ट्रिब्यूनल का फैसला: Adani के प्लान को मिली 'हाँ', पर शर्तें लागू
नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने Adani Enterprises के Jaiprakash Associates (JAL) लिमिटेड के लिए पेश किए गए रेजोल्यूशन प्लान को आगे बढ़ाने की सशर्त मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद अब सबकी निगाहें Vedanta Limited द्वारा दायर की गई अपील पर टिकी हैं, जिसके नतीजे तय करेंगे कि यह बड़ा सौदा आखिरकार सफल होगा या नहीं।
शर्तों के साथ मंजूरी और शेयर बाज़ार का रिएक्शन
मंगलवार को NCLAT ने Vedanta Limited की उस मांग को खारिज कर दिया जिसमें Adani Enterprises के JAL के लिए मंजूर रेजोल्यूशन प्लान पर तत्काल रोक लगाने की गुहार लगाई गई थी। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि Adani का प्लान तभी लागू हो पाएगा जब Vedanta की अपील पर सुनवाई पूरी हो जाएगी। इसका मतलब है कि Adani की प्रगति फिलहाल अनंतिम है और कानूनी समीक्षा के बाद इसमें बदलाव हो सकते हैं। इस बीच, 25 मार्च 2026 को Adani Enterprises का स्टॉक 3.08% बढ़कर ₹1864.75 पर पहुंच गया, जो किसी तत्काल बाधा के दूर होने का संकेत हो सकता है। वहीं, 23 मार्च 2026 को Vedanta के शेयर 4.11% गिरकर ₹644.60 पर आ गए, जो कानूनी पेचीदगियों को लेकर निवेशकों की सावधानी को दर्शाता है।
डील का फाइनेंशियल एंगल और बैकग्राउंड
लगभग ₹2.22 ट्रिलियन मार्केट वैल्यू वाली Adani Enterprises, जो 22 मार्च 2026 तक थी, इंडिया की इनसॉल्वेंसी प्रोसेस के जरिए डिस्ट्रेस्ड एसेट्स को खरीदने में सक्रिय रही है। 25 मार्च 2026 तक इसका प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो 66.33 था, जो हाई ग्रोथ की उम्मीदों को दर्शाता है। Adani का JAL के लिए स्वीकृत प्लान लगभग ₹14,535 करोड़ का है। वहीं, ₹2.52 ट्रिलियन मार्केट वैल्यू वाली Vedanta Limited (24 मार्च 2026 तक, और 21 मार्च 2026 को 12.70 P/E रेश्यो के साथ) ने भी JAL को खरीदने की कोशिश की थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Vedanta ने सितंबर 2025 में इसके लिए ₹17,000 करोड़ की पेशकश की थी। Vedanta की याचिका में दलील दी गई है कि कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) ने प्रोसीजरल इश्यूज को नजरअंदाज किया और वैल्यू मैक्सिमाइज करने में नाकाम रही, भले ही Adani के प्लान को नवंबर 2025 में 93.81% वोटों से मंजूरी मिली थी। JAL, जिस पर ₹57,000 करोड़ से अधिक के क्लेम हैं और 28 फरवरी 2026 तक ₹55,357.39 करोड़ का बॉरोइंग बकाया है, का अधिग्रहण एक जटिल काम है, खासकर इंडिया के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में ग्रोथ को देखते हुए।
Vedanta की याचिका में क्या है खास?
Vedanta की अपील Adani के अधिग्रहण प्लान के लिए एक बड़ा रिस्क पैदा करती है। Vedanta का दावा है कि CoC ने गलती से उसके सप्लीमेंट्री बिड ऐडेंडम को रिजेक्ट कर दिया था, जिससे क्रेडिटर्स के रिटर्न में बढ़ोतरी हो सकती थी। हालांकि, CoC ने ऐसे ऐडेंडम को प्रतिबंधित करने वाले बिडिंग रूल्स का हवाला दिया था। प्रोसेस फेयरनेस और पोटेंशियल वैल्यू के बीच यह टकराव लंबी कानूनी लड़ाइयों का कारण बन सकता है, जो इंडिया के इनसॉल्वेंसी मामलों में आम है और डील की फाइनल शर्तों को बदल सकता है। CreditSights ने पहले Vedanta के JAL अधिग्रहण को वीक स्ट्रैटेजिक लिंक्स और JAL के हाई डेट के कारण निगेटिव माना था। Adani द्वारा डिस्ट्रेस्ड एसेट्स की सक्रिय खरीद को देखते हुए Adani के अपने डेट लेवल्स पर भी सवाल उठ सकते हैं। NCLAT ने भले ही तत्काल स्टे न दिया हो, लेकिन JAL की महत्वपूर्ण रियल एस्टेट, सीमेंट और पावर एसेट्स पर Adani का कंट्रोल पूरी सुनवाई लंबित रहने तक अनिश्चित बना हुआ है।
आगे क्या? 'सस्पेंस' बरकरार
NCLAT की अपकमिंग हियरिंग Vedanta की अपील पर JAL अधिग्रहण के भविष्य के लिए निर्णायक होगी। फैसला Adani के कंट्रोल की पुष्टि कर सकता है, संभवतः मामूली कानूनी बदलावों के साथ, या फिर री-नेगोशिएशन या शुरुआती मंजूरी के रिवर्सल का कारण बन सकता है। यह स्थिति इंडिया के डिस्ट्रेस्ड एसेट मार्केट के हाई-स्टेक्स एनवायरनमेंट को उजागर करती है, जहां लीगल टैक्टिक्स Adani Enterprises और Vedanta जैसी कंपनियों के लिए स्ट्रैटेजिक मूव्स और वैल्यूएशन्स को भारी रूप से प्रभावित करते हैं।