क्या है पूरा मामला?
भारत के इतिहास के सबसे बड़े इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) में से एक, Jio Platforms के IPO पर अब एक गंभीर जांच का साया मंडराने लगा है। इस जांच में Reliance Industries के एक सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, भारत माथुर, का नाम सामने आया है। यह जांच the Directorate General of Civil Aviation (DGCA) के एक अधिकारी के साथ मिलकर ड्रोन इम्पोर्ट (Drone Import) की मंजूरी को तेज करने के लिए लगभग $16,000 (लगभग ₹13 लाख) की रिश्वत लेने के आरोपों से जुड़ी है। यह मंजूरी Asteria Aerospace के लिए मांगी गई थी, जो Reliance की ही एक सब्सिडियरी (Subsidiary) है।
माथुर को जमानत मिल गई है, और Reliance इंडस्ट्रीज के साथ-साथ उन्होंने भी इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि माथुर एक कंसल्टेंट (Consultant) थे और उन्हें किसी भी अनधिकृत ट्रांजेक्शन (Unauthorized Transaction) की जानकारी नहीं थी।
Reliance Industries, जिसका मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalisation) लगभग ₹19.79 ट्रिलियन है, का शेयर ₹1,436.00 पर ट्रेड कर रहा था (5 मई 2026)। ऐसे में, इस जांच का असर कंपनी की इमेज और आने वाले IPO पर पड़ना तय है। वैसे भी, भारतीय प्राइमरी मार्केट (Primary Market) में इन दिनों सुस्ती छाई हुई है, और कंपनियां रेगुलेटरी हर्डल्स (Regulatory Hurdles) का सामना कर रही हैं। SEBI ने हाल ही में IPO साइज को 50% तक एडजस्ट करने की फ्लेक्सिबिलिटी दी है, जो मौजूदा मार्केट की सावधानी को दर्शाता है।
Reliance ने 2019 में Asteria Aerospace को $2.45 मिलियन में एक्वायर (Acquire) किया था। इस सब्सिडियरी का रेवेन्यू (Revenue) वितीय वर्ष 2020 के ₹11 मिलियन से बढ़कर वितीय वर्ष 2024 में ₹400 मिलियन तक पहुँच गया था। हालांकि, इस घूसखोरी की जांच से सब्सिडियरी में कंप्लायंस (Compliance) को लेकर सवाल उठ रहे हैं, जबकि Reliance इंडस्ट्रीज हमेशा से अपनी मजबूत कॉर्पोरेट गवर्नेंस (Corporate Governance) का दावा करती आई है।
यह आरोप, Reliance के इनकार के बावजूद, Jio IPO के लिए एक बड़ा 'गवर्नेंस ओवरहैंग' (Governance Overhang) पैदा करते हैं। खासकर ESG (Environmental, Social, and Governance) पर ध्यान देने वाले निवेशक कंपनी के इंटरनल कंट्रोल्स (Internal Controls) की बारीकी से जांच करेंगे। भले ही रिश्वत की रकम Reliance के स्केल के हिसाब से कम हो, पर यह अंदरूनी कंप्लायंस या रिस्क मैनेजमेंट (Risk Management) की गहरी चिंताओं का संकेत दे सकती है।
इसके अलावा, Jio की लिस्टिंग कुछ पेंडिंग (Pending) सरकारी नोटिफिकेशन्स के कारण भी देरी का सामना कर रही है। SEBI द्वारा अप्रूव किए गए नए लिस्टिंग रेगुलेशंस (Listing Regulations) के फाइनल होने का इंतजार है, जो मेगा-लिस्टिंग्स के लिए महत्वपूर्ण हैं।
इस घूसखोरी की जांच का नतीजा और नए लिस्टिंग रूल्स का फाइनल होना, Jio Platforms के आगे बढ़ने के लिए बेहद जरूरी है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि Jio IPO की वैल्यू पर असर कम हो सकता है, लेकिन फिलहाल मार्केट की नजर Reliance के इन गवर्नेंस मुद्दों को सुलझाने और रेगुलेटरी मंजूरी हासिल करने पर है। जांच के नतीजे और निवेशकों की मांग, लिस्टिंग टाइमलाइन को प्रभावित कर सकती है।
