Raghav Chadha AI Deepfakes: दिल्ली कोर्ट से मिली राहत की गुहार, MP ने दायर की याचिका

LAWCOURT
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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Raghav Chadha AI Deepfakes: दिल्ली कोर्ट से मिली राहत की गुहार, MP ने दायर की याचिका
Overview

सांसद राघव चड्ढा ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने अपनी पर्सनालिटी राइट्स को AI डीपफेक और फेक कंटेंट से बचाने की मांग की है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब कई जाने-माने लोग AI के दुरुपयोग को लेकर चिंतित हैं।

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AI के दुरुपयोग के खिलाफ कानूनी ढाल

भारतीय जनता पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर अपनी पर्सनालिटी और पब्लिसिटी राइट्स को AI-जनरेटेड डीपफेक और डिजिटल मैनिपुलेशन से बचाने की मांग की है। उनकी याचिका सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उनकी छवि, आवाज और Likeness के दुरुपयोग को रोकने की मांग करती है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब पब्लिक फिगर्स के बीच डिजिटल प्रतिरूपण (Digital Impersonation) और झूठी सामग्री को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। हाई कोर्ट इस मामले की समीक्षा करेगा ताकि ऐसे उल्लंघनों के खिलाफ सुरक्षात्मक उपाय स्थापित किए जा सकें।

डिजिटल युग में कानूनी मिसालें

डिजिटल युग में पर्सनालिटी राइट्स की सुरक्षा के बढ़ते चलन का हिस्सा है चड्ढा का यह कानूनी कदम। पहले भी कई हाई-प्रोफाइल व्यक्तियों ने अपनी डिजिटल पहचान की सुरक्षा के लिए कोर्ट से आदेश प्राप्त किए हैं। इनमें अभिनेता अनिल कपूर और अमिताभ बच्चन शामिल हैं, जिन्हें उनके नाम, आवाज और छवियों के अनधिकृत उपयोग के खिलाफ सुरक्षा मिली थी, खासकर AI-संचालित कंटेंट के संबंध में। हाल ही में, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी अपने पर्सनालिटी राइट्स के लिए इसी तरह की न्यायिक सुरक्षा हासिल की थी। यह न्यायिक दिशा-निर्देशों को पहचान रहा है और इन डिजिटल अधिकारों को लागू कर रहा है।

कोर्ट की भूमिका और भविष्य का प्रभाव

यह मामला जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। चड्ढा की ओर से एडवोकेट्स सतत आनंद और निखिल अराधे पेश हो रहे हैं। यह कानूनी कार्रवाई एडवांस्ड AI टेक्नोलॉजी द्वारा प्रस्तुत चुनौतियों से निपटने के लिए मजबूत कानूनी ढांचे की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करती है। इस मामले का परिणाम भारत में पर्सनालिटी राइट्स के कानूनी परिदृश्य और AI-जनरेटेड कंटेंट के नियमन को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकता है। यह सार्वजनिक विश्वास और व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकने वाले शोषण और गलत सूचना के खिलाफ अपने डिजिटल किरदारों का बचाव करने वाले सार्वजनिक हस्तियों के लिए नए मानक स्थापित कर सकता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.