Nirmohi Akhara Ram Mandir Case: महंतों पर सवाल! सुप्रीम कोर्ट सुनवाई से पहले बड़ा फेरबदल

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Nirmohi Akhara Ram Mandir Case: महंतों पर सवाल! सुप्रीम कोर्ट सुनवाई से पहले बड़ा फेरबदल

सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर दान मामले की सुनवाई से ठीक पहले, निरमोही अखाड़ा ने महंत धर्म दास और महंत दिनेश दास से दूरी बना ली है। संगठन का कहना है कि ये दोनों अब उनका प्रतिनिधित्व करने के लिए अधिकृत नहीं हैं, जिससे कानूनी दलीलों पर असर पड़ सकता है।

नेतृत्व पर सवाल, अखाड़े ने बनाई दूरी

सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर से जुड़े दान मामले की सुनवाई की तारीख नजदीक आते ही निरमोही अखाड़े के भीतर नेतृत्व को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। अखाड़े के प्रवक्ता ने साफ कर दिया है कि महंत धर्म दास अब संगठन के सदस्य नहीं हैं और न ही वे किसी भी आधिकारिक क्षमता में अखाड़े का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं।

कानूनी प्रतिनिधित्व पर असर?

यह बड़ा कदम महंत धर्म दास और महंत दिनेश दास की स्थिति पर आई खबरों के बीच आया है। हालांकि दिनेश दास राम मंदिर ट्रस्ट का हिस्सा हैं, लेकिन अखाड़े के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि उनके पास अखाड़े के आंतरिक फैसलों में कोई अधिकार नहीं है। आगामी कानूनी कार्यवाही में स्पष्टता सुनिश्चित करने के लिए, संगठन ने अपने कानूनी पक्ष को संभालने के लिए एक विशेष टीम नामित की है। अब अधिकृत प्रतिनिधियों में सीनियर एडवोकेट सुशील कुमार जैन और पुनीत जैन, एडवोकेट तरुणजीत लाल वर्मा, महंत सीताराम दास और आधिकारिक प्रवक्ता शामिल हैं।

पुराने विवाद की झलक

इन ताजा घटनाओं की जड़ें लंबे समय से चले आ रहे आंतरिक मतभेदों में हैं। प्रवक्ता ने फरवरी 1982 के एक पुराने विवाद का जिक्र किया, जो बाहरी आंगन, विशेष रूप से राम

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