NCLT का बड़ा फैसला, आपत्तियों को किया खारिज
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने Jindal Poly Films के प्रमोटरों और मैनेजमेंट द्वारा मुकदमे की स्वीकार्यता (Maintainability) को लेकर उठाई गई तमाम आपत्तियों को खारिज कर दिया है। गुरुवार को सुनाए गए इस फैसले ने भारत में अल्पसंख्यक शेयरधारकों के अधिकारों की लड़ाई को एक नया मोड़ दिया है, क्योंकि इस तरह के सामूहिक कानूनी कदम देश में बहुत कम देखने को मिलते हैं।
शेयरधारकों का आरोप: ₹2,500 करोड़ की संपत्तियों की 'स्ट्रिपिंग'
अल्पसंख्यक शेयरधारकों के एक समूह, जिसका नेतृत्व Ankit Jain कर रहे हैं, ने दावा किया है कि Jindal Poly Films ने अपनी महत्वपूर्ण संपत्तियां, खासकर एक पावर कंपनी में अपने निवेश को, बाज़ार मूल्य से काफी कम या कबाड़ के दामों पर बेच दिया। इस मुकदमे में SSJ Trust के साथ हुए सौदों को निशाना बनाया गया है। यह ट्रस्ट कथित तौर पर प्रमोटर Shyam Sunder Jindal से जुड़ा हुआ है। शेयरधारकों का आरोप है कि इन सौदों के ज़रिए कंपनी की कीमती संपत्तियों को हड़प लिया गया, जिससे कंपनी को ₹2,500 करोड़ का भारी वित्तीय नुकसान हुआ।
शेयरधारक अधिकारों के लिए एक नज़ीर और SEBI की जांच
NCLT द्वारा मामले को स्वीकार करने से अब इस केस की खूबियों पर सुनवाई होगी। यह फैसला अल्पसंख्यक निवेशकों की सामूहिक शिकायतों को सुनने के प्रति न्यायिक दृष्टिकोण में बढ़त का संकेत देता है और भविष्य के लिए एक व्यापक नज़ीर पेश कर सकता है। यह डेवलपमेंट ऐसे समय में आया है जब हाल ही में यह भी रिपोर्ट सामने आई थी कि SEBI (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) भी Jindal Poly Films की प्रतिभूति कानूनों के संभावित उल्लंघन के संबंध में जांच कर रहा है। कंपनी ने इन आरोपों पर अभी तक कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है।
