SECI टेंडर में धोखाधड़ी का जाल
Reliance Power के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) अशोक कुमार पाल को दिल्ली पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंसेज विंग (EOW) ने गिरफ्तार किया है। उन पर ₹136 करोड़ की धोखाधड़ी करने का गंभीर आरोप है। यह मामला Reliance Power की सहायक कंपनी Reliance NU BESS Ltd द्वारा सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) के एक टेंडर में कथित तौर पर जाली बैंक गारंटी इस्तेमाल करने से जुड़ा है। जांचकर्ताओं का कहना है कि इन जाली बैंक गारंटी को साबित करने के लिए फर्जी ईमेल कम्युनिकेशन और स्ट्रक्चर्ड फाइनेंशियल मैसेजिंग सिस्टम (SFMS) कन्फर्मेशन का इस्तेमाल किया गया। बाद में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने इन कन्फर्मेशन की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए। इस कथित साजिश में दस्तावेज़ बनाने के लिए बिचौलियों को बड़ी रकम देने का भी आरोप है, जो सीधे तौर पर CFO को फंसाता है और कंपनी के आंतरिक नियंत्रणों पर सवाल खड़े करता है।
रेगुलेटरी जांच और ऑडिट का बढ़ता दायरा
यह घटना Reliance Power के लिए पहले से ही चल रही रेगुलेटरी जांचों के बीच हुई है। SECI ने नवंबर 2024 में इसी तरह के दस्तावेज़ों की गड़बड़ी के कारण कंपनी और उसकी सहायक कंपनी को तीन साल के लिए टेंडर से डिबार (प्रतिबंधित) करने का फैसला किया था, हालांकि यह प्रतिबंध दिसंबर 2024 में वापस ले लिया गया था। इसके अतिरिक्त, कंपनी के ऑडिटर ने जुलाई 2025 में एक अनक्वालिफाइड ओपिनियन दिया था, जिसने कंपनी की 'गोइंग कंसर्न' (जारी रहने की क्षमता) पर सवाल खड़े किए थे। 14 जनवरी 2026 को सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने भी अहम रेगुलेटरी एक्ट्स के उल्लंघन की जांच के लिए एक फोरेंसिक ऑडिट शुरू किया था।
मार्केट पर असर और वित्तीय दबाव
अप्रैल 2026 में Reliance Power के शेयरों में 40% से ज़्यादा की तेज़ी देखी गई थी, जिससे शेयर ₹28-₹29 के स्तर तक पहुंच गए थे। अप्रैल 2026 के अंत तक कंपनी का मार्केट कैपिटलाइज़ेशन लगभग ₹116 बिलियन था। हालांकि, इन नए आरोपों से कंपनी के लिए तत्काल जोखिम पैदा हो गया है। रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में भले ही कई टेंडर्स आ रहे हों, लेकिन धोखाधड़ी के इन आरोपों के कारण Reliance Power के लिए भविष्य में नए कॉन्ट्रैक्ट हासिल करना मुश्किल हो सकता है। वहीं, Adani Power, Tata Power और JSW Energy जैसी प्रतिस्पर्धी कंपनियां लगभग 34-37 के P/E रेश्यो पर कारोबार कर रही हैं, लेकिन उन पर ऐसे गंभीर धोखाधड़ी के आरोप नहीं हैं। Reliance Power पर लगभग ₹102.1 बिलियन का भारी लॉन्ग-टर्म डेट भी है, जो वित्तीय दबाव को और बढ़ाता है। मार्च 2025 में समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर के लिए कंपनी ने ₹2,947.40 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज करके रिकवरी दिखाई थी, लेकिन अब इन ताज़ा आरोपों से यह तस्वीर धूमिल हो गई है।
कंपनी का पक्ष और आगे की जांच
एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) द्वारा जांच जारी है, और CFO व अन्य आरोपी फिलहाल पुलिस हिरासत में हैं। Reliance Power का कहना है कि वह धोखाधड़ी का शिकार हुई है और अदालत में अपना पक्ष रखेगी। नवंबर 2025 में मैनेजमेंट बोर्ड का गठन जैसे कंपनी के हालिया कदम इन चुनौतियों के बीच देखे जा सकते हैं। इन जांचों का अंतिम नतीजा, SEBI का फोरेंसिक ऑडिट, और भविष्य के टेंडर बिड्स पर इनका असर कंपनी की ग्रोथ की संभावनाओं और नियामकों का भरोसा वापस जीतने की क्षमता के लिए महत्वपूर्ण अनिश्चितताएं बने हुए हैं।
