क्यों मिली डायरेक्टर्स को राहत?
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने यह स्पष्ट किया है कि कंपनी के डायरेक्टर का बोर्ड रेज़ोल्यूशन पर साइन करना, जैसे कि किसी संपत्ति को खरीदने या किसी कर्मचारी को नियुक्त करने जैसे नियमित फैसलों के लिए, उन्हें कंपनी के रोज़मर्रा के कामकाज या वित्तीय गड़बड़ियों (Financial Defaults) के लिए स्वतः ज़िम्मेदार नहीं बनाता है।
कोर्ट ने कहा कि नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 141 के तहत किसी डायरेक्टर पर मुकदमा चलाने के लिए, यह साबित करना ज़रूरी है कि वह व्यक्ति वास्तव में कंपनी के बिज़नेस को 'संभाल रहा था' (in charge of) और वित्तीय डिफॉल्ट के लिए 'ज़िम्मेदार था' (responsible for)। केवल रेज़ोल्यूशन साइन करना इसे साबित नहीं करता।
सरोज पांडे केस में SC का दखल
यह फैसला प्रोज़टेक इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड (Projtech Engineering Private Limited) की डायरेक्टर सरोज पांडे (Saroj Pandey) के मामले में आया है। उनके खिलाफ तीन चेक बाउंस होने के कारण क्रिमिनल कार्यवाही शुरू की गई थी, जिनकी कुल राशि ₹50 लाख थी। ये चेक 20 अप्रैल, 2021 को सिग्नेचर मिसमैच और अल्टरेशन के कारण डिसऑनर हुए थे।
इससे पहले, एडिशनल सेशंस कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट दोनों ने इस कार्यवाही को रद्द करने से इनकार कर दिया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को गलत मानते हुए सरोज पांडे के खिलाफ चल रही कार्यवाही को रद्द (quash) कर दिया है।