Shiv Sena Split Case: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू, महाराष्ट्र की सियासत में भूचाल!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Shiv Sena Split Case: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू, महाराष्ट्र की सियासत में भूचाल!

सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना में विभाजन को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई शुरू कर दी है। यह मामला एकनाथ शिंदे गुट को असली शिवसेना मानने और चुनाव चिन्ह (Election Commission) के फैसले से जुड़ा है, जिसका महाराष्ट्र की राजनीतिक स्थिरता पर गहरा असर पड़ सकता है। मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी।

सुप्रीम कोर्ट में शुरू हुई बड़ी सुनवाई

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को शिवसेना पार्टी में हुए विभाजन से जुड़े कानूनी विवाद पर एक महत्वपूर्ण सुनवाई शुरू की है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच, उद्धव बालासाहेब ठाकरे (UBT) गुट द्वारा वर्तमान महाराष्ट्र सरकार के गठन की वजह बने राजनीतिक घटनाक्रमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं की समीक्षा कर रही है।

चुनाव आयोग और विधानसभा के फैसलों को चुनौती

कानूनी लड़ाई के केंद्र में चुनाव आयोग (ECI) का 2023 का फैसला है, जिसने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट को असली शिवसेना के रूप में मान्यता दी और पार्टी के आधिकारिक 'धनुष-बाण' चुनाव चिन्ह (Symbol) उन्हें सौंप दिया। याचिकाकर्ता महाराष्ट्र विधानसभा स्पीकर के उस पिछले फैसले को भी चुनौती दे रहे हैं, जिसमें उन्होंने एकनाथ शिंदे और कई अन्य विधायकों को अयोग्य घोषित नहीं किया था।

UBT गुट का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि बागी गुट द्वारा की गई कार्रवाइयां संविधान की दसवीं अनुसूची, जिसे दल-बदल-विरोधी कानून (Anti-defection law) के रूप में जाना जाता है, को कमजोर करती हैं। कानूनी टीम का तर्क था कि यह बगावत, जो विधायकों के गुवाहाटी जाने से शुरू हुई थी, राजनीतिक पार्टी के एक औपचारिक फैसले के बजाय सदस्यों के एक उपसमूह का कार्य था। सिब्बल ने सवाल उठाया कि क्या विधायकों का एक समूह एकतरफा रूप से पूरी राजनीतिक पार्टी की पहचान और संगठनात्मक ढांचे पर दावा कर सकता है।

संसदीय लोकतंत्र के लिए मायने

कार्यवाही के दौरान, दलीलें एक विधायी दल (legislative party) - यानी विधानसभा के लिए चुने गए सदस्य - और एक संगठन के रूप में राजनीतिक दल के बीच अंतर पर केंद्रित थीं। पेश किए गए तर्क का मुख्य बिंदु यह था कि दसवीं अनुसूची विधायकों को उस मंच को छोड़ने से रोकने के लिए बनाई गई है जिस पर उन्हें मतदाताओं ने चुना था। सिब्बल ने इस स्थिति को प्रतिनिधि लोकतंत्र के सिद्धांतों के लिए एक बड़ी चुनौती बताया, और सुझाव दिया कि ऐसे बदलावों की अनुमति राजनीतिक व्यवस्था में अस्थिरता पैदा कर सकती है।

कानूनी प्रक्रिया में अगले कदम

यह सुनवाई महाराष्ट्र में हुए राजनीतिक घटनाक्रमों की एक श्रृंखला का अनुसरण करती है, जो कुछ समय से न्यायिक जांच के दायरे में हैं। अदालत ने मामले में आगे की दलीलों के लिए अगली सुनवाई 4 अगस्त को निर्धारित की है। विश्लेषकों और बाजार सहभागियों के लिए, इस मामले का परिणाम महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत के सबसे औद्योगिक राज्य में वर्तमान सत्तारूढ़ गठबंधन की स्थिरता को छूता है। अंतिम निर्णय भविष्य के विवादों में दल-बदल-विरोधी कानून के तहत राजनीतिक दलों और विधायी समूहों के साथ कैसे व्यवहार किया जाता है, इसके लिए एक मिसाल कायम कर सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.