उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में पुलिस ने एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया है। एक ऐसे कॉल सेंटर पर छापा मारा गया है जो Flipkart कस्टमर सपोर्ट बनकर लोगों से ठगी कर रहा था। इस गैंग ने 5 राज्यों के ग्राहकों से करीब **₹2.5 लाख** की धोखाधड़ी की है। पुलिस अब उस सोर्स का पता लगा रही है जहां से ग्राहकों का डेटा लीक हुआ।
कैसे चल रहा था ये रैकेट?
गाजियाबाद के शक्ति खंड इलाके में एक घर से चल रहे इस गोरखधंधे का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस को साइबर क्राइम पोर्टल से मिली खुफिया जानकारी के बाद यह कार्रवाई की गई। मौके से 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जो इस ठगी के रैकेट को चला रहे थे।
मास्टरमाइंड की तलाश
गिरफ्तार हुए लोगों के नाम राजू कुमार, आदित्य, विराट चौधरी, आशीष, पंकज शर्मा और खुशी हैं। हालांकि, पुलिस अभी भी दो मुख्य सदस्यों, काजल और सिद्धार्थ की तलाश कर रही है। शुरुआती जांच में पता चला है कि सिद्धार्थ इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड था और उसने बिहार से ग्राहकों का डेटा हासिल किया था।
ठगी का तरीका
ये ठग लोगों को फोन करके बताते थे कि उनके ऑर्डर में कोई दिक्कत है, जैसे पेमेंट अटक गई है या ट्रांजेक्शन पेंडिंग है। Flipkart के कस्टमर सपोर्ट एग्जीक्यूटिव बनकर, वे ग्राहकों को ऑर्डर वेरिफाई करने या रिफंड दिलाने के नाम पर अतिरिक्त पैसे देने या अपनी बैंकिंग डिटेल्स बताने को मजबूर करते थे। ये गिरोह उत्तर प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, राजस्थान और तेलंगाना जैसे राज्यों के ग्राहकों को निशाना बना रहा था।
कितना हुआ नुकसान?
फिलहाल, इस गिरोह ने करीब ₹2.5 लाख की ठगी की है। पुलिस का मानना है कि असली आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा हो सकता है, क्योंकि अभी और भी शिकायतें सामने आ रही हैं। छापेमारी के दौरान पुलिस ने 10 मोबाइल फोन और ₹20,010 नकद भी बरामद किए हैं। जब्त किए गए फोन के IMEI नंबर कई साइबर फ्रॉड की शिकायतों से मेल खा रहे हैं।
तेलंगाना से भी कनेक्शन
इस मामले का कनेक्शन तेलंगाना के साइबरabad में दर्ज एक केस से भी जुड़ा है, जो इस बात का संकेत देता है कि इस गिरोह की पहुंच कितनी लंबी थी। पुलिस जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की फॉरेंसिक जांच करवा रही है ताकि बैंक खातों और नेटवर्क के अन्य सदस्यों का पता लगाया जा सके।
