सुप्रीम कोर्ट ने नॉर्थ ईस्ट फेस्टिवल के आयोजक श्यामकानू महंता की ज़मानत याचिका के संबंध में राज्य को नोटिस जारी किया है। महंता, जो नौ महीने से हिरासत में हैं, गायक ज़ुबिन गर्ग की मौत से जुड़े आरोपों का सामना कर रहे हैं। उनके वकील ने तर्क दिया है कि पासपोर्ट कोर्ट में जमा होने के कारण भागने का जोखिम कम है, और जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपने का अनुरोध किया है।
क्या हुआ?
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमल्या बागची की पीठ ने श्यामकानू महंता की ज़मानत याचिका पर राज्य से जवाब मांगा है। महंता, जो नॉर्थ ईस्ट फेस्टिवल के आयोजक हैं, करीब नौ महीने से न्यायिक हिरासत में हैं। यह मामला असम के गायक ज़ुबिन गर्ग की सितंबर 2025 में सिंगापुर में हुई मौत से जुड़े आरोपों से संबंधित है।
कानूनी पहलू
हालिया सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने महंता की हिरासत की परिस्थितियों की जांच की। कोर्ट ने विशेष रूप से याचिकाकर्ता द्वारा भागने के संभावित जोखिम पर सवाल उठाया। इसके जवाब में, महंता के वकील, वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने कहा कि याचिकाकर्ता ने पहले ही अपना पासपोर्ट अधिकारियों को सौंप दिया है, ताकि भागने के जोखिम संबंधी अदालत की चिंताओं को दूर किया जा सके।
महंता लगातार अपनी बेगुनाही का दावा करते रहे हैं। उनकी कानूनी टीम ने सुप्रीम कोर्ट में एक अलग याचिका दायर की है, जिसमें जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपने का अनुरोध किया गया है। याचिका में उनके खिलाफ विभिन्न राज्यों में दर्ज कई फर्स्ट इंफॉर्मेशन रिपोर्ट्स (FIRs) को एक साथ मिलाने की भी मांग की गई है, यह आरोप लगाते हुए कि ये फाइलिंग उन्हें झूठा फंसाने के समन्वित प्रयास का हिस्सा हैं।
मामले की पृष्ठभूमि
यह कानूनी मामला ज़ुबिन गर्ग की सिंगापुर में मृत्यु के बाद उत्पन्न हुआ। हालांकि सिंगापुर के अधिकारियों की प्रारंभिक जांच में घटना को डूबने का मामला बताया गया था और किसी भी तरह की हेराफेरी के संकेत नहीं मिले थे, भारत में बाद के घटनाक्रमों ने आपराधिक साजिश और गैर-इरादतन हत्या जैसे आरोपों वाली कई FIRs दर्ज कीं। महंता ने तर्क दिया है कि घटना के समय वे पारिवारिक छुट्टी पर थे और मामले के आसपास के सार्वजनिक बयानों ने जांच को प्रभावित किया है।
निवेशक और पर्यवेक्षक क्या ट्रैक कर सकते हैं?
इस मामले की प्रगति राज्य की सुप्रीम कोर्ट की नोटिस पर प्रतिक्रिया से तय होगी। मामले का अनुसरण करने वालों के लिए मुख्य निगरानी योग्य बिंदु ज़मानत याचिका पर आगामी न्यायिक निर्णय होगा, जो राज्य की दलील और जांच के हस्तांतरण के तर्कों पर निर्भर करेगा। FIRs के एकीकरण पर अदालत का रुख भी चल रही कानूनी कार्यवाही में एक महत्वपूर्ण कारक होगा।
