20 जुलाई को NEET-UG परीक्षा लीक के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों ने प्लास्टिक के छर्रे और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद खत्म हुए इस घटनाक्रम पर अब संसद में सरकारी बयान की मांग की जा रही है।
Detailed Coverage
जंतर-मंतर के पास प्रदर्शन और पुलिसिया कार्रवाई
20 जुलाई को 'संसद चलो' मार्च के दौरान, NEET-UG परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने गैर-घातक हथियारों का इस्तेमाल किया। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित इस प्रदर्शन में, तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों के कारण जंतर-मंतर के पास भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।
दंगा-रोधी हथियारों का इस्तेमाल
आधिकारिक पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, सुरक्षा प्रतिक्रिया में 55 नॉन-इलेक्ट्रिकल शैल, 15 इलेक्ट्रिकल शैल, 5 आंसू गैस ग्रेनेड और दंगा-रोधी बंदूकों से 2 राउंड फायर किए गए। इसके अतिरिक्त, सुरक्षा कर्मियों ने प्लास्टिक के छर्रों के 2 राउंड दागे, जिनमें प्रत्येक राउंड में 4 छर्रे थे। अधिकारियों ने इन प्लास्टिक छर्रों को धातु-आधारित छर्रों से अलग बताया है, और इस पर जोर दिया कि इन्हें कम गंभीर चोट पहुंचाने के लिए डिजाइन किया गया है।
शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रदर्शन समाप्त हो गया, लेकिन कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा इस्तेमाल किए गए तरीके राजनीतिक बहस का विषय बन गए हैं। विपक्षी सदस्य सुरक्षा बलों के आचरण के संबंध में गृह मंत्री अमित शाह से औपचारिक बयान की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों के बीच चोट लगने की खबरें आई हैं, और आधिकारिक रिकॉर्ड यह भी बताते हैं कि दिल्ली पुलिस, आरएएफ और सीआरपीएफ के कई कर्मी प्रदर्शनों के दौरान घायल हुए थे।
जारी मूल्यांकन और आधिकारिक रुख
हालांकि आलोचकों ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग का आरोप लगाया है, दिल्ली पुलिस ने सार्वजनिक रूप से इन दावों का खंडन किया है और उन्हें भ्रामक बताया है। सीआरपीएफ और आरएएफ ने अभी तक हथियारों की विशिष्ट तैनाती पर विस्तृत बयान नहीं दिया है। हालांकि, सीआरपीएफ के महानिदेशक जी.पी. सिंह ने नोट किया है कि बल घटना के बाद के मूल्यांकन की योजना बना रहा है, जिसके बाद घटना पर अंतिम रिपोर्ट प्रदान की जा सकती है।
निवेशक और इस क्षेत्र पर नजर रखने वाले पर्यवेक्षक यह नोट कर सकते हैं कि इस तरह की नियामक और नागरिक अशांति की घटनाएं कभी-कभी व्यापक बाजार भावना को प्रभावित करती हैं, खासकर यदि वे विधायी परिवर्तनों या प्रशासनिक कार्यों में व्यवधान पैदा करती हैं। अगले चरणों में संभवतः विरोध के संचालन और सीआरपीएफ से अंतिम आंतरिक मूल्यांकन के संबंध में आगे संसदीय जांच शामिल होगी।
