सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को निर्देश दिया है कि वह वकीलों के प्रोफेशनल ट्रेनिंग को बेहतर बनाने के लिए एक नेशनल लीगल एकेडमी की स्थापना करे। कोर्ट ने BCI के डिसिप्लिनरी फंक्शन्स का परफॉरमेंस ऑडिट भी अनिवार्य कर दिया है।
वकीलों की ट्रेनिंग में बड़ा बदलाव
भारतीय कानूनी क्षेत्र के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम है। सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को देश भर के वकीलों के लिए एक नेशनल लीगल एकेडमी (National Legal Academy) स्थापित करने का आदेश दिया है। यह एकेडमी मौजूदा नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी की तर्ज पर काम करेगी, जो जजों के लिए ट्रेनिंग का इंतजाम करती है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने इस बात पर जोर दिया कि इस एकेडमी का मुख्य उद्देश्य देश भर के वकीलों के निरंतर प्रोफेशनल डेवलपमेंट को बढ़ावा देना होगा।
जवाबदेही और प्रोफेशनल स्टैंडर्ड्स
कोर्ट का यह निर्देश सिर्फ एकेडमी बनाने तक ही सीमित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने BCI को अपने डिसिप्लिनरी पावर्स (disciplinary powers) का नियमित परफॉरमेंस ऑडिट (performance audit) करने के लिए भी कहा है। इस कदम का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि रेगुलेटरी बॉडी कानूनी पेशावरान के आचरण पर प्रभावी ढंग से निगरानी रख सके। ट्रेनिंग और ऑडिट को संस्थागत बनाकर, कोर्ट का इरादा कानूनी पेशे के भीतर प्रोफेशनल एथिक्स (professional ethics) को बनाए रखने के लिए एक अधिक संरचित ढांचा तैयार करना है।
एडवोकेट 'Caution List' पर फैसला
कोर्ट ने यह निर्देश एक ऐसे मामले की सुनवाई के दौरान दिए, जिसमें एक वकील को इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) द्वारा 'Caution List' में डाल दिया गया था। वकील को केनरा बैंक (Canara Bank) के पैनल से इसलिए हटा दिया गया था क्योंकि बैंक ने उसकी एक कानूनी राय को गलत माना था। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि केवल पेशेवर लापरवाही के आरोपों पर किसी वकील को पब्लिक 'Caution List' में डालना कानूनी रूप से सही नहीं है।
हालांकि कोर्ट ने यह माना कि बैंकों और वित्तीय संस्थानों को अपने कानूनी पैनल से वकीलों को हटाने का अधिकार है, लेकिन कोर्ट ने यह भी साफ किया कि ऐसे कार्यों से कोई पब्लिक घोषणा या ब्लैकलिस्टिंग नहीं होनी चाहिए। बेंच ने कहा कि पेशेवर आचरण और संभावित कदाचार के मामले पूरी तरह से BCI जैसी रेगुलेटरी बॉडीज के दायरे में आते हैं। यह फैसला इस बात की स्पष्टता देता है कि वित्तीय संस्थान बाहरी कानूनी विशेषज्ञों के साथ अपने संबंधों को कैसे प्रबंधित करते हैं।
