बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BAI) ने सुप्रीम कोर्ट में वकीलों के लिए एक राष्ट्रीय डिजिटल रजिस्ट्री (National Digital Registry) बनाने का प्रस्ताव दिया है। यह आधार कार्ड की तरह काम करेगा, जिससे वकीलों की पहचान और प्रमाणिकता को आसानी से जाँचा जा सकेगा और फर्जी वकीलों पर लगाम लगाई जा सकेगी।
क्या हुआ?
बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BAI) ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। संस्था ने देश भर के वकीलों के लिए एक नेशनल डिजिटल रजिस्ट्री फॉर द लीगल प्रोफेशन ऑफ इंडिया (NDRLP) बनाने का प्रस्ताव रखा है। इसका मुख्य उद्देश्य हर वकील के लिए एक यूनिक डिजिटल पहचान बनाना है, जो आधार कार्ड की तरह होगी। इस पहचान से वकील की डिग्री, बार काउंसिल में पंजीकरण की स्थिति और किसी भी अनुशासनात्मक कार्रवाई का रिकॉर्ड जुड़ा होगा।
पारदर्शिता के लिए क्यों जरूरी है?
फिलहाल भारत में वकीलों का रिकॉर्ड अलग-अलग राज्यों की बार काउंसिल के पास है, जिनकी संख्या 23 है। हर काउंसिल के अपने नियम और रिकॉर्ड रखने का तरीका है। इस वजह से एक सिंगल, रियल-टाइम डेटाबेस का अभाव है। इससे अदालतों, मुवक्किलों और अन्य अधिकारियों के लिए यह तुरंत पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि कोई व्यक्ति वाकई में एक प्रमाणित वकील है या नहीं। एक केंद्रीय डिजिटल सिस्टम से फर्जी वकीलों का खतरा कम होगा और कानूनी व्यवस्था में भरोसा बढ़ेगा।
कोर्ट की क्या है राय?
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने इस प्रस्ताव को एक "नया सुधार" बताया है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि इसे लागू करने में सावधानी बरतनी होगी। जजों ने सबसे बड़ी चुनौती यह बताई कि वेरिफिकेशन (सत्यापन) का स्रोत क्या होगा। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि लॉ यूनिवर्सिटीज़ (Law Universities) की भागीदारी बहुत जरूरी है, क्योंकि वही छात्रों की डिग्री की पुष्टि कर सकती हैं। आगे बढ़ने से पहले, इन संस्थानों को शैक्षणिक रिकॉर्ड की प्रामाणिकता की पुष्टि करने के लिए भागीदार बनना होगा।
आधुनिक शासन की चुनौतियाँ
सिर्फ डिग्री की जांच के अलावा, BAI की याचिका में वकीलों के व्यवहार को लेकर बढ़ती चिंताओं का भी जिक्र है। यह प्रस्ताव वकीलों के सोशल मीडिया पर आचरण के लिए नियामक दिशानिर्देश तय करने की मांग करता है। इसमें ग्राहकों को लुभाने, गलत जानकारी देने या अनुचित टिप्पणी करने जैसे मुद्दे शामिल हैं। यह रजिस्ट्री पेशेवर नैतिकता के उच्च मानकों को बनाए रखने का एक जरिया बन सकती है।
निवेशकों और विशेषज्ञों को क्या देखना चाहिए?
यह पहल फिलहाल एक कानूनी और नियामक प्रस्ताव है, लेकिन यह भारत के एक बड़े पेशेवर क्षेत्र के डिजिटलीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अगली बड़ी खबर गर्मी की छुट्टियों के बाद कोर्ट के फैसले से आएगी। विशेषज्ञों को इस बात पर नज़र रखनी चाहिए कि यह रजिस्ट्री मौजूदा बार काउंसिल ऑफ इंडिया के ढांचे के साथ कैसे जुड़ेगी, इसे लागू करने की समय-सीमा क्या होगी, और डेटा की सटीकता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लॉ यूनिवर्सिटीज़ को कैसे शामिल किया जाएगा।
