नेशनल कमीशन फॉर शेड्यूल्ड कास्ट्स (NCSC) ने महाराष्ट्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (MNLU), नागपुर को भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं और आरक्षण नीतियों के पालन न करने के आरोपों पर नोटिस जारी किया है। यूनिवर्सिटी को शिकायत के जवाब में 15 दिनों के भीतर अपना पक्ष रखना होगा।
भर्ती में धांधली के आरोप
NCSC ने MNLU, नागपुर के खिलाफ एक जांच शुरू की है। यह कदम एक उम्मीदवार द्वारा दायर की गई शिकायत के बाद उठाया गया है, जिसमें यूनिवर्सिटी पर भर्ती प्रक्रियाओं में गंभीर अनियमितताएं बरतने और अनुसूचित जाति (SC) के उम्मीदवारों के लिए अनिवार्य आरक्षण नीतियों का पालन न करने का आरोप लगाया गया है।
शिकायतकर्ता, नितेश रामकृष्ण गडकरी, ने यूनिवर्सिटी में गैर-शिक्षण पदों के लिए 2022-23 की भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने केयरटेकर-कम-ऑफिस असिस्टेंट और ऑफिस अटेंडेंट पदों के लिए आवेदन किया था। दिसंबर 2023 में इंटरव्यू देने के बावजूद उनका चयन नहीं हुआ। शिकायत में कहा गया है कि यूनिवर्सिटी ने तीन में से दो पदों पर उन उम्मीदवारों को नियुक्त किया जो पहले से ही वहां कार्यरत थे। इसके अलावा, आरोप है कि यूनिवर्सिटी 2018-19 से ही भर्ती में आरक्षण रोस्टर का पालन नहीं कर रही है।
कानूनी और प्रक्रियात्मक पृष्ठभूमि
यह मामला कई महीनों से चल रहा है। शिकायतकर्ता ने जुलाई 2025 में भारत के मुख्य न्यायाधीश से भी हस्तक्षेप की मांग की थी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट सचिवालय ने अक्टूबर 2025 में मामले को यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार को भेजा था। शिकायत के अनुसार, सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी से भी यूनिवर्सिटी की भर्ती संबंधी चर्चाओं का कोई खुलासा नहीं हुआ।
NCSC की कार्रवाई
NCSC ने संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह नोटिस जारी किया है। MNLU, नागपुर को 15 दिनों के अंदर एक विस्तृत जवाब देना होगा। NCSC के पास सिविल कोर्ट जैसी शक्तियां हैं, जिसके तहत वह यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधियों को तलब कर सकता है, यदि शुरुआती जवाब अपर्याप्त पाया जाता है या समय पर नहीं दिया जाता है। शिकायतकर्ता ने 2018-19 से यूनिवर्सिटी के सभी भर्ती रिकॉर्ड, चयन मेरिट लिस्ट और आरक्षण रोस्टर की स्वतंत्र जांच की मांग की है। इस जांच का परिणाम यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक शासन और आरक्षण संबंधी संवैधानिक दायित्वों के पालन के लिए महत्वपूर्ण होगा।
