लीगल जंग का आगाज
यह चुनौती Moneywise Media LLP की ओर से आई है, जो Moneylife मैगज़ीन और न्यूज़ पोर्टल चलाती है। उन्होंने सिविल जज के 4 अप्रैल के एक अंतरिम आदेश को चुनौती दी है। खास बात यह है कि यह आदेश Moneywise Media को सुने बिना ही दे दिया गया था। इस आदेश के तहत Google और Meta जैसे प्लेटफॉर्म्स को सfarande परिवार द्वारा पहचाने गए लिंक और कंटेंट को हटाने का निर्देश दिया गया था, जिसमें Moneylife के तीन आर्टिकल और एक YouTube वीडियो भी शामिल था।
फ्री स्पीच पर बड़ा सवाल
सुचेता दलाल का मुख्य तर्क यह है कि जज का आदेश बहुत ज़्यादा व्यापक था। इसमें यह साफ नहीं किया गया था कि कौन सा कंटेंट कथित तौर पर मानहानिकारक (Defamatory) था। साथ ही, Moneylife को अपना पक्ष रखने का मौका भी नहीं दिया गया। Moneywise Media LLP का कहना है कि वे मूल केस में पक्षकार नहीं थे, फिर भी उन्हें अपने कंटेंट को हटाने के नोटिस मिले। कंपनी का मानना है कि इस तरह की व्यापक पाबंदियां सfarande परिवार और स्टर्लिंग बायोटेक धोखाधड़ी पर रिपोर्टिंग या आलोचना को प्रभावी ढंग से रोक सकती हैं।
आगे क्या?
Tis Hazari कोर्ट में डिस्ट्रिक्ट जज विनोद कुमार मीणा ने मनोज सfarande, Google और Meta को औपचारिक रूप से सूचित कर दिया है। अब कोर्ट 29 अप्रैल को मीडिया पर लगी इस पाबंदी के खिलाफ दलाल की चुनौती पर सुनवाई करेगा।