गोवा हाई कोर्ट में तेहलका के संस्थापक तरुण तेजपाल के खिलाफ यौन उत्पीड़न के मामले में सुनवाई चल रही है। बचाव पक्ष 2021 के बरी होने के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार की अपील को चुनौती दे रहा है। वकीलों ने कोर्ट में कहा कि पीड़िता की घटना के बाद की हरकतें सदमे के दावों से मेल नहीं खातीं।
तेहलका के संस्थापक तरुण तेजपाल से जुड़े कानूनी मामले ने गोवा हाई कोर्ट का रुख किया है। यहां उनके बचाव पक्ष के वकील, राज्य सरकार की उस अपील के खिलाफ दलीलें पेश कर रहे हैं जिसमें 2021 के बरी होने के फैसले को पलटने की मांग की गई है। यह मामला 2013 में गोवा के एक रिसॉर्ट में कथित यौन उत्पीड़न से जुड़ा है।
गवाही की विश्वसनीयता पर बचाव पक्ष के तर्क
तरुण तेजपाल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील आबाद पोंडा ने अपनी दलीलों में शिकायतकर्ता की गवाही की विश्वसनीयता पर जोर दिया। बचाव पक्ष का कहना है कि जिरह के दौरान शिकायतकर्ता के बयानों में कई विसंगतियां थीं। पोंडा ने तर्क दिया कि गंभीर चोट या सदमे से पीड़ित होने के शिकायतकर्ता के दावे, घटना के बाद उनकी हरकतों से मेल नहीं खाते।
डिजिटल और सोशल एविडेंस का इस्तेमाल
बचाव पक्ष ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत किए गए सदमे के दावों को चुनौती देने के लिए व्हाट्सएप संदेशों सहित कई डिजिटल सबूतों पर प्रकाश डाला। एक मुख्य बिंदु यह है कि शिकायतकर्ता ने 2013 के थिंकफेस्ट कार्यक्रम के दौरान अभिनेता रॉबर्ट डी नीरो के साथ तस्वीर खिंचवाने में तेजपाल की मदद मांगी थी। पोंडा ने सवाल उठाया कि जो व्यक्ति कथित तौर पर पीड़ित और आरोपी से डरा हुआ था, वह ऐसी सामाजिक बातचीत के लिए उसी व्यक्ति की मदद क्यों मांगेगा?
इसके अलावा, बचाव पक्ष का तर्क था कि कथित घटना के बाद भी शिकायतकर्ता का पेशेवर और सामाजिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेना, अभियोजन पक्ष के दावों को कमजोर करता है। बचाव पक्ष ने दोहराया कि ऐसा व्यवहार यौन उत्पीड़न की शिकार महिला से अपेक्षित व्यवहार के विपरीत है, जैसा कि अभियोजन मामले में वर्णित है।
कानूनी कार्यवाही की वर्तमान स्थिति
यह मामला नवंबर 2013 में एक पांच सितारा रिसॉर्ट के लिफ्ट में हुई कथित घटना से संबंधित है। सत्र अदालत ने 2021 में तेजपाल को बरी कर दिया था, जिसके बाद गोवा सरकार ने अपील दायर की। यह मामला वर्तमान में गोवा हाई कोर्ट में विचाराधीन है, जहां अदालत दोनों पक्षों की दलीलों को सुन रही है ताकि राज्य की अपील की वैधता तय की जा सके। आगे की कार्यवाही अदालत द्वारा प्रस्तुत गवाहियों और सबूतों के मूल्यांकन पर निर्भर करेगी।
