सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा है कि अब मोटर एक्सीडेंट में होने वाले नुकसान के मुआवजे (compensation) की गणना के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) को आय का मुख्य आधार माना जाएगा। यह फैसला क्लेम की राशि तय करने के तरीके को बदल देगा।
अब ITR ही तय करेगा कितना मिलेगा मुआवजा?
सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने 1 जुलाई 2026 को एक नया निर्देश जारी किया है। इसके तहत, अब मोटर दुर्घटना पीड़ितों की आय का आकलन करने के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) को ही मानक सबूत माना जाएगा। कोर्ट का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि मुआवजे की राशि का निर्धारण एक समान और सत्यापित वित्तीय डेटा के आधार पर हो, न कि अनुमानों के आधार पर।
आय की गणना के नए नियम:
इस नए दिशानिर्देश के अनुसार, आय का सत्यापन व्यक्ति की नौकरी के प्रकार पर निर्भर करेगा:
- सैलरीड कर्मचारी: ऐसे लोगों के लिए, कोर्ट आम तौर पर नवीनतम फाइल किए गए ITR का उपयोग करके वार्षिक आय निर्धारित करेगा।
- सेल्फ-एम्प्लॉयड और बिज़नेसमैन: जिनके लिए कमाई में उतार-चढ़ाव आम बात है, उनके लिए कोर्ट ने एक औसत निकालने का तरीका अपनाया है। पिछले तीन सालों के ITR में घोषित आय का औसत निकालकर यह तय किया जाएगा। इससे एक साल की कम आय का असर लंबी अवधि की कमाई क्षमता पर नहीं पड़ेगा।
टैक्स फाइलिंग इतनी महत्वपूर्ण क्यों?
यह फैसला ITR की भूमिका को सिर्फ टैक्स भरने तक सीमित नहीं रखता। अब तक लोग टैक्स फाइलिंग को टैक्स देनदारी कम करने, बैंक लोन या वीज़ा के लिए ज़रूरी डॉक्यूमेंट मानते थे। लेकिन अब, यह कानूनी विवादों में वित्तीय सहायता तय करने का अहम सबूत बन गया है। अगर कोई व्यक्ति या बिज़नेसमैन टैक्स बचाने के लिए अपनी आय कम दिखाता है, तो वही जानकारी दुर्घटना की स्थिति में उसके परिवार को मिलने वाले मुआवजे को भी कम कर सकती है। इस फैसले से लोगों को अपनी आय का सही और लगातार डिक्लेरेशन करने के लिए एक बड़ा वित्तीय प्रोत्साहन मिला है।
अदालती प्रक्रियाओं पर असर:
पहले, मुआवजे की गणना के लिए कई तरह के कागज़ात का इस्तेमाल होता था, जिससे कभी-कभी असली कमाई की क्षमता को लेकर विवाद खड़े हो जाते थे। ITR को मानक बनाकर, कोर्ट का लक्ष्य मुकदमेबाजी का समय कम करना और मुआवजे की प्रक्रिया को ज़्यादा अनुमानित बनाना है। कानूनी जानकारों का मानना है कि इस फैसले से लोगों के व्यवहार में बदलाव आएगा और वे भविष्य के दावों को सुरक्षित करने के लिए अपनी घोषित आय में पारदर्शिता को प्राथमिकता देंगे। निवेशकों और बिज़नेसमैन को अब अपने वित्तीय रिकॉर्ड्स का प्रबंधन करते समय इस कानूनी हकीकत पर विचार करना होगा, क्योंकि टैक्स बचाने की कोशिश से भविष्य की कानूनी सुरक्षा में कमी आ सकती है।
