विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने NEET परीक्षा की अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर लोकसभा में दिए अपने बयान पर माफी मांगने से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया। हालांकि, सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान किसी भी तरह की गोलीबारी या अत्यधिक बल प्रयोग का आदेश नहीं दिया गया था।
राहुल गांधी का invulnerable स्टैंड
विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हाल ही में लोकसभा में दिए अपने बयानों पर माफी मांगने से औपचारिक रूप से मना कर दिया है। यह विवाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ गांधी के आरोपों से जुड़ा है, जिन पर उन्होंने NEET परीक्षा की अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग करने का आदेश देने का आरोप लगाया था।
Allegations और संसदीय बहस
एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान, गांधी ने अपने दावों का विवरण देते हुए कहा कि प्रदर्शन में भाग लेने वाले छात्रों को कठोर पुलिस रणनीति का सामना करना पड़ा। उन्होंने विशेष रूप से आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को शॉक बैटन (shock baton) और अन्य उपकरणों से चोटें आईं, और एक प्रदर्शनकारी की दृष्टि खोने का गंभीर खतरा बताया। गांधी ने यह भी दावा किया कि उन्होंने गृह मंत्री को संसद परिसर के बाहर आयोजित प्रदर्शन के दौरान पुलिस अधिकारियों के साथ बातचीत करते देखा था।
ये बयान लोकसभा के एक गरमागरम सत्र के बाद आए। सत्ता पक्ष के सदस्यों ने इन Allegations का पुरजोर विरोध किया। संसदीय मामलों के केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने गांधी को उनके दावों का समर्थन करने के लिए सबूत पेश करने की चुनौती दी। साथ ही, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सरकार की ओर से Allegations का खंडन करते हुए जोर देकर कहा कि सुरक्षा बलों द्वारा छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान गोलीबारी का कोई आदेश नहीं दिया गया था और न ही कोई जीवित कारतूस (live ammunition) इस्तेमाल किया गया था।
NEET Protests का संदर्भ
ये विरोध प्रदर्शन छात्र समूहों द्वारा आयोजित किए गए थे जो NEET परीक्षा प्रक्रिया में कथित पेपर लीक और प्रणालीगत मुद्दों के लिए जवाबदेही की मांग कर रहे थे। यह वर्तमान संसदीय सत्र में एक उच्च-तनाव वाला दौर है, जो कानून-व्यवस्था और छात्र कल्याण के मुद्दों पर सत्तारूढ़ सरकार और विपक्ष के बीच गहरे मतभेदों को दर्शाता है। आगे का मुख्य विवाद यह होगा कि क्या गांधी सदन में अपने दावों को पुष्ट करने के लिए और सबूत पेश करेंगे, या सरकार लोकसभा सदस्यों के आचरण के संबंध में आगे की प्रक्रियात्मक कार्रवाई करेगी।
