Reliance Power का शेयर धड़ाम! पूर्व CFO को नहीं मिली जमानत, बढ़ी मुश्किलें

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AuthorAditya Rao|Published at:
Reliance Power का शेयर धड़ाम! पूर्व CFO को नहीं मिली जमानत, बढ़ी मुश्किलें

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Reliance Power के पूर्व CFO अशोक कुमार पाल को दिल्ली हाईकोर्ट से जमानत नहीं मिली है। उन पर **₹68 करोड़** की धोखाधड़ी और बैंक गारंटी के मामले में जेल में ही रहना पड़ेगा। इस फैसले से कंपनी की अंदरूनी मजबूती और कानूनी पेचीदगियों पर सवाल खड़े हो गए हैं, जबकि वह बैटरी एनर्जी स्टोरेज मार्केट में एंट्री की कोशिश कर रही है।

कानूनीThe Legal Stalemate

पूर्व चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) अशोक कुमार पाल को जमानत से इनकार करना Reliance Power के लिए एक बड़ी चुनौती है। दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस मधु जैन की बेंच ने प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) द्वारा पेश किए गए सबूतों को देखते हुए, जिसमें प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट की धारा 50 के तहत जुटाई गई सामग्री भी शामिल थी, इस समय राहत देने से इनकार कर दिया। बचाव पक्ष की दलीलें कि उन्हें लंबे समय से हिरासत में रखा गया है और उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है, इन सबके बावजूद कोर्ट ने कहा कि धोखाधड़ी वाली बैंक गारंटी से जुड़े आरोपों की गंभीरता को देखते हुए उन्हें हिरासत में रखना जरूरी है। इस तरह, गिरफ्तारी के आठ महीने बाद भी पूर्व एग्जीक्यूटिव जेल में ही रहेंगे।

सेक्टर पर असर (Sectoral Headwinds)

Reliance Power जहां ग्रीन एनर्जी की ओर अपने कदम बढ़ा रही है और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है, वहीं कंपनी का हालिया मार्केट परफॉरमेंस कुछ और ही कहानी कह रहा है। शेयर में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है और संस्थागत निवेशकों का सेंटिमेंट कमजोर पड़ा है। टेक्निकल एनालिसिस प्लेटफॉर्म्स ने हाल ही में इस स्टॉक को 'स्ट्रॉन्ग सेल' रेटिंग दी है, जो कमजोर प्राइस मोमेंटम और पिछली सेल्स ग्रोथ में गिरावट को दर्शाता है। वहीं, Tata Power या JSW जैसी कंपनियां BESS प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ा रही हैं, Reliance Power अभी भी पुराने कानूनी विवादों और कमजोर कैपिटल स्ट्रक्चर से जूझ रही है। 10 जून 2026 को शेयर में भारी ट्रेडिंग देखी गई, जो कि विश्लेषकों के अनुसार वितरण (Distribution) का संकेत है, यानी जानकार निवेशक पोजीशन एग्जिट कर रहे हैं, जबकि यह सेक्टर 33% की CAGR ग्रोथ दिखा रहा है।

फ्रॉड केस का गहराता असर (The Forensic Bear Case)

यह मामला अनिल अंबानी ग्रुप को सता रही संरचनात्मक कमजोरियों को उजागर करता है। मौजूदा कानूनी कार्यवाही के अलावा, कंपनी का जटिल और अक्सर विवादित प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग पर निर्भर रहना बार-बार रेगुलेटरी जांच के दायरे में आया है। भले ही सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) ने पहले एक डीबारमेंट नोटिस वापस ले लिया था, लेकिन सीनियर मैनेजमेंट के खिलाफ मौजूदा आपराधिक कार्यवाही कंपनी की अपनी ड्यू डिलिजेंस प्रक्रियाओं पर संदेह पैदा करती है। पिछले तीन सालों में कंपनी का लो इंटरेस्ट कवरेज रेश्यो और निगेटिव रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) खतरे की घंटी हैं। यह दर्शाता है कि थर्मल और हाइड्रो एसेट्स में क्षमता होने के बावजूद, वित्तीय ढांचा अभी भी कमजोर है। कोर्ट में किसी भी तरह की अगली रुकावट या कर्ज भुगतान में चूक भविष्य में सरकारी टेंडर्स में कंपनी की स्थिति को गंभीर रूप से खतरे में डाल सकती है।

आगे का रास्ता (Future Outlook)

Reliance Power का मैनेजमेंट क्लीन एनर्जी पोर्टफोलियो पर फोकस बनाए हुए है और भारत के रिन्यूएबल एनर्जी लक्ष्यों का फायदा उठाना चाहता है। हालांकि, शेयर के प्रमुख शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज से ऊपर टिके रहने में नाकाम रहने और पूर्व टॉप मैनेजमेंट से जुड़े कानूनी मामले को देखते हुए, रिकवरी का रास्ता कठिन है। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक कंपनी अपनी पुरानी देनदारियों को हल नहीं करती और पिछले गवर्नेंस फेलियर से एक साफ ब्रेक नहीं दिखाती, तब तक सेक्टर की ग्रोथ के बावजूद स्टॉक में उतार-चढ़ाव बना रहेगा।

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Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.