Reliance की ड्रोन यूनिट Asteria पर CBI का शिकंजा! रिश्वतखोरी के आरोपों से मचा हड़कंप

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Reliance की ड्रोन यूनिट Asteria पर CBI का शिकंजा! रिश्वतखोरी के आरोपों से मचा हड़कंप
Overview

Reliance Industries की सब्सिडियरी Asteria Aerospace पर सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने रिश्वतखोरी के गंभीर आरोपों की जांच शुरू कर दी है। इस जांच का असर भारत के तेज़ी से बढ़ते ड्रोन सेक्टर पर भी दिख सकता है।

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Reliance की ड्रोन यूनिट पर CBI का शिकंजा: क्या है पूरा मामला?

Reliance Industries की सहायक कंपनी Asteria Aerospace एक गंभीर कानूनी पचड़े में फंसती दिख रही है। सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने कंपनी पर रिश्वतखोरी के सीधे आरोप लगाए हैं और इस बाबत जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि ड्रोन के आयात (Import) की मंजूरी प्रक्रिया को तेज करने के लिए कथित तौर पर भुगतान किए गए हैं। सूत्रों के अनुसार, इस मामले में कुछ अधिकारियों को गिरफ्तार भी किया गया है। Reliance की ओर से कहा गया है कि वे ऐसी किसी भी अनधिकृत (Unauthorized) लेन-देन से अनजान हैं। वहीं, गिरफ्तार अधिकारी के कानूनी नुमाइंदे इस हिरासत को चुनौती दे रहे हैं। यह घटनाक्रम Asteria Aerospace के लिए बड़ी नियामकीय (Regulatory) चिंताएं पैदा करता है और भारत के तेजी से बढ़ते ड्रोन सेक्टर के लिए चुनौतियां भी खड़ी करता है।

भारत का बूम् करता ड्रोन मार्केट नई जांच के दायरे में

सरकारी नियमों के सरल होने के बाद से भारत के ड्रोन उद्योग ने जबरदस्त वृद्धि देखी है। 2021 के ड्रोन रूल्स ने प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित किया, जिससे ड्रोन संचालन के लिए लगभग 90% हवाई क्षेत्र खुल गया। फरवरी 2026 तक 38,500 से अधिक पंजीकृत ड्रोन और 39,890 प्रमाणित रिमोट पायलटों के साथ एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार हुआ है। Asteria Aerospace, जिसकी स्थापना 2011 में हुई थी और जिसे Reliance ने 2019 में $2.45 मिलियन (लगभग ₹20 करोड़) में अधिग्रहित (Acquire) किया था, इस बढ़ते बाजार में अपनी सेवाएं दे रही है। यह कृषि, निर्माण और तेल एवं गैस जैसे क्षेत्रों को एरियल डेटा इंटेलिजेंस सेवाएं प्रदान करती है। कंपनी का कहना है कि वह एविएशन सेफ्टी अथॉरिटी से तीन सर्टिफिकेशन प्राप्त करने वाली पहली भारतीय ड्रोन निर्माता थी। हालांकि, रिश्वतखोरी के ये आरोप मंजूरी प्रक्रियाओं की अखंडता पर सवाल उठाते हैं और नए नियामकीय बाधाएं पैदा कर सकते हैं। भारत के ड्रोन बाजार का मूल्य 2023 में $600 मिलियन (लगभग ₹5,000 करोड़) था और यह 2033 तक $4 बिलियन (लगभग ₹33,000 करोड़) से अधिक होने की उम्मीद है, जिसमें रक्षा, कृषि और लॉजिस्टिक्स प्रमुख चालक हैं।

लीगल चुनौतियों के बीच Reliance का ड्रोन में डाइवर्सिफिकेशन

Reliance Industries, जो ऊर्जा और टेलीकॉम जैसे क्षेत्रों में एक बड़ा नाम है, अपने विविधीकरण (Diversification) के तहत ड्रोन जैसी नई तकनीकों में विस्तार कर रही है। Reliance Jio Platforms, जो ग्रुप की डिजिटल आर्म है, Asteria Aerospace में 74% हिस्सेदारी रखती है। Asteria का रेवेन्यू फिस्कल ईयर 2020 में ₹1.1 करोड़ से बढ़कर फिस्कल ईयर 2024 में ₹40 करोड़ हो गया। हालांकि एनालिस्ट्स (Analysts) आम तौर पर Reliance के स्टॉक को सकारात्मक रेटिंग देते हैं, लेकिन नियामकीय जांचों के दौरान ऐतिहासिक रूप से इसके शेयरों में गिरावट देखी गई है। Reliance Industries का वर्तमान P/E रेशियो लगभग 22-24x है, जो इसके ऐतिहासिक औसत से अधिक है। यह निवेशकों के विश्वास को दर्शाता है, जिस पर इन नए आरोपों से सवाल खड़े हो सकते हैं।

जांच से Asteria और Reliance के लिए जोखिम

रिश्वतखोरी के ये आरोप Asteria Aerospace के संचालन और नियामकों के साथ उसके संबंधों के लिए जोखिम पैदा करते हैं। एक लंबी जांच आयात प्रक्रियाओं को बाधित कर सकती है, जिससे Asteria की अपनी तकनीक का उपयोग करने और ग्राहकों को सेवा देने की क्षमता प्रभावित हो सकती है, जिसमें Reliance ग्रुप की अन्य कंपनियां भी शामिल हैं। ऐसी कंट्रोवर्सी (Controversy) Reliance Industries की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जिसकी मार्केट वैल्यू लगभग ₹18 ट्रिलियन है। भले ही Reliance ने कहा है कि वह इन कथित लेन-देन में शामिल नहीं है, लेकिन जांच के दायरे में आई सहायक कंपनी से उसका जुड़ाव प्रतिष्ठा संबंधी जोखिम पैदा करता है। Data Patterns और Zen Technologies जैसी कंपनियां पहले से ही रक्षा क्षेत्र के कारोबार के कारण उच्च मूल्यांकन (High Valuation) पर हैं। Asteria के लिए एक बड़ा नियामकीय झटका इसे इस वृद्धि का लाभ उठाने से रोक सकता है। यह स्थिति Reliance Jio के नियोजित IPO को भी जटिल बना सकती है, जिसे भारत के सबसे बड़े स्टॉक मार्केट ऑफर्स में से एक माना जा रहा है।

भविष्य का आउटलुक: ग्रोथ और कंप्लायंस का संतुलन

FY26 में IT और R&D सहित भारतीय टेक्नोलॉजी सेक्टर में मजबूत वृद्धि की उम्मीद है, जिसकी इंडस्ट्री रेवेन्यू $315 बिलियन (लगभग ₹26 लाख करोड़) रहने का अनुमान है। ड्रोन उद्योग, इसका एक छोटा लेकिन तेजी से बढ़ता हिस्सा, सरकारी समर्थन और बढ़ती मांग से लाभान्वित होने के लिए तैयार है। हालांकि, Asteria Aerospace की जांच बदलते नियमों के बीच सुशासन (Good Governance) और अनुपालन (Compliance) के महत्व को उजागर करती है। DGCA (Directorate General of Civil Aviation) ने ड्रोन नियमों को आसान बनाया है, लेकिन निरंतर विकास के लिए इन नियमों का पालन करना महत्वपूर्ण है। निवेशक और नियामकों पर बारीकी से नजर रखेंगे कि Reliance Industries नई ऊर्जा, खुदरा और डिजिटल सेवाओं में अपने विस्तार को जारी रखते हुए इस चुनौती से कैसे निपटती है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.