संपत्ति विवाद और सुप्रीम कोर्ट की भूमिका
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला की अगुआई वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इस बड़े फैमिली डिस्प्यूट को कोर्ट के बाहर आपसी सुलह से निपटाने की सलाह दी है। कोर्ट का मानना है कि रानी कपूर और उनकी बहू प्रिया कपूर के बीच यह लंबी कानूनी लड़ाई न केवल संपत्ति की स्थिरता को खतरे में डाल सकती है, बल्कि कंपनी के कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर भी गंभीर सवाल खड़े कर सकती है। कोर्ट ने परिवार के सदस्यों को जल्द से जल्द मध्यस्थता के जरिए मामला सुलझाने के लिए प्रोत्साहित किया है, खासकर रानी कपूर की उम्र को देखते हुए।
ट्रस्ट के प्रबंधन पर उठ रहे सवाल
इस पूरे विवाद की जड़ में यह आरोप है कि रानी कपूर की जानकारी के बिना एक फैमिली ट्रस्ट बनाया गया, जिसके चलते सोना ग्रुप की कई महत्वपूर्ण संपत्तियों का मालिकाना हक उनसे छिन गया। रानी कपूर का दावा है कि 2017 में स्ट्रोक आने के बाद उनसे कुछ खाली दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए गए थे। उनके बेटे संजय कपूर के निधन के बाद यह मामला और पेचीदा हो गया है, जिसके बाद प्रिया कपूर ने कंपनी के कामकाज और संपत्तियों के पुनर्गठन की कमान संभाली है।
Sona BLW Precision Forgings पर क्या होगा असर?
ऑटो कंपोनेंट सेक्टर की प्रमुख कंपनी Sona BLW Precision Forgings (SONACOMS), जिसकी मार्केट कैप फिलहाल ₹35,100 से ₹35,149 करोड़ के बीच है, इस विवाद से सीधे तौर पर प्रभावित हो सकती है। कंपनी का P/E रेश्यो 57.94 से 59.44 के आसपास है, जो निवेशकों का विश्वास दिखाता है। हालांकि, मालिकाना हक का यह झगड़ा मैनेजमेंट का ध्यान भटका सकता है, जिससे नई टेक्नोलॉजी अपनाने या कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। कंपनी की बैलेंस शीट काफी मजबूत है, जिसका डेट-टू-इक्विटी रेश्यो 0.07 से 0.08 के बीच है।
ऑटो सेक्टर की बदलती तस्वीर
Sona BLW Precision Forgings, जो ग्लोबल मार्केट में डिफरेंशियल गियर में 8.7% की हिस्सेदारी रखती है, कड़ी प्रतिस्पर्धा वाले ऑटो सेक्टर में काम करती है। कंपनी को इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) की ओर तेजी से बढ़ते इंडस्ट्री के रुझानों के साथ तालमेल बिठाना होगा। हालांकि, इस विवाद के चलते कंपनी के प्रमुख निर्णय लेने में देरी हो सकती है, जो भविष्य की ग्रोथ के लिए चुनौती बन सकता है।
