सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: Oriental Insurance को ₹32.67 लाख का भुगतान करने का आदेश

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: Oriental Insurance को ₹32.67 लाख का भुगतान करने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने **Oriental Insurance** को **₹32.67 लाख** का मोटर एक्सीडेंट क्लेम देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने इंश्योरेंस कंपनी की क्षेत्रीय सीमाओं (territorial limits) की दलील को खारिज कर दिया और कहा कि बीमा कंपनियां पॉलिसीधारकों को मुआवजा देने में देरी करने के लिए अस्पष्ट भाषा का इस्तेमाल करती हैं।

कोर्ट का इंश्योरेंस कंपनियों पर तीखा वार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को Oriental Insurance Company को एक मोटर एक्सीडेंट क्लेम के लिए ₹32.67 लाख का हर्जाना देने का निर्देश दिया। यह मामला नेपाल में हुई एक वाहन दुर्घटना से जुड़ा था, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई थी। शुरुआती ट्रिब्यूनल ने गाड़ी के मालिक को उत्तरदायी ठहराया था, लेकिन बाद में हाई कोर्ट ने यह जिम्मेदारी बीमा कंपनी पर डाल दी थी।

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा कि बीमा कंपनियां अक्सर अपनी स्टैंडर्ड पॉलिसी डॉक्यूमेंट्स में ऐसी अस्पष्ट और ढीली-ढाली भाषा का इस्तेमाल करती हैं, जो न केवल पॉलिसीधारकों के लिए अनुचित है, बल्कि अनावश्यक कानूनी अड़चनें भी पैदा करती है। कोर्ट ने कहा कि स्पष्ट शब्दों का इस्तेमाल न करने के कारण, बीमा कंपनियां या तो सही देनदारियों से बच निकलती हैं या फिर खराब ड्राफ्टिंग के कारण अनपेक्षित दावों का सामना करती हैं।

क्षेत्रीय सीमाओं का पचड़ा और बॉर्डर पार के मुद्दे

Oriental Insurance ने यह दलील देकर क्लेम का विरोध किया था कि उनकी पॉलिसी भारत के बाहर होने वाली दुर्घटनाओं पर लागू नहीं होती। सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि अगर बीमा कंपनी एक्स्ट्रा-टेरिटोरियल कवरेज (extraterritorial coverage) को बाहर रखना चाहती थी, तो यह उनकी ज़िम्मेदारी थी कि वे इसे अनुबंध में स्पष्ट रूप से लिखें। चूंकि वाहन के पास नेपाल जाने के लिए आवश्यक कानूनी परमिट थे, इसलिए कोर्ट ने फैसला सुनाया कि बीमा कंपनी अपनी ही पॉलिसी में स्पष्टता की कमी के आधार पर कवरेज से इनकार नहीं कर सकती।

रेगुलेटरी स्पष्टता की ज़रूरत

सुप्रीम कोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार जाने वाले वाहनों के लिए रेगुलेटरी वैक्यूम (regulatory vacuum) के व्यापक मुद्दे को भी उठाया। कोर्ट ने देखा कि भारतीय वाहन अक्सर पड़ोसी देशों में प्रवेश करने की अनुमति प्राप्त करते हैं, लेकिन घरेलू बीमा पॉलिसियों में अक्सर ऐसे स्पष्ट क्लॉज नहीं होते जो यह परिभाषित करें कि कवरेज इन विदेशी अधिकारक्षेत्रों तक फैला है या नहीं। इस समस्या के समाधान के लिए, कोर्ट ने सुझाव दिया कि बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) को मोटर बीमा पॉलिसियों में क्रॉस-बॉर्डर कवरेज शर्तों को मानकीकृत करने के लिए एक मास्टर सर्कुलर जारी करना चाहिए।

क्लेम और ट्रिब्यूनल पर असर

इस विशेष मामले के अलावा, कोर्ट ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (Motor Accident Claims Tribunals) द्वारा जारी किए गए आदेशों की गुणवत्ता पर भी चिंता जताई। बेंच ने नोट किया कि कई ट्रिब्यूनल आदेशों में स्पष्ट तर्क का अभाव होता है, जो लंबे कानूनी झगड़ों और बड़ी संख्या में अपीलों का कारण बनता है। कोर्ट ने Oriental Insurance को चार हफ्तों के भीतर हर्जाने की राशि जमा करने का निर्देश दिया। बीमा क्षेत्र में निवेशकों और हितधारकों के लिए, मुख्य ध्यान IRDAI द्वारा पॉलिसी अस्पष्टता को कम करने और क्रॉस-बॉर्डर यात्रा के लिए कवरेज को मानकीकृत करने के उद्देश्य से जारी किए जाने वाले संभावित भविष्य के निर्देशों पर रहेगा।

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