गुरुग्राम पुलिस ने स्टॉक इन्वेस्टमेंट के नाम पर **₹2.68 करोड़** की ठगी करने वाले गिरोह के **6 सदस्यों** को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह दुबई में बैठे एक हैंडलर के लिए बैंक खातों का इस्तेमाल करके मनी लॉन्ड्रिंग का काम कर रहा था। निवेशकों को सावधान रहने की ज़रूरत है, क्योंकि ये स्कैमर्स अक्सर ऊंचे रिटर्न का लालच देकर नकली इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म के ज़रिए लोगों को निशाना बनाते हैं।
Detailed Coverage
जांच की शुरुआत
इस मामले का खुलासा तब हुआ जब जनवरी 2025 में रिटायर्ड एयर मार्शल टीएस चटल ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि उन्हें स्टॉक मार्केट इन्वेस्टमेंट पर भारी रिटर्न का झांसा देकर ठगा गया है। शिकायत के बाद, पुलिस ने जांच शुरू की और कुछ पैसों को इंडियन ओवरसीज बैंक में खोले गए एक जॉइंट अकाउंट तक ट्रेस किया, जिससे मुख्य संदिग्धों तक पहुंचने में मदद मिली।
गिरफ़्तारी और नेटवर्क का खुलासा
पुलिस ने सम्राट, पुनीत, अभिषेक, विकास, दुष्यंत और सोनू नाम के 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। ये सभी एक बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क का हिस्सा थे, जिन्हें अवैध इस्तेमाल के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने का काम सौंपा गया था। पुलिस ने गाजियाबाद, दिल्ली और बहादुरगढ़ जैसे इलाकों में छापेमारी कर 90 ATM कार्ड, 16 मोबाइल फोन, 42 चेकबुक, 33 सिम कार्ड और कई लैपटॉप बरामद किए हैं। माना जा रहा है कि इन चीज़ों का इस्तेमाल पैसों के लेन-देन और पीड़ितों से संपर्क साधने के लिए किया जाता था।
दुबई कनेक्शन की जांच
जांच एजेंसियां इस बात की तफ्तीश कर रही हैं कि क्या इस लोकल गिरोह का दुबई में बैठे किसी हैंडलर से भी कनेक्शन है। पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, एक संदिग्ध अकाउंट उपलब्ध कराने के लिए दुबई में 'रुद्र' नाम के एक व्यक्ति से मिलने गया था, जिसे इस रैकेट का मास्टरमाइंड माना जा रहा है। पकड़े गए बैंक खातों का इस्तेमाल राजस्थान, तेलंगाना, झारखंड, केरल और कर्नाटक जैसे कई राज्यों में साइबर फ्रॉड के मामलों में हुआ है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
यह मामला ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट फ्रॉड के बढ़ते खतरे को दिखाता है, जहां धोखेबाज़ खुद को असली फाइनेंशियल कंपनी या सलाहकार बताकर लोगों को लूटते हैं। पुलिस अभी भी जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और पैसों के रिकॉर्ड का विश्लेषण कर रही है ताकि मनी लॉन्ड्रिंग ऑपरेशन के पूरे पैमाने का पता लगाया जा सके। आगे की कार्रवाई में बचे हुए पैसों को ट्रैक करना और अवैध खातों को फ्रीज करना शामिल है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म या सलाहकार के क्रेडेंशियल्स को SEBI-रजिस्टर्ड रिकॉर्ड से वेरिफाई करने के बाद ही पैसे ट्रांसफर करें।
