सुप्रीम कोर्ट ने भारत फोर्ज के चेयरमैन बाबा कल्याणी और उनकी बहन सुगन्धा हिरेमठ के बीच चल रहे ₹1 लाख करोड़ की संपत्ति विवाद को सुलझाने के लिए रिटायर्ड जस्टिस एल. नागेश्वर राव को मध्यस्थ नियुक्त किया है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सेटलमेंट के लिए दो हफ़्ते का समय दिया है और बॉम्बे हाईकोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगा दी है।
कल्याणी परिवार में ₹1 लाख करोड़ की जंग!
भारत फोर्ज के चेयरमैन बाबा कल्याणी और उनकी बहन सुगन्धा हिरेमठ के बीच सालों से चल रहे संपत्ति के भारी-भरकम विवाद में अब सुप्रीम कोर्ट ने दखल दिया है। कोर्ट ने रिटायर्ड जस्टिस एल. नागेश्वर राव को मध्यस्थ नियुक्त किया है। यह मामला ₹1 लाख करोड़ से ज़्यादा की संपत्ति से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को 2 हफ़्ते के अंदर आपसी सुलह करने का निर्देश दिया है, और इस दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट में चल रही संबंधित अदालती कार्यवाही पर भी रोक लगा दी है।
हिकल के शेयरों पर मालिकाना हक का झगड़ा
इस कानूनी लड़ाई की जड़ 1994 के एक पारिवारिक समझौते से जुड़ी है। सुगन्धा हिरेमठ ने 2023 में केस दायर कर दावा किया है कि बाबा कल्याणी के नियंत्रण वाली कंपनियों को हिकल लिमिटेड के शेयर उन्हें ट्रांसफर करने होंगे। कोर्ट में पेश किए गए कागजातों के अनुसार, इस ट्रांसफर के बाद हिकल में हिरेमठ परिवार की हिस्सेदारी 35% से बढ़कर 69% हो जाएगी, जिससे कंपनी का कंट्रोल बदल सकता है। बाबा कल्याणी इस समझौते की अंतिम और कानूनी वैधता पर सवाल उठा रहे हैं, जिसके चलते मामला कोर्ट तक पहुंचा।
अदालती कार्यवाही और अब मध्यस्थता
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला तब आया है जब बॉम्बे हाईकोर्ट ने 4 मई को इसी तरह के एक अनुरोध को खारिज कर दिया था। तब हाईकोर्ट ने कहा था कि बाबा कल्याणी इसमें शामिल नहीं होना चाहते और पहले भी सुलह के प्रयास नाकाम रहे हैं। लेकिन अब भारत के मुख्य न्यायाधीश ने एक गैर-अदालती समाधान की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है और पार्टियों से कानूनी लड़ाई के बजाय सुलह को प्राथमिकता देने को कहा है।
परिवार की अन्य संपत्तियों पर भी नज़र
यह विवाद कल्याणी परिवार के व्यापक झगड़े का हिस्सा है, जिसमें भाई गौरीशंकर कल्याणी जैसे अन्य सदस्य भी शामिल हैं। 2024 में, सुगन्धा हिरेमठ के बच्चों, समीर हिरेमठ और पल्लवी स्वादी ने पुणे जिला अदालत में अतिरिक्त मुकदमे दायर किए हैं। इन याचिकाओं में दावा किया गया है कि भारत फोर्ज और कल्याणी स्टील्स जैसी बड़ी लिस्टेड कंपनियों में प्रमोटर होल्डिंग्स, ज़मीन और गहनों जैसी विभिन्न संपत्तियां संयुक्त पारिवारिक संपत्ति का हिस्सा हैं, जिन पर उनका हक है।
निवेशकों के लिए, मुख्य चिंता यह है कि क्या यह पारिवारिक झगड़ा लिस्टेड कंपनियों जैसे भारत फोर्ज, हिकल और कल्याणी स्टील्स के मैनेजमेंट की स्थिरता या शेयरहोल्डिंग स्ट्रक्चर को प्रभावित करेगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुकदमा खारिज करने की कार्यवाही रोक दी है, ऐसे में बाज़ार की नज़रें 2 हफ़्ते की मध्यस्थता अवधि के नतीजों पर टिकी रहेंगी। अगला बड़ा अपडेट मध्यस्थता की सफलता या विफलता पर रिपोर्ट होगी, जो यह तय करेगा कि कानूनी लड़ाई जारी रहेगी या मामला सुलझेगा।
