OpenAI पर न्यूयॉर्क टाइम्स का बड़ा आरोप: कोर्ट को गुमराह करने का मामला दर्ज

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
OpenAI पर न्यूयॉर्क टाइम्स का बड़ा आरोप: कोर्ट को गुमराह करने का मामला दर्ज

न्यूयॉर्क टाइम्स (New York Times) और कई अन्य प्रकाशकों ने अमेरिकी कोर्ट से OpenAI के खिलाफ कार्रवाई (Sanctions) की मांग की है। उन पर आरोप है कि AI कंपनी ने कोर्ट को यह बताने में झूठ बोला कि वह कॉपीराइट वाली सामग्री को सर्च कर सकती है या नहीं। प्रकाशकों का दावा है कि OpenAI गुप्त रूप से ऐसी सर्च कर रहा था, जबकि कोर्ट को यह कह रहा था कि यह संभव नहीं है।

क्या है पूरा मामला?

न्यूयॉर्क टाइम्स (New York Times) की अगुवाई में कई बड़े न्यूज़ पब्लिशर्स ने मैनहट्टन की एक फेडरल कोर्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनी OpenAI के खिलाफ सेंशन (Sanctions) यानी दंड की मांग करते हुए एक मोशन फाइल किया है। इन प्रकाशकों का आरोप है कि AI कंपनी ने कोर्ट को अपनी तकनीकी क्षमताओं के बारे में गलत जानकारी दी है।

खास तौर पर, पब्लिशर्स का दावा है कि OpenAI ने यह कहकर कोर्ट को गुमराह किया कि वह अपने बड़े भाषा मॉडल (Large Language Models) में यह नहीं खोज सकता कि AI ट्रेनिंग के दौरान कॉपीराइट वाले लेखों का इस्तेमाल हुआ है या नहीं।

कोर्ट फाइलिंग के मुताबिक, पब्लिशर्स का कहना है कि OpenAI का यह बयान कि ऐसी सर्च करना बहुत मुश्किल और यूज़र प्राइवेसी के लिए खतरनाक है, पूरी तरह से झूठा था। मोशन में यह भी कहा गया है कि कंपनी कानूनी कार्रवाई शुरू होने से पहले ही गुप्त रूप से ऐसी सर्च कर रही थी। इसके अलावा, पब्लिशर्स ने डेटा की सत्यता पर भी सवाल उठाए हैं और आरोप लगाया है कि OpenAI ने खरबों (Billions) की संख्या में ChatGPT की प्रासंगिक बातचीत को डिलीट कर दिया है, जिससे वे चल रही कानूनी लड़ाई के दौरान सर्च नहीं किए जा सकते।

कॉपीराइट लिटिगेशन पर असर

यह विवाद 2023 में न्यूयॉर्क टाइम्स द्वारा फाइल किए गए मुकदमे से जुड़ा है। इसमें आरोप लगाया गया था कि OpenAI और उसके पार्टनर Microsoft ने ChatGPT को पावर देने वाले मॉडल को ट्रेन करने के लिए लाखों लेखों का इस्तेमाल बिना अनुमति के किया। सेंशन की मांग में यह भी कहा गया है कि कोर्ट यह घोषित करे कि चैट लॉग्स पब्लिशर्स की बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) के दुरुपयोग को साबित करते हैं। वादी (Plaintiffs) इन जटिलताओं से जुड़े वकीलों की फीस भी वसूलना चाहते हैं।

यह मामला बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों को निशाना बनाने वाली कानूनी चुनौतियों की एक बड़ी ट्रेंड का हिस्सा है। कलाकारों, लेखकों और अन्य मीडिया संगठनों ने Meta Platforms और Anthropic जैसी फर्मों के खिलाफ भी ऐसे ही मुकदमे दायर किए हैं। उनका तर्क है कि उनके रचनात्मक कार्यों का इस्तेमाल AI प्रोडक्ट्स बनाने के लिए बिना किसी मुआवजे या सहमति के किया जा रहा है। निवेशकों के लिए, ये घटनाएँ जनरेटिव AI सेक्टर के सामने मौजूद महत्वपूर्ण रेगुलेटरी और कानूनी जोखिमों को दर्शाती हैं, क्योंकि कोर्ट अब तकनीकी नवाचार और बौद्धिक संपदा अधिकारों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

पिछली गवाही और विसंगतियाँ

कोर्ट के सामने दिए गए विरोधाभासी बयानों के बाद कानूनी तनाव बढ़ गया है। जहाँ OpenAI ने पहले कहा था कि उसके पास कॉपीराइट सामग्री के लिए अपने डेटासेट को स्कैन करने के उपकरण नहीं हैं, वहीं बाद में OpenAI के एक कर्मचारी की गवाही से पता चला कि कंपनी ने वास्तव में समाचार प्रकाशकों के स्वामित्व वाली सामग्री के लिए कई बार सर्च की थी। यह विसंगति सेंशन की वर्तमान मांग का मुख्य कारण है। जैसे-जैसे मामला आगे बढ़ता है, यह देखा जाएगा कि क्या कोर्ट को गलत मंशा (Bad Faith) के पर्याप्त सबूत मिलते हैं, जिसका भविष्य में कॉपीराइट उपयोग और AI डेवलपर्स पर लगाए जाने वाले पारदर्शिता की आवश्यकताओं पर असर पड़ सकता है।

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