 60.5 था, जो नेगेटिव EPS (जैसे -74.42) और नेगेटिव P/E (-10.17) के विपरीत था, जो हालिया लाभप्रदता पर दबाव का संकेत देता है।
CARE और Fitch जैसी एजेंसियों की क्रेडिट रेटिंग AA+ और 'BB+' पर स्थिर बनी हुई है, लेकिन लगातार पर्यावरणीय विवादों से रेगुलेटरी जांच बढ़ सकती है। साल 2007-2008 में मिठापुर प्लांट का लगभग दस महीने तक 'कंसेंट टू ऑपरेट' रिन्यू न होने जैसे पिछले मुद्दे भी लंबी अवधि की पर्यावरणीय चुनौतियों की कहानी का हिस्सा रहे हैं।
कंपनी के ESG लक्ष्य और भविष्य
विश्लेषकों की राय मिश्रित है, हाल ही में कुछ 'Buy' रेटिंग को 'Hold/Accumulate' में डाउनग्रेड किया गया है। Tata Chemicals ने ESG प्रतिबद्धताओं को दोहराया है, जिसमें 2030 तक कार्बन फुटप्रिंट को 30% तक कम करना शामिल है, और ग्रीन केमिस्ट्री में निवेश की योजना है।
हालांकि, यह स्थानीय विवाद और कंपनी का ऐतिहासिक पर्यावरणीय रिकॉर्ड निवेशकों और नियामकों की कड़ी नजर में रहेगा, खासकर तब जब केमिकल सेक्टर अपनी ग्रोथ और बढ़ती स्थिरता की मांगों के बीच आगे बढ़ रहा है।