TMC vs ED: ₹440 करोड़ की जंग! कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंची TMC, फ्रीज खातों को खुलवाने की मांग

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AuthorNeha Patil|Published at:
TMC vs ED: ₹440 करोड़ की जंग! कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंची TMC, फ्रीज खातों को खुलवाने की मांग

TMC यानी तृणमूल कांग्रेस ने कलकत्ता हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की है। पार्टी चाहती है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा फ्रीज किए गए उसके तीन बैंक खातों को जल्द से जल्द डीफ्रीज किया जाए। इन खातों में करीब ₹440 करोड़ की रकम फंसी हुई है।

क्यों फ्रीज हुए TMC के खाते?

प्रवर्तन निदेशालय (ED) एक मामले की जांच कर रहा है, जिसमें आरोप है कि कुछ वित्तीय अनियमितताएं हुईं। यह जांच विशेष रूप से विमानों और हेलीकॉप्टर की खरीद से जुड़े फंड ट्रांसफर को लेकर है। इसी जांच के चलते ED ने TMC के इन तीन बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है। TMC का कहना है कि इससे पार्टी के कामकाज में भारी बाधा आ रही है।

कोर्ट में क्या हुआ?

TMC की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट को बताया कि ED ने जानबूझकर पार्टी के वित्तीय कामकाज को ठप करने के लिए ये कदम उठाया है। उन्होंने यह भी दलील दी कि यह कार्रवाई तब की गई जब एक अलग बेंच इन खातों को डीफ्रीज करने का आदेश देने वाली थी। TMC का तर्क है कि यह एक राजनीतिक दल के संसाधनों को छीनने जैसा है और यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए खतरा है।

दूसरी ओर, ED की तरफ से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने कहा कि खातों का फ्रीज होना उनकी मनी लॉन्ड्रिंग जांच का एक सामान्य हिस्सा है। ED का मानना है कि TMC को सीधे हाई कोर्ट आने के बजाय पहले अपीलेट ट्रिब्यूनल जैसे कानूनी रास्तों को अपनाना चाहिए। ED ने यह भी दावा किया कि खातों में अभी भी करीब ₹164 करोड़ उपलब्ध हैं, जिसे TMC के वकीलों ने गलत बताया है।

कानूनी दांव-पेच

इस मामले में एक बड़ा सवाल यह भी है कि क्या ED के पास मनी लॉन्ड्रिंग के तहत कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त आधार हैं। TMC के वकील किशोर दत्ता ने दलील दी कि कोई स्पष्ट 'प्रिडिकेट ऑफेंस' यानी मूल अपराध साबित नहीं हुआ है, जिसके बिना मनी लॉन्ड्रिंग की जांच नहीं हो सकती।

ED ने कोर्ट में एक सिविल कोर्ट के उस आदेश का भी जिक्र किया, जिसमें ममता बनर्जी के गुट को पार्टी की ओर से काम करने से रोका गया था। TMC के वकीलों ने इसका विरोध करते हुए कहा कि यह आदेश उनकी अनुपस्थिति में पारित हुआ था और इसका इस्तेमाल पार्टी के फंड को फ्रीज करने का आधार नहीं बनाया जा सकता। अब देखना यह है कि कलकत्ता हाई कोर्ट इस मामले में TMC को अंतरिम राहत देता है या नहीं।

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