जंतर-मंतर पर एक विरोध प्रदर्शन के दौरान 19 वर्षीय छात्र साहिल लोचाब को गोली लगने से उसकी दाईं आंख में गंभीर चोट आई है। एम्स (AIIMS) के डॉक्टरों का कहना है कि उसकी दृष्टि वापस आने की उम्मीद बहुत कम है, जिससे स्थायी अंधापन का खतरा मंडरा रहा है। यह घटना उस समय हुई जब प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं, जिनमें कई लोग घायल हो गए।
Detailed Coverage
प्रदर्शन के दौरान छात्र घायल
दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई 2026 को एक विरोध प्रदर्शन के दौरान 19 वर्षीय छात्र साहिल लोचाब को गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे एम्स (AIIMS) ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के अनुसार, छात्र की दाईं आंख में गोली लगी है और उसकी दृष्टि बहाल होने की संभावना बहुत कम है। इस चोट को एक मेडिकल इमरजेंसी माना जा रहा है।
गोली लगने से होने वाली चोटें
गोली लगने से होने वाली चोटें बेहद गंभीर हो सकती हैं, जिससे आंख का फटना, आंतरिक रक्तस्राव और रेटिना या ऑप्टिक नर्व को भारी नुकसान हो सकता है। इन मामलों में अक्सर फंसे हुए छर्रों को हटाने और आगे की क्षति को रोकने के लिए जटिल माइक्रो सर्जरी की आवश्यकता होती है। लोचाब की स्थिति भीड़-नियंत्रण के दौरान इस्तेमाल होने वाले हथियारों के जोखिमों को उजागर करती है।
घटना और आरोप
जंतर-मंतर पर हुए इस विरोध प्रदर्शन में रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) सहित कई सुरक्षा एजेंसियां शामिल थीं। घटना के बाद, सुरक्षा कर्मियों द्वारा भीड़ को तितर-बितर करने के लिए इस्तेमाल किए गए तरीकों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ प्रदर्शनकारियों ने जहां पैलेट गन के इस्तेमाल का आरोप लगाया है, वहीं दिल्ली पुलिस ने ऐसे किसी भी हथियार के इस्तेमाल से इनकार किया है।
प्रदर्शनकारियों पर व्यापक प्रभाव
इस घटना में सिर्फ लोचाब ही घायल नहीं हुआ, बल्कि प्रदर्शन के दौरान कई अन्य लोग भी चोटिल हुए। विभिन्न अस्पतालों की रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 65 प्रदर्शनकारियों और 10 पुलिसकर्मियों को चोटें आई हैं, जिनमें फ्रैक्चर और गंभीर आघात शामिल हैं। एक अन्य व्यक्ति, शेख इरशाद मंसूर, को गर्दन में फंसी गोली के लिए लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में सर्जरी की जा रही है। एक 21 वर्षीय महिला की हालत भी गंभीर लेकिन स्थिर बताई जा रही है। यह घटना राजधानी में चल रहे प्रदर्शनों की अस्थिर प्रकृति को दर्शाती है।
