कोर्ट का सख्त फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बिजनेसमैन Satinder Singh Bhasin को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने उनकी ज़मानत रद्द कर दी है और उन्हें अगले 7 दिनों के भीतर कोर्ट के सामने पेश होने का आदेश दिया है। कोर्ट का यह कड़ा कदम नवंबर 2019 में ज़मानत की मुख्य शर्त का पालन न करने के कारण उठाया गया है। Bhasin को 'Grand Venice' प्रोजेक्ट में निवेशकों के साथ हुई धोखाधड़ी के मामले को सुलझाना था, लेकिन वे इसमें पूरी तरह नाकाम रहे। जजों ने मामलों को सुलझाने के लिए न्यायिक आदेशों का पालन करने के महत्व पर ज़ोर दिया।
₹50 करोड़ की ज़ब्ती और पैसों का बंटवारा
सिर्फ ज़मानत रद्द ही नहीं हुई, बल्कि Bhasin को ₹50 करोड़ का भारी जुर्माना भी भरना पड़ा है। यह राशि उन्होंने 2019 में ज़मानत के लिए जमा कराई थी। इस जब्त की गई रकम में से ₹5 करोड़ नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (NALSA) को दिए जाएंगे, जो ज़रूरतमंदों को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करती है। बाकी बचे ₹45 करोड़ Bhasin की कंपनियों, Bhasin Infotech and Infrastructure Private Limited (BIIPL) और Grand Venezia Commercial Towers Private Limited, के इंसॉल्वेंसी (Insolvency) मामले को संभाल रहे रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (Resolution Professional) को ट्रांसफर कर दिए जाएंगे।
'Grand Venice' प्रोजेक्ट पर विवाद
'Grand Venice' प्रोजेक्ट, जो ग्रेटर नोएडा में स्थित एक बड़ा रियल एस्टेट (Real Estate) प्रोजेक्ट है, सालों से विवादों में घिरा हुआ है। खरीदारों का आरोप है कि Bhasin और उनकी कंपनियों ने उन्हें ₹1,300 करोड़ तक की धोखाधड़ी का शिकार बनाया है। प्रोजेक्ट के अधूरे पड़े होने की वजह से निवेशकों के लगभग ₹1,000 करोड़ फंसे हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एक कमेटी ने भी प्रोजेक्ट को रहने लायक नहीं पाया था, जिसमें लापरवाही और बुनियादी सुविधाओं की कमी पाई गई थी।
आगे की कानूनी राह और ज़मानत की शर्तें
Bhasin के लिए मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। उन्हें 7 अप्रैल, 2026 को इलाहाबाद हाई कोर्ट में उनके खिलाफ दर्ज 190 FIRs को खारिज करने की याचिका पर पेश होना है। सुप्रीम कोर्ट ने उनका पासपोर्ट भी ट्रायल कोर्ट में जमा कराने का आदेश दिया है, जिससे वे बिना इजाज़त देश नहीं छोड़ सकते। अगर Bhasin अगले 12 महीनों में कोर्ट के आदेशों का पालन करते हैं, तो वे दोबारा ज़मानत के लिए अप्लाई कर सकते हैं।