सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के एक कांग्रेस नेता के ड्राइवर की हत्या के मामले में नए सिरे से जांच के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने पांच सदस्यों की एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित करने का निर्देश दिया है। यह फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि स्थानीय पुलिस की जांच पर राजनीतिक प्रभाव और पक्षपात के आरोप लगे थे।
क्यों कोर्ट को लेना पड़ा दखल?
यह मामला मध्य प्रदेश के एक कांग्रेस नेता के ड्राइवर की हत्या से जुड़ा है। पीड़ित की पत्नी रज़िया अली ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि स्थानीय पुलिस द्वारा की गई जांच निष्पक्ष नहीं थी और इसमें राजनीतिक हस्तक्षेप था। याचिका में कहा गया कि जांच को सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक विधायक का संरक्षण प्राप्त था।
शुरुआत में राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि जांच निष्पक्ष और अंतिम चरण में है। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे, ने जांच में कई खामियां पाईं। कोर्ट ने पाया कि गवाहों के बयान दर्ज नहीं किए गए थे, जबकि वे पहले ही हलफनामा दे चुके थे।
नई SIT की जिम्मेदारियां
निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए, सुप्रीम कोर्ट ने नई SIT के लिए सख्त नियम बनाए हैं। इस टीम में तीन IPS अधिकारी (सीनियर सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस स्तर के) और दो DSP स्तर के अधिकारी होंगे। खास बात यह है कि ये सभी अधिकारी छतरपुर जिले के बाहर के होंगे ताकि स्थानीय दबाव से बचा जा सके। SIT का नेतृत्व एक ऐसे IPS अधिकारी करेंगे जो मध्य प्रदेश कैडर में सेवा दे रहे हों लेकिन उनका मूल कैडर किसी दूसरे राज्य का हो।
मध्य प्रदेश के DGP को दो दिनों के भीतर इस टीम का गठन करने का आदेश दिया गया है। नई SIT मामले से जुड़े सभी रिकॉर्ड अपने कब्जे में लेगी और पिछली जांच के निष्कर्षों से स्वतंत्र होकर एकदम नए सिरे से जांच शुरू करेगी।
