Grasim Industries के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) द्वारा Grasim Industries पर लगाए गए ₹301.6 करोड़ के जुर्माने को रद्द कर दिया था। अब CCI को विस्कोस स्टेपल फाइबर (VSF) में बाजार में दबदबे के आरोपों से जुड़े मामले की फिर से सुनवाई करनी होगी।
जानिए क्या है पूरा मामला?
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को Grasim Industries पर लगाए गए ₹301.6 करोड़ के जुर्माने को रद्द करने के NCLAT के फैसले को हरी झंडी दे दी। यह जुर्माना CCI ने मार्च 2020 में लगाया था, जिसमें कंपनी पर घरेलू विस्कोस स्टेपल फाइबर (VSF) बाजार में अपने दबदबे का दुरुपयोग करने का आरोप था।
प्रक्रियात्मक खामियों पर कोर्ट का फैसला
चीफ जस्टिस जे. बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने CCI की अपील को खारिज कर दिया। विवाद का मुख्य बिंदु यह था कि CCI ने अपनी जांच शाखा, डायरेक्टर जनरल (DG) की फाइंडिंग्स से अलग फैसला कैसे लिया। NCLAT ने पाया कि CCI ने Grasim Industries को इन बदलावों पर अपना पक्ष रखने का उचित मौका नहीं दिया था। नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के अनुसार, जब कमीशन प्रारंभिक जांच के निष्कर्षों से असहमत होने का निर्णय लेता है, तो कंपनी को सूचित किया जाना चाहिए और सुना जाना चाहिए। अब सुप्रीम कोर्ट ने CCI को निर्देश दिया है कि वह मामले की फिर से जांच करे और कंपनी को अपना बचाव प्रस्तुत करने का उचित अवसर दे।
प्रतिस्पर्धा विवाद की जड़ें
CCI की प्रारंभिक जांच 2020 में कुछ शिकायतों के बाद शुरू हुई थी। आरोप था कि Grasim Industries VSF खरीदारों के साथ भेदभावपूर्ण मूल्य निर्धारण और अनुचित शर्तें लगा रही थी। इन आरोपों में कंपनी की डिस्काउंट पॉलिसी और स्पिनर्स से खपत के विवरण की आवश्यकताओं को कैसे संभाला गया, यह सब शामिल था। विस्कोस स्टेपल फाइबर (VSF) कपड़ा उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण कच्चा माल है। मूल शिकायत में आदित्य बिड़ला ग्रुप की अन्य कंपनियों, थाई रेयॉन और इंडो भारत रेयॉन का भी उल्लेख था। जुर्माने को रद्द करके, अदालत ने नियामक के पिछले आदेश को प्रभावी रूप से रोक दिया है, और अब यह निर्धारित करने के लिए एक नई प्रक्रिया की आवश्यकता होगी कि क्या प्रतिस्पर्धा कानूनों का उल्लंघन हुआ है।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
निवेशकों के लिए, ₹301.6 करोड़ के जुर्माने के तत्काल वित्तीय बोझ को हटाना एक महत्वपूर्ण विकास है। इससे तत्काल नकदी का बहिर्वाह टलेगा और एक नियामक बाधा दूर होगी जो कई वर्षों से चल रही थी। हालांकि, मामला अभी कानूनी रूप से सक्रिय है क्योंकि मामले को नए निर्णय के लिए CCI को वापस भेज दिया गया है। हितधारकों के लिए मुख्य निगरानी योग्य बिंदु इस नई सुनवाई की समय-सीमा और नियामक के पुनर्मूल्यांकन का अंतिम परिणाम होगा।
