Supreme Court का बड़ा फैसला: होमबॉयर्स के लिए विकल्प सीमित, RERA नियमों में बड़ा बदलाव

LAWCOURT
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AuthorMehul Desai|Published at:
Supreme Court का बड़ा फैसला: होमबॉयर्स के लिए विकल्प सीमित, RERA नियमों में बड़ा बदलाव
Overview

सुप्रीम कोर्ट ने होमबॉयर्स के लिए एक बड़ा फैसला सुनाया है। अब अगर किसी खरीदार ने रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) में शिकायत दर्ज कर दी है, तो वह बाद में कंज्यूमर फोरम में नहीं जा सकेगा, भले ही उसने RERA की शिकायत वापस ले ली हो।

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RERA में पहली शिकायत ही फाइनल

सुप्रीम कोर्ट का M/s Kabra and Associates केस में हालिया फैसला रियल एस्टेट विवादों के निपटारे के तरीके में एक बड़ा मोड़ है। कोर्ट ने "doctrine of election" की सख्त व्याख्या करते हुए कहा है कि जैसे ही कोई ग्राहक रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) का दरवाजा खटखटाता है, वह उसी मुद्दे पर किसी दूसरे कंज्यूमर फोरम में जाने का अपना अधिकार खो देता है। यह नियम तब भी लागू होगा जब RERA में दर्ज शिकायत को किसी तकनीकी वजह, जैसे क्लैरिकल गलती, के कारण बिना किसी अंतिम निर्णय के वापस ले लिया गया हो।

कंज्यूमर फोरम के रास्ते बंद

पहले ऐसा माना जाता था कि रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट, 2016, दूसरे कानूनों के साथ एक अतिरिक्त सुरक्षा कवच की तरह है, न कि एक विशेष रास्ता। एक्ट की धारा 88 भी दूसरे कानूनों को मान्य रखती है। लेकिन इस नए फैसले से एक बड़ी बाधा खड़ी हो गई है। कोर्ट ने शुरुआत में ही एक ही विकल्प चुनने को मजबूर कर दिया है, जिससे खरीदारों के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। कानूनी जानकारों का कहना है कि इससे उन लोगों के लिए बड़ा खतरा पैदा हो गया है जो जल्दबाजी में या गलत शिकायत दर्ज कर देते हैं, क्योंकि उनका यह कदम उन्हें स्थापित कंज्यूमर कमीशन सिस्टम से वंचित कर सकता है। यह फैसला राहत पाने के रास्ते को संकरा करता है, खासकर उन राज्यों में जहां RERA की कार्रवाई धीमी है।

खरीदारों के लिए बड़ा झटका

निवेशकों और व्यक्तिगत खरीदारों के लिए, यह प्रक्रियात्मक जोखिम को काफी बढ़ा देता है। कोर्ट का यह मानना है कि एक वापस ली गई, बिना सुने हुए शिकायत का भी 'फाइनल' चुनाव जैसा ही वजन होगा, इसका मतलब है कि एक छोटी सी गलती भी उन्हें कानूनी अधिकार से स्थायी रूप से वंचित कर सकती है। अब वकीलों पर यह सुनिश्चित करने का भारी दबाव होगा कि उनकी पहली फाइलिंग एकदम सही हो, क्योंकि किसी भी प्रक्रियात्मक चूक को दूसरे फोरम में जाकर सुधारा नहीं जा सकेगा। इसके अलावा, डेवलपर्स को अब एक बड़ा फायदा मिल गया है। वे किसी भी खरीदार के RERA से संपर्क की पहचान करके कंज्यूमर फोरम की कार्यवाही को बेअसर कर सकते हैं।

कानूनी रणनीति में बदलाव जरूरी

आगे चलकर, गलतियों को सुधारने की गुंजाइश बहुत कम है। हालांकि पार्टियां रिव्यू पिटीशन दायर कर सकती हैं या गंभीर क्षेत्राधिकार की विफलताओं को दूर करने के लिए संविधान के आर्टिकल 226 का सहारा ले सकती हैं, लेकिन इन रास्तों में अधिक खर्च और बहुत लंबा समय लगेगा। इस फैसले से कानूनी रणनीति में एक बड़ा बदलाव आया है, जहां फोरम का चुनाव अब एक सामरिक विकल्प नहीं, बल्कि एक अपरिवर्तनीय प्रतिबद्धता बन गया है। जैसे-जैसे रियल एस्टेट सेक्टर इस सख्त माहौल में आगे बढ़ रहा है, सटीक और पहली बार में सही कानूनी फाइलिंग का महत्व और बढ़ जाएगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.