मुंबई की इनरवियर ब्रांड Juliet Apparels के मालिकाना हक को लेकर नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। NCLT ने कंपनी को एक 'क्वासी-पार्टनरशिप' (Quasi-Partnership) घोषित किया है और संस्थापक परिवार के प्रतिद्वंद्वी गुट को बोर्ड में सीट देने का आदेश दिया है। हालांकि, संस्थापक की बहाली की अर्जी खारिज हो गई है।
NCLT का बड़ा फैसला: Juliet Apparels अब 'क्वासी-पार्टनरशिप' के तहत
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने मुंबई स्थित इनरवियर ब्रांड Juliet Apparels को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। ट्रिब्यूनल ने कंपनी को संस्थापक परिवार की दो विरोधी शाखाओं के बीच 'क्वासी-पार्टनरशिप' (Quasi-Partnership) के तौर पर वर्गीकृत किया है। यह फैसला संस्थापक गनपत त्रेवदिया और उनके बेटे द्वारा दायर मुकदमे के बाद आया है, जिन्होंने कंपनी में उत्पीड़न और कुप्रबंधन का आरोप लगाया था।
बोर्ड में मिलेगी प्रतिनिधित्व, पर संस्थापक की बहाली नहीं
NCLT ने गनपत त्रेवदिया को डायरेक्टर के तौर पर बहाल करने की मांग को तो ठुकरा दिया, लेकिन कंपनी के गठन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए यह माना कि यह एक पारंपरिक कॉर्पोरेट इकाई के बजाय साझेदारी की तरह काम करती है। कंपनी मूल रूप से कई पारिवारिक साझेदारी व्यवसायों के विलय से बनी थी। इसी आधार पर, NCLT बेंच (जिसमें जुडिशियल मेंबर सुशील महादेओराव कोचे और टेक्निकल मेंबर प्रभात कुमार शामिल थे) ने कंपनी को याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले गुट को बोर्ड में एक सीट देने का आदेश दिया है। इसका मकसद उन पारिवारिक सदस्यों को उचित प्रतिनिधित्व देना है जिन्हें पहले प्रबंधन से हटा दिया गया था।
आरोपों और कानूनी दांव-पेंच का दौर
इस कानूनी लड़ाई में दोनों पक्षों ने कंपनी अधिनियम के तहत कई गंभीर आरोप लगाए। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि त्रेवदिया की पत्नी और बेटे के 747,000 शेयरों के हस्तांतरण से उनके अधिकारों का हनन हुआ। इसके अलावा, बैंकिंग और प्रबंधन शक्तियों को स्थानांतरित करने वाले बोर्ड के फैसलों और कंपनी के रिकॉर्ड तक पहुंच को प्रतिबंधित करने को भी चुनौती दी गई थी। फरवरी 2025 में गनपत त्रेवदिया को डायरेक्टर पद से हटा दिया गया था, जिसके बाद यह विवाद और गहरा गया। विरोधी गुट का तर्क था कि त्रेवदिया के व्यक्तिगत आचरण के कारण उन्हें पद से हटाना उचित था और वे कंपनी का नेतृत्व जारी रखने के लायक नहीं थे।
निवेशकों और कारोबार पर असर
Juliet Apparels जैसी प्राइवेट कंपनियों के हितधारकों के लिए, यह फैसला उन पारिवारिक व्यवसायों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो साझेदारी से प्राइवेट कंपनियों में बदलते समय स्पष्ट शासन समझौते नहीं करते। ऐसे में, आंतरिक विवादों के चलते उत्पीड़न और कुप्रबंधन के दावों से कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। 'क्वासी-पार्टनरशिप' की कानूनी मान्यता का मतलब है कि भले ही किसी समूह के पास बहुमत शेयर न हों, अदालत फिर भी उन्हें कंपनी के मामलों में भाग लेने का अधिकार दे सकती है। समान पारिवारिक संरचना वाले व्यवसायों में निवेश करने वाले निवेशकों को भविष्य में कंपनी के निर्णय लेने की प्रक्रिया, प्रबंधन स्थिरता और परिचालन दक्षता पर इन शासनात्मक आदेशों के प्रभाव पर नजर रखनी चाहिए।
