Kalyani Family Dispute: ₹1 लाख करोड़ की संपत्ति पर पारिवारिक कलह, सुप्रीम कोर्ट ने नियुक्त किया मध्यस्थ

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AuthorMehul Desai|Published at:
Kalyani Family Dispute: ₹1 लाख करोड़ की संपत्ति पर पारिवारिक कलह, सुप्रीम कोर्ट ने नियुक्त किया मध्यस्थ

कल्याणी परिवार के बीच ₹1 लाख करोड़ से ज़्यादा की संपत्ति को लेकर चल रहे लंबे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम कदम उठाया है। कोर्ट ने पूर्व जस्टिस एल. नागेश्वर राव को इस पारिवारिक झगड़े में मध्यस्थता (Mediation) के लिए नियुक्त किया है। इस मामले में Hikal Limited जैसी कंपनियों की हिस्सेदारी भी दांव पर लगी है।

₹1 लाख करोड़ की संपत्ति पर छिड़ी जंग

सुप्रीम कोर्ट ने कल्याणी परिवार के बीच चल रही संपत्ति की लड़ाई में दखल देते हुए पूर्व जस्टिस एल. नागेश्वर राव को मध्यस्थ नियुक्त किया है। यह विवाद ₹1 लाख करोड़ से ज़्यादा की संपत्ति को लेकर है। इसमें भारत फोर्ज (Bharat Forge) के चेयरमैन बाबा कल्याणी और उनकी बहन सुगन्धा हिरेमठ (Sugandha Hiremath) शामिल हैं। हिरेमठ परिवार 1994 की पारिवारिक व्यवस्था (Family Arrangement) को लागू कराने की मांग कर रहा है।

Hikal Limited की हिस्सेदारी पर असर

इस कानूनी लड़ाई का एक बड़ा हिस्सा Hikal Limited की शेयर हिस्सेदारी पर केंद्रित है। हिरेमठ परिवार का दावा है कि 1994 की व्यवस्था के तहत कल्याणी समूह से जुड़ी कंपनियों की Hikal की हिस्सेदारी उन्हें मिलनी चाहिए। अगर यह व्यवस्था लागू होती है, तो Hikal में हिरेमठ परिवार की हिस्सेदारी बढ़कर 68.85% हो जाएगी, जिससे उनका नियंत्रण बढ़ जाएगा। फिलहाल, हिरेमठ परिवार और उनके सहयोगियों के पास कंपनी का करीब 34.84% हिस्सा है, जबकि कल्याणी इन्वेस्टमेंट कंपनी (Kalyani Investment Company) और बीएफ इन्वेस्टमेंट लिमिटेड (BF Investment Limited) के पास संयुक्त रूप से लगभग 34.01% हिस्सेदारी है।

कल्याणी पक्ष इस कथित समझौते की वैधता पर सवाल उठाता रहा है और उनका कहना है कि ऐसे किसी हस्तांतरण (Transfer) के लिए कोई कानूनी दस्तावेज़ मौजूद नहीं है। यह विवाद दिवंगत नीलकंठ कल्याणी (बाबा कल्याणी के पिता) द्वारा लिखी गई एक हस्तलिखित (Handwritten) चिट्ठी की व्याख्या पर भी निर्भर करता है।

अन्य संपत्तियों और HUF विवाद

यह विवाद Hikal Limited से आगे बढ़कर कहीं ज़्यादा व्यापक संपत्तियों तक फैला हुआ है। हिरेमठ परिवार ने एक कथित हिंदू अविभाजित परिवार (Hindu Undivided Family - HUF) के सदस्य के रूप में अपने अधिकारों का दावा करते हुए कानूनी कार्रवाई शुरू की है। उनका कहना है कि इस HUF के पास भारत फोर्ज (Bharat Forge) और कल्याणी स्टील्स (Kalyani Steels) जैसी बड़ी लिस्टेड कंपनियों के साथ-साथ कई प्राइवेट फर्मों, रियल एस्टेट और अन्य वित्तीय संपत्तियों में प्रमोटरों की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है। कल्याणी पक्ष ऐसे किसी HUF के अस्तित्व से इनकार करता है और उसका कहना है कि ये व्यवसाय और संपत्तियां संयुक्त संपत्ति नहीं हैं। इस झगड़े के चलते मुंबई, पुणे, वाई और कराड सहित कई जगहों पर मुकदमे दायर किए गए हैं।

मध्यस्थता की ओर कदम

सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों से मध्यस्थता के ज़रिए सौहार्दपूर्ण समाधान निकालने का आग्रह किया है। दोनों परिवारों के कानूनी प्रतिनिधियों ने जस्टिस राव के साथ मिलकर इस प्रक्रिया को शुरू करने पर सहमति जताई है। सुप्रीम कोर्ट दो हफ़्तों बाद इस बातचीत की प्रगति की समीक्षा करेगा। संबंधित कंपनियों के निवेशकों के लिए मुख्य अनिश्चितता यह है कि क्या मध्यस्थता से प्रमोटर नियंत्रण, शेयरधारिता पैटर्न या आंतरिक प्रबंधन में कोई बदलाव होगा, जो कंपनी के गवर्नेंस और भविष्य की रणनीति को प्रभावित कर सकता है।

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