सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को सूचना के अधिकार (RTI) एक्ट के तहत जानकारी देने के 2007 के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। यह अंतरिम राहत दिल्ली हाई कोर्ट के हालिया फैसले पर अमल को रोकती है, जबकि एक्सचेंज खुद को 'पब्लिक अथॉरिटी' मानने को चुनौती दे रहा है। इस मामले का असर मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर संस्थानों के लिए पारदर्शिता नियमों पर पड़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट से NSE को मिली बड़ी राहत
सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को एक बड़ी राहत देते हुए, सूचना के अधिकार (RTI) एक्ट के तहत जानकारी देने संबंधी एक पुराने आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। शुक्रवार को जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के 2007 के उस आदेश पर फिलहाल विराम लगा दिया है, जिसके तहत एक्सचेंज को RTI के तहत जानकारी देनी पड़ती थी। यह रोक तब तक लागू रहेगी जब तक मामले की कानूनी समीक्षा पूरी नहीं हो जाती।
'पब्लिक अथॉरिटी' स्टेटस पर जंग
इस कानूनी लड़ाई का मुख्य मुद्दा यह है कि क्या NSE, जो एक प्राइवेट कॉर्पोरेट संस्था है, को पारदर्शिता कानून के तहत 'पब्लिक अथॉरिटी' माना जाना चाहिए या नहीं। एक्सचेंज का पक्ष रहा है कि वह RTI एक्ट के दायरे में नहीं आता। हालांकि, पिछले लगभग दो दशकों से इस स्थिति को अदालतों में चुनौती दी जा रही है। हाल ही में, 1 जुलाई 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट की एक डिवीजन बेंच ने पिछले फैसलों को बरकरार रखते हुए कहा था कि NSE के कार्य सांविधिक नियमों और सार्वजनिक हित से इतने गहरे जुड़े हैं कि उसे 'पब्लिक अथॉरिटी' के तौर पर देखा जाना चाहिए।
दिल्ली हाई कोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देकर, NSE यह स्पष्टता चाहता है कि क्या उसका प्राइवेट कंपनी का स्टेटस उसे RTI के तहत जानकारी देने से छूट देता है। सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर चार हफ्तों में जवाब मांगा है, जो इस विवाद को सुलझाने के लिए एक विस्तृत सुनवाई का संकेत देता है।
मार्केट संस्थानों के लिए बड़ा प्रेसिडेंट
इस मुकदमे का नतीजा भारत के अन्य मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर संस्थानों के लिए एक महत्वपूर्ण नज़ीर (Precedent) पेश कर सकता है। फिलहाल, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) की स्थिति को लेकर ऐसे ही सवाल बॉम्बे हाई कोर्ट में विचाराधीन हैं। स्टॉक एक्सचेंज लंबे समय से यह तर्क देते रहे हैं कि RTI के तहत संवदेनशील जानकारी, जैसे कि प्रॉपरिटरी सर्विलांस रिकॉर्ड्स, रिस्क मैनेजमेंट प्रोटोकॉल और विशेष ट्रेडिंग डेटा का खुलासा करना पड़ सकता है। उनका मानना है कि इस तरह की पारदर्शिता से बाजार की अखंडता (Market Integrity) से समझौता हो सकता है।
निवेशकों और बाजार सहभागियों के लिए, यह मामला स्टॉक एक्सचेंज के संचालन की सार्वजनिक प्रकृति और उनके कॉर्पोरेट गवर्नेंस की निजी प्रकृति के बीच चल रहे तनाव को उजागर करता है। सुप्रीम कोर्ट की रोक से NSE को फिलहाल RTI अनुरोधों को प्रोसेस करने से राहत मिली है, लेकिन अंतिम फैसला यह तय करेगा कि प्रमुख वित्तीय इंफ्रास्ट्रक्चर निकायों के लिए पारदर्शिता की दीर्घकालिक बाध्यताएं क्या होंगी। निवेशकों को भविष्य की अदालती सुनवाई पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि यह निर्णय अंततः यह प्रभावित कर सकता है कि इन महत्वपूर्ण संस्थानों को जनता के साथ कितना परिचालन डेटा साझा करने की आवश्यकता होगी।
