जजों की संख्या बढ़ाने की कवायद
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने कर्नाटक हाईकोर्ट में जजों की कमी को दूर करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। कॉलेजियम ने 6 वकील, जिनमें राघवेन्द्र सीताराम श्रीवत्सा, हेमा कुलकर्णी, सुब्रमण्य रंगाराव, थडगवदी प्रकाश विवेकानन्द, बक्केश्र्वर प्रमोद और होम्बे गौड़ा शान्ति भूषण शामिल हैं, को जज बनाने की सिफारिश की है। इस फैसले से हाईकोर्ट में जजों की सक्रिय संख्या बढ़कर 54 हो जाएगी। हालाँकि, हाईकोर्ट में कुल 62 जजों की मंज़ूरी है, ऐसे में यह कदम अभी भी पूर्ण क्षमता से थोड़ा कम है। हाल ही में सरकार ने 3 जजों की नियुक्ति को मंजूरी दी थी, जिसके बाद जजों की संख्या 48 तक पहुँच गई थी।
केसों का पहाड़ और अदालती दबाव
कर्नाटक हाईकोर्ट में जजों की कमी एक गंभीर समस्या है, जिसके चलते यहां 3.3 मिलियन से अधिक मामले लंबित पड़े हैं। इसके अलावा, अधीनस्थ अदालतों में भी 2.2 मिलियन से अधिक केस अटके हुए हैं। आंकड़े बताते हैं कि कर्नाटक में प्रत्येक जज पर औसतन 1,750 मामले हैं, जो कि बहुत अधिक है। इस भारी बोझ के कारण सुनवाई में देरी होती है और मुकदमेबाजी का समय बढ़ जाता है। जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया जटिल होती है, जिसमें राज्य और केंद्र सरकार की मंज़ूरी शामिल है, और इसी वजह से नियुक्तियों में देरी होती है।
नियुक्ति प्रक्रिया और सिस्टम की कमज़ोरियां
पूरे भारत में हाईकोर्टों में जजों के लगभग 30% पद खाली रहते हैं, जो न्याय व्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा है। अतिरिक्त जजों की नियुक्ति के लिए अनुच्छेद 224 का उपयोग अक्सर एक आपातकालीन उपाय के रूप में किया जाता है, न कि एक स्थायी योजना के तौर पर। इसके अलावा, नए जजों के काम करने की क्षमता खराब इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल केस मैनेजमेंट की कमी और पुरानी अदालती संस्कृति से भी प्रभावित होती है। यदि राज्य सरकार और केंद्र का विधि मंत्रालय इन नए नामों की त्वरित अधिसूचना पर सहमत नहीं होते हैं, तो लंबित मामलों का बोझ और बढ़ेगा।
आगे की राह और प्रशासनिक चुनौतियां
जजों की पूर्ण मंज़ूर संख्या तक पहुंचना एक लंबी प्रक्रिया है। न्यायिक नियुक्तियाँ सीधे तौर पर इंटेलिजेंस रिपोर्ट, कार्यकारी जांच और न्यायपालिका व कार्यपालिका के बीच संतुलन पर निर्भर करती हैं। कॉलेजियम ने भले ही जल्दबाजी दिखाई हो, लेकिन इन नए जजों का वास्तविक प्रभाव अदालती संस्कृति को नेविगेट करने और राज्य द्वारा पर्याप्त वित्तीय व लॉजिस्टिक सहायता प्रदान करने पर निर्भर करेगा।
