सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) की बेंचों के गठन को लेकर एक बड़ा और अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ किया है कि NCLAT की बेंचें 'टेक्निकल सदस्यों' (Technical Members) के बहुमत से भी कानूनी रूप से वैध मानी जाएंगी, बशर्ते उनमें कम से कम एक 'जुडिशियल सदस्य' (Judicial Member) मौजूद हो। यह व्यवस्था कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 418A के तहत मान्य है।
इस फैसले ने Bharti Telecom Limited (BTL) की शेयर पूंजी में कटौती की योजना को भी हरी झंडी दे दी है। BTL, जो कि प्रमुख टेलीकॉम कंपनी Bharti Airtel की प्रमोटर होल्डिंग कंपनी है, इस योजना के तहत अपने माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स के लगभग 1.09% शेयर रद्द करने वाली थी। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) और NCLAT ने पहले ही इस योजना को मंजूरी दे दी थी, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा है।
माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स ने Bharti Telecom के ₹196 प्रति शेयर के बायबैक ऑफर को अनुचित बताया था। उनकी मुख्य आपत्ति यह थी कि यह कीमत, Singtel Group को हाल ही में ₹310 प्रति शेयर पर हुई अलॉटमेंट और जनवरी 2018 के ₹310 प्रति शेयर के वैल्यूएशन से काफी कम है। शेयरहोल्डर्स चाहते थे कि 10-दिन की औसत कीमत के बजाय 26-सप्ताह की औसत कीमत, जो लगभग ₹438 थी, के आधार पर वैल्यूएशन किया जाए।
Bharti Telecom ने अपने बचाव में तर्क दिया कि ₹196.80 का भुगतान एक मानक 25% डिस्काउंट पर आधारित है, जो इसलिए दिया जाता है क्योंकि ये शेयर बाज़ार में लिस्टेड नहीं हैं (lack of marketability)। कंपनी ने बताया कि यह तरीका इंडियन अकाउंटिंग स्टैंडर्ड्स के तहत स्वीकार्य है। इसके अलावा, कंपनी ने यह भी ज़ोर दिया कि लगभग 99.90% शेयरहोल्डर्स ने इस पूंजी कटौती योजना को पहले ही अपनी मंज़ूरी दे दी थी।
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय कंपनी अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के अनुरूप है, जो पुराने 1956 के अधिनियम से अलग हैं। इस तरह के फैसलों से भारत में कॉर्पोरेट विवादों के निपटारे की प्रक्रिया में तेज़ी आने की उम्मीद है। भारतीय टेलीकॉम सेक्टर इस समय बड़े कर्ज़ और 5G जैसी नई टेक्नोलॉजी को अपनाने की चुनौतियों से गुजर रहा है। ऐसे में, रेगुलेटरी और कानूनी फैसलों में स्पष्टता निवेश के माहौल को स्थिर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
Bharti Telecom, एक होल्डिंग कंपनी होने के नाते, अक्टूबर 2025 तक ₹37,415 करोड़ के कर्ज़ का सामना कर रही थी। इसकी वित्तीय स्थिरता काफी हद तक Bharti Airtel में अपनी विशाल हिस्सेदारी पर निर्भर करती है। भले ही इस हिस्सेदारी का बाज़ार मूल्य मज़बूत है, पर कंपनी की आय का मुख्य जरिया Bharti Airtel से मिलने वाला डिविडेंड (Dividend) है।
खबर लिखे जाने तक (मार्च 2026), Bharti Airtel (BHARTIARTL) के शेयर लगभग ₹1,866.40 के स्तर पर कारोबार कर रहे थे। कंपनी का मार्केट कैप (Market Capitalization) करीब ₹11.35 ट्रिलियन तक पहुंच गया था। पिछले एक साल के दौरान, स्टॉक में लगभग 13.95% की वृद्धि देखी गई है, जो बाजार में इसकी मज़बूत स्थिति को दर्शाता है।
यह सुप्रीम कोर्ट का फैसला माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स के अधिकारों को लेकर भी महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है। हालांकि कानून अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा के लिए बनाए गए हैं, लेकिन किसी भी डील को अनुचित साबित करना अक्सर मुश्किल होता है। यह निर्णय यह भी दर्शाता है कि यदि कानून ट्रिब्यूनल की संरचना को इजाज़त देता है, तो संरचनात्मक आधार पर की गई आपत्तियां कमज़ोर पड़ सकती हैं, जिससे अल्पसंख्यकों के पास विकल्प सीमित हो सकते हैं।
भविष्य को देखते हुए, यह कहा जा सकता है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से भारत में कॉर्पोरेट विवादों के निपटारे की गति और प्रकृति दोनों में बदलाव आने की संभावना है। 'टेक्निकल बहुमत' वाली बेंचों की अनुमति से पूंजी कटौती, विलय और अधिग्रहण जैसे जटिल मामलों को तेज़ी से निपटाया जा सकेगा। माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स के लिए, अब यह महत्वपूर्ण होगा कि वे ट्रिब्यूनल की संरचना पर सवाल उठाने के बजाय, सीधे तौर पर कानूनी उल्लंघनों और अनुचित व्यवहार पर अपने तर्क केंद्रित करें।