नियामक सख्ती का दायरा बढ़ा
अनिल अंबानी और रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) के आसपास नियामक जांच का दायरा और बढ़ गया है, जो अब लंबी पूछताछ और महत्वपूर्ण संपत्तियों की कुर्की तक पहुंच गया है। कथित बैंक लोन फ्रॉड से जुड़े इन एक्शन के कारण RCOM की पहले से नाजुक वित्तीय स्थिति पर और गहरा साया मंडरा रहा है, जबकि भारतीय टेलीकॉम सेक्टर अपने प्रमुख खिलाड़ियों द्वारा मजबूत विस्तार और वृद्धि देख रहा है।
जांच की आंच और संपत्तियों की कुर्की
प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सामने अनिल अंबानी 26 फरवरी 2026 को करीब 9 घंटे तक पेश हुए। यह Reliance Communications (RCOM) से जुड़े कथित बैंक लोन फ्रॉड के मामले में उनकी दूसरी लंबी पूछताछ थी। यह पेशी पिछली बार हाजिरी न भरने के बाद आई ताजा समन के बाद हुई। इसी के साथ, ED ने RCOM से जुड़े मनी-लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत अंबानी के लग्जरी निवास 'Abode' को ₹3,716.83 करोड़ की अनुमानित कीमत पर प्रोविजनली अटैच कर लिया है।
कानूनी दबाव को और बढ़ाते हुए, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अनिल अंबानी और RCOM के खिलाफ 2013 से 2017 के बीच बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ ₹2,223.17 करोड़ के फ्रॉड का एक नया मामला दर्ज किया है। यह बैंक की शिकायत पर आधारित है। CBI ने अंबानी के आवास और RCOM के ऑफिसों पर भी सर्च (Searches) की, जहां से लोन ट्रांजैक्शन से जुड़े दस्तावेज मिले हैं। CBI की FIR में आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी की धाराओं का जिक्र है, जो लोक सेवकों की मिलीभगत की संभावित जांच का संकेत देता है। इन दोहरी नियामक कार्रवाइयों से RCOM के पुराने वित्तीय सौदों की जांच की गंभीरता का पता चलता है, जहां घरेलू और विदेशी लेनदारों का कुल बकाया लोन ₹40,185 करोड़ बताया गया है।
सेक्टर की तेजी के बीच RCOM की बदहाली
जहां नियामक संस्थाएं RCOM की कथित गड़बड़ियों पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही हैं, वहीं कंपनी भारतीय दूरसंचार बाजार के फलते-फूलते परिदृश्य के बीच एक स्पष्ट आउटलायर बनी हुई है। 26 फरवरी 2026 तक, RCOM का शेयर ₹0.90 पर कारोबार कर रहा था, जो लोअर सर्किट लिमिट (Lower Circuit Limit) को छू गया था। इसकी मार्केट कैप (Market Capitalization) लगभग ₹254 करोड़ थी। कंपनी का प्राइस-टू-अर्निंग्स रेशियो (P/E Ratio) काफी नेगेटिव है, जो भारी नुकसान का संकेत देता है, और इसका शेयर लगातार सभी प्रमुख मूविंग एवरेज (Moving Averages) के नीचे ट्रेड कर रहा है, जो लगातार बियरिश ट्रेंड (Bearish Trend) और कमजोर टेक्निकल पोजिशनिंग को दर्शाता है।
यह वित्तीय संकट 31 दिसंबर 2025 तक लगभग ₹40,410 करोड़ के रिपोर्टेड कर्ज के स्तर से और बढ़ गया है, जिसमें डिफॉल्ट (Defaults) ₹28,826 करोड़ तक पहुंच गए हैं। इसकी तुलना में, भारतीय टेलीकॉम सेक्टर में जबरदस्तmomentum देखा जा रहा है। Reliance Jio 43% एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) मार्केट शेयर के साथ आगे है, जिसके बाद भारती एयरटेल 39.9% और वोडाफोन आइडिया 13.3% हिस्सेदारी के साथ पीछे हैं। 5G एडॉप्शन और प्रीमियम प्लान अपग्रेड से इंडस्ट्री-वाइड एवरेज रेवेन्यू पर यूजर (ARPU) ₹200 को पार करने की उम्मीद है, जिसमें Citi ने 2026 में Jio और Airtel के लिए मजबूत ARPU ग्रोथ का अनुमान लगाया है। सेक्टर-व्यापी रिकवरी में भाग लेने में RCOM की असमर्थता इस बात को रेखांकित करती है कि कैसे इसके गहरे वित्तीय और कानूनी मुद्दों ने इसे इंडस्ट्री टेलविंड्स (Tailwinds) से अलग कर दिया है।
गंभीर स्थिति और आगे का रास्ता
जारी जांचें और संपत्तियों की कुर्की Reliance Communications और इसके प्रमोटर अनिल अंबानी के लिए एक निराशाजनक तस्वीर पेश करती हैं। RCOM से जुड़े जांचों के संबंध में ED द्वारा अटैच की गई संपत्तियों का कुल मूल्य ₹15,700 करोड़ से अधिक हो गया है। यह आंकड़ा RCOM की वर्तमान मार्केट कैप ₹254 करोड़ से कहीं अधिक है, जो इसकी इंसॉल्वेंसी (Insolvency) को दर्शाता है। अंबानी का इतिहास SEBI द्वारा अगस्त 2024 में कथित धोखाधड़ी योजनाओं के लिए लगाए गए पांच साल के प्रतिबंध से भी जुड़ा है, और नवंबर 2025 तक ED द्वारा ₹7,500 करोड़ से अधिक की संपत्तियां अटैच की जा चुकी थीं।
RCOM जून 2019 से कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) में है, जो लंबे समय से चली आ रही वित्तीय संकट को दर्शाता है। 'RiseE Trust' जैसे 'पारिवारिक ट्रस्टों' का कथित तौर पर ₹3,716 करोड़ की 'Abode' प्रॉपर्टी जैसी संपत्तियों को बचाने के लिए उपयोग करना, वित्तीय हेरफेर की कहानी को हवा देता है, जिसका उद्देश्य देनदारियों से बचना है। इन बढ़ते कानूनी चुनौतियों और संपत्तियों की कुर्की से लेनदारों की किसी भी सार्थक वसूली की संभावना गंभीर रूप से बाधित होती है, जिससे लेनदारों और हितधारकों के लिए पीड़ा और लंबी हो जाती है।
वर्तमान नियामक कार्रवाई और संपत्ति कुर्की एक बढ़ते कानूनी युद्ध का संकेत देते हैं जो संभवतः RCOM की कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस को और जटिल बना देगा। कथित धोखाधड़ी वाले लेनदेन और फंड डायवर्जन की जांच के कारण लेनदारों को अनिश्चितता और वसूली की घटती संभावनाओं का सामना करना पड़ेगा। जबकि भारतीय दूरसंचार क्षेत्र 2026 में Reliance Jio और Bharti Airtel जैसे बाजार नेताओं द्वारा संचालित महत्वपूर्ण वृद्धि के लिए तैयार है, RCOM की स्थिति अत्यधिक वित्तीय संकट का एक अलग मामला बनी हुई है, जो बाजार के अवसरों के बजाय कानूनी उलझनों से प्रभावित है।
