कंपनी की हालत और ऑडिटर की गंभीर चेतावनियाँ
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के जनवरी 2021 के आदेश के बाद से Premier Limited इनसॉल्वेंसी की प्रक्रिया से गुजर रही है। कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के अधिकार निलंबित हैं और कामकाज एक रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (Resolution Professional) संभाल रहा है। ऐसे में, 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त हुई तीसरी तिमाही (Q3 FY26) और नौ महीनों के वित्तीय नतीजे बेहद निराशाजनक रहे हैं।
नतीजे बताते हैं कंपनी का बुरा हाल:
स्टैंडअलोन (Standalone) आधार पर:
Q3 FY26 में कंपनी का रेवेन्यू (Revenue) ₹29 लाख रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही (₹29 लाख) के बराबर है, लेकिन पिछली तिमाही (Q2 FY26) के ₹193 लाख की तुलना में काफी कम है। 'अन्य आय' (Other Income) से ₹93 लाख जुड़ने के बाद कुल आय ₹122 लाख रही। हालांकि, कुल खर्चे ₹204 लाख तक पहुंच गए, जिसके परिणामस्वरूप ₹175 लाख का स्टैंडअलोन नेट लॉस (Net Loss) हुआ। यह पिछले साल की Q3 FY25 के ₹120 लाख के घाटे और Q2 FY26 के ₹42 लाख के घाटे से कहीं ज्यादा बुरा है। प्रति शेयर आय (EPS) ₹(0.58) रही।
कंसोलिडेटेड (Consolidated) आधार पर:
Q3 FY26 में कंसोलिडेटेड रेवेन्यू तो शून्य (Nil) रहा। कुल कंसोलिडेटेड आय ₹129 लाख थी, और नेट लॉस भी स्टैंडअलोन आंकड़े के बराबर, ₹175 लाख ही रहा।
नौ महीनों (Nine Months) की अवधि के लिए:
31 दिसंबर, 2025 को समाप्त नौ महीनों में, स्टैंडअलोन रेवेन्यू घटकर ₹50 लाख (पिछले साल ₹78 लाख) रह गया। नेट लॉस ₹411 लाख रहा, जो पिछले साल (₹581 लाख) से कम है लेकिन फिर भी काफी बड़ा है। कंसोलिडेटेड नौ महीनों का रेवेन्यू भी शून्य (Nil) रहा और नेट लॉस ₹411 लाख दर्ज किया गया। इसी अवधि में ₹164 लाख की 'अन्य आय' डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन (DFCC) द्वारा अधिग्रहित भूमि के मुआवजे के रूप में मिली थी।
ऑपरेशनल स्थिति और ऑडिटर की चिंताओं की परतों को खोलना:
कंपनी की फैक्टरी, जो चाकन में है, 3 मार्च, 2020 से बंद पड़ी है क्योंकि कंपनी के पास वर्किंग कैपिटल (Working Capital) की भारी कमी है। ऑडिटर, जयेश ददिया एंड एसोसिएट्स एलएलपी (Jayesh Dadia & Associates LLP) ने अपनी क्वालिफाइड रिव्यू रिपोर्ट (Qualified Review Report) में कई गंभीर मुद्दे उठाए हैं:
- गोइंग कंसर्न अनिश्चितता (Going Concern Uncertainty): सबसे बड़ी चिंता कंपनी की नेट वर्थ (Net Worth) का खत्म होना और 'मटेरियल अनिश्चितता' है कि कंपनी भविष्य में अपना संचालन जारी रख पाएगी या नहीं। यह किसी भी निवेशक के लिए एक बहुत बड़ा रेड फ्लैग (Red Flag) है।
- एसेट इम्पेयरमेंट (Asset Impairment): ऑडिटर ने पाया कि कंपनी ने प्रॉपर्टी, प्लांट और इक्विपमेंट, कैपिटल वर्क-इन-प्रोग्रेस और इनटैंगिबल एसेट्स (Intangible Assets) के कैरिंग वैल्यू (Carrying Value) के इम्पेयरमेंट का सही से आकलन नहीं किया है।
- रेजोल्यूशन प्लान का प्रभाव: NCLT से मंजूरी का इंतजार कर रहे रेजोल्यूशन प्लान (Resolution Plan) का एसेट्स और लायबिलिटीज (Liabilities) पर क्या असर पड़ेगा, इसे लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है।
- क्रेडिटर क्लेम्स (Creditor Claims): स्वीकृत क्रेडिटर क्लेम्स और वित्तीय नतीजों में बताए गए आंकड़ों के बीच संभावित विसंगतियां हो सकती हैं।
- ऑपरेशनल गवर्नेंस (Operational Governance): कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) की मीटिंग मिनट्स (Minutes) में वर्ष के दौरान हुए खर्चों की मंजूरी न होना, कंपनी सेक्रेटरी (Company Secretary) और इंटरनल ऑडिटर (Internal Auditor) की नियुक्ति में विफलता जैसी 'कंपनीज एक्ट, 2013' की धाराओं का उल्लंघन भी उजागर किया गया है।
- IEPF अनुपालन: ₹46.55 लाख की लावारिस परिपक्व फिक्स्ड डिपॉजिट (Fixed Deposits) को इन्वेस्टर एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड (IEPF) में ट्रांसफर करने में देरी की गई।
आगे का रास्ता: अनिश्चितता और NCLT पर निर्भरता
Premier Limited का भविष्य पूरी तरह से NCLT द्वारा रेजोल्यूशन प्लान को मंजूरी देने पर निर्भर करता है। ऑपरेशन बंद होने, भारी वित्तीय संकट और ऑडिटर की गंभीर रिपोर्ट के साथ, जोखिम बहुत अधिक हैं। निवेशकों को NCLT से आने वाले अपडेट्स पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। कंपनी की मौजूदा स्थिति को देखते हुए मैनेजमेंट की ओर से कोई फॉरवर्ड गाइडेंस (Forward Guidance) नहीं दिया गया है, जो कि CIRP के तहत सामान्य है।